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Gen Z एम्प्लॉय ने दिया ऐसा जवाब CEO का भी घूमा दिमाग! सोशल मीडिया पर वायरल

जेन जी के आने के साथ ऑफिस में काम करने के तरीके और एम्प्लॉय से जुड़ी उम्मीदों को लेकर सोच बदल रही है. एक वायरल मामले में CEO ने एम्प्लॉय से कंपनी में आगे बढ़ने के लिए 'मालिक की तरह सोचने' को कहा. इसके जवाब ने ये सवाल खड़ा किया कि क्या कंपनी के CEO से मालिक जैसी जिम्मेदारी की उम्मीद के साथ उसे मालिक जैसी शेयर और फायदा भी मिलना चाहिए.

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क्या जेन जी को वर्क शिफ्ट के बाद करना चाहिए काम?
क्या जेन जी को वर्क शिफ्ट के बाद करना चाहिए काम?

आज की जेन जी के लिए नौकरी का मतलब सिर्फ हर महीने मिलने वाली सैलरी नहीं है. काम के साथ निजी जिंदगी, अपने टाइम और मेंटल पीस को भी वो उतनी ही अहमियत देती है. यही वजह है कि वर्क प्लेस को लेकर इस पीढ़ी का नजरिया पिछली पीढ़ियों से थोड़ा अलग दिखाई देता है. जेन जी ये समझाना चाहती है कि उसे जितने घंटे काम करने के लिए रखा गया है, उन घंटों में वो अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाए, लेकिन उसके बाद का वक्त भी उसका अपना हो. वो नौकरी को अपनी पूरी जिंदगी नहीं मानती, बल्कि जिंदगी का एक हिस्सा मानती है. इसी बदलती सोच के बीच एक जेन जी एम्प्लॉय और उसके CEO की बातचीत इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई.

ठीक वक्त पर काम, ठीक वक्त पर छुट्टी

X पर एक यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके जेन जी को वर्कर की एक आदत ने कंपनी के CEO को हैरान कर दिया. CEO के मुताबिक उनका एम्प्लॉय रोज सुबह 9 बजे से पहले ऑफिस पहुंचता है. लेकिन दोपहर में करीब 4:50 बजे वो अपना काम समेटना शुरू कर देता है.

कंप्यूटर बंद करता है और ठीक 5 बजे ऑफिस से घर जाने के लिए निकल जाता है. पोस्ट में खास तौर पर लिखा गया कि वो न तो 4:59 बजे निकलता है और न ही 5:01 बजे, बल्कि ठीक 5 बजे ऑफिस से बाहर होता है.

CEO की नजर जब उसकी इस आदत पर पड़ी, तो उन्होंने एम्प्लॉय को ऑफिस में बुलाकर उसे करियर में आगे बढ़ने के लिए 'मालिक की तरह सोचने' की सलाह दी. को वर्कर ने CEO से पूछा आपके कहने का मतलब क्या है?

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जेन जी एम्प्लॉय का कंपनी के CEO को जेन जी जवाब ​

CEO ने एम्प्लॉय से क्या कहा?

CEO के मुताबिक, मालिक की तरह सोचने का मतलब है कि एम्पलॉय सिर्फ घड़ी देखकर काम खत्म न करे. जब तक काम पूरा न हो जाए, तब तक जरूरत के हिसाब से रुके और कंपनी के काम को अपनी जिम्मेदारी समझे. उनके अनुसार, एम्प्लॉय को सिर्फ अपनी नौकरी की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कंपनी के फ्यूचर की भी परवाह करनी चाहिए.

इस पर एम्प्लॉय ने अपना सर हिलाकर CEO से ही एक सवाल पूछ लिया. 

‘तो 50% शेयर देंगे?’

एम्प्लॉय ने CEO से सीधा सवाल किया कि अगर उससे मालिक की तरह सोचने की उम्मीद की जा रही है, तो क्या उसे कंपनी का 50% शेयर दिया जाएगा?

उसने तर्क दिया कि मालिक और एम्प्लॉय की स्थिति अलग होती है. मालिक के पास कंपनी में हिस्सेदारी होती है, वो जोखिम उठाता है, फैसले लेता है और कंपनी को होने वाले फायदे में उसका भी हिस्सा होता है. वहीं कर्मचारी को अपने काम के बदले तय सैलरी मिलती है.

इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रिया

इस बातचीत के सामने आने के बाद लोगों ने भी अपने अनुभव साझा किए. कुछ लोगों का कहना था कि अगर कर्मचारी अपना काम वक्त पर पूरा कर रहा है और उसके लक्ष्य पूरे हो रहे हैं, तो सिर्फ ज्यादा देर तक ऑफिस में बैठना मेहनत का सर्टिफिकेट नहीं हो सकता.

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एक यूजर ने कहा कि एम्प्लॉय अगर तय वक्त में अपना काम पूरा कर रहा है, तो केवल कमिटमेंट दिखाने के लिए कुछ मिनट और रुकने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. वहीं एक अन्य व्यक्ति ने अपने 42 साल के वर्क एक्सपीरीयंस को शेयर करते हुए बताया कि उसने लंबे वक्त तक ऐसी जगह काम किया जहां उससे मालिक जैसी मेहनत की उम्मीद की जाती थी, लेकिन उसे एक एम्प्लॉय वाला वेतन ही मिलता था.

इस पूरी बातचीत ने काम की दुनिया में एक पुराने सवाल को फिर सामने ला दिया है-क्या अच्छा एम्प्लॉय वही है जो सबसे ज्यादा देर तक ऑफिस में बैठा रहे, या वो जो तय वक्त में अपना काम पूरी जिम्मेदारी से पूरा करे? बदलते वर्क कल्चर में टाइम, मेहनत और जिम्मेदारी को देखने का नजरिया भी बदल रहा है. एम्प्लॉयज के लिए नौकरी सिर्फ सैलरी पाने की जगह नहीं है, लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि एक्सट्रा मेहनत और एक्सट्रा को हमेशा सामान्य जिम्मेदारी मान लिया जाए. शायद सही संतुलन वहीं बनता है, जहां कंपनी अपने एम्प्लॉयज से लगन की उम्मीद करे और बदले में उनके वक्त, काम और सीमाओं का भी सम्मान करे.

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