राजस्थान के भीलवाड़ा के पुर कस्बे की रहने वाली संध्या विश्नोई ने अजरबैजान के बाकू में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप 2026 में 46 किलोग्राम वर्ग का सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया है.
संध्या ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया. पहले मुकाबले में पोलैंड की पहलवान को 10-0 से हराया. इसके बाद क्वार्टर फाइनल में रूस की खिलाड़ी को भी 10-0 से मात दी. सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की इनजहू को महज 30 सेकंड में 'झोला दांव' से चित कर फाइनल में जगह बनाई.
यह भी पढ़ें: टीम इंडिया में चोटिल खिलाड़ियों की फौज, BCCI हुआ परेशान! श्रीलंका सीरीज के बाद सख्त एक्शन तय
फाइनल में चोट के बावजूद लड़ी
फाइनल मुकाबले में जापान की कोकोना मंकीनो के खिलाफ संध्या के कान और हाथ में चोट लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. दर्द के बावजूद पूरा मुकाबला खेला, हालांकि उन्हें 11-2 से हार का सामना करना पड़ा और सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा.
Heartiest congratulations to Rajasthan’s talented wrestler Sandhya Bishnoi on winning the Silver Medal in the 46 kg category at the U-17 World Wrestling Championships 2026 in Baku, Azerbaijan.
— Col Rajyavardhan Rathore (@Ra_THORe) August 1, 2026
Your remarkable achievement is an inspiration to young athletes and daughters across… pic.twitter.com/k0QzCIyZJk
राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि
संध्या अंडर-17 विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप 2026 के फाइनल तक पहुंचने वाली राजस्थान की चौथी पहलवान बनी हैं. वहीं इस प्रतियोगिता में मेडल जीतने वाली प्रदेश की तीसरी पहलवान हैं. इससे पहले भीलवाड़ा की अश्विनी विश्नोई गोल्ड और सीकर की कोमल ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं.
यह भी पढ़ें: क्रिकेट को अलविदा, फैन्स को सलाम! रहाणे का इमोशनल पोस्ट हुआ वायरल
कोच बोले- अगला लक्ष्य गोल्ड
कोच कल्याण विश्नोई ने कहा कि संध्या ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया. अब हमारा अगला लक्ष्य विश्व चैम्पियनशिप में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है.
मजदूर पिता का संघर्ष लाया रंग
संध्या के पिता निर्मल विश्नोई भीलवाड़ा की एक फैक्ट्री में मजदूर हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी अपनी बेटी के सपनों को नहीं रोका. संध्या की बड़ी बहन भी राष्ट्रीय स्तर की पहलवान रह चुकी हैं लेकिन चोट के कारण उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी.
यह भी पढ़ें: ऋषभ पंत के बाद अब कौन बनेगा LSG का नया कप्तान? साउथ अफ्रीकी स्टार ने अटकलों पर तोड़ी चुप्पी
पिछले 4 सालों से वह रोज सुबह-शाम संध्या को अभ्यास के लिए अखाड़ा छोड़ने और लाने जाते रहे. परिवार में चार बेटियां हैं, लेकिन पिता ने कभी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी.
संध्या का अगला सपना
संध्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कोच और मामा को दिया. उनका कहना है कि चार साल की मेहनत रंग लाई है और अब उनका एकमात्र लक्ष्य भारत के लिए विश्व चैम्पियनशिप का गोल्ड मेडल जीतना है.