अजरबैजान (Azerbaijan), जिसे ईरानी अजरबैजान भी कहा जाता है. यह उत्तर-पश्चिमी ईरान में एक ऐतिहासिक क्षेत्र है, जो इराक और तुर्की की सीमा बनाता है. साथ ही, ईरान के पश्चिम में, नखचिवन स्वायत्त गणराज्य, आर्मेनिया और उत्तर में अजरबैजान गणराज्य है (Azerbaijan Geographical Location).
2012 की जनसंख्या जनगणना के अनुसार, पूर्वी अजरबैजान के चार प्रांत की आबादी शामिल है जिसमें वेस्ट अजरबैजान की आबादी 3,080,576), ज़ंजन की 1,015,734) और अर्दबील की आबादी 1,248,488 है (Azerbaijan Population). अजरबैजान क्षेत्र में, जनसंख्या में मुख्य रूप से अजेरिस शामिल हैं. अजरबैजान में अधिकांश अजरबैजानियों ट्वेल्वर शिया इस्लाम के अनुयायी हैं (Azerbaijan Religion).
अजरबैजान ईरानी संस्कृति से प्रभावित है जबकि उनके गैर-ईरानी पड़ोसियों, विशेष रूप से काकेशियन और रूसियों से भी प्रभावित हुए हैं (Azerbaijan Culture).
अजरबैजान की अर्थव्यवस्था भारी उद्योग, खाद्य उद्योग, कृषि और हस्तकला पर आधारित है. ईरानी अजरबैजान में कृषि उद्योग तुलनात्मक रूप से उच्च वर्षा के कारण देश के कई अन्य हिस्सों में अपेक्षाकृत बेहतर है. यहां हस्तशिल्प ज्यादातर एक मौसमी उद्योग है जो ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में सर्दियों के समय में होता है जब कृषि का मौसम समाप्त हो जाता है (Azerbaijan Economy).
ईरान ने तुर्की के हवाई क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइल दागी जिसे नाटो के एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया. इस खतरे के बीच पाकिस्तान ने अपने शिपिंग और समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन मुहाफिजुल बह्र' शुरू किया है.
अजरबैजान ने ईरानी हमले पर उग्र जवाब देने का मन बना लिया है. अजरबैजान ने ईरान में अपने पूरे दूतावास को खाली कर दिया है. और तबरेज में भी वाणिज्य दूतावास को खाली कर दिया है. अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने कसम खाई कि ईरान के "हमलों का जवाब दिया जाएगा."
अजरबैजान ईरान पर हमले की धमकी दे रहा है. ईरान के पास 6.10 लाख एक्टिव सैनिक, 551 एयरक्राफ्ट, 2675 टैंक और 109 नौसैनिक जहाज हैं. अजरबैजान के पास 159 एयरक्राफ्ट और 1354 टैंक हैं. ईरान की सेना अजरबैजान से कई गुना मजबूत है. अजरबैजान का ईरान पर अकेले हमला करना असंभव है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्षों के बीच तुर्की, अज़रबैजान और पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी पर संकट गहरा गया है. ईरान-इज़रायल जंग के बीच तुर्की और अज़रबैजान ने ईरान पर हमले का आरोप लगाया है, जबकि ईरान ने इनकार किया है.
ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध का आज सातवां दिन है. पिछले छह दिनों में ईरान में भारी तबाही हुई है. लेकिन इस जंग में सिर्फ ये तीन देश नहीं खाड़ी के 4 और मुस्लिम देश भी शामिल हो गए हैं. इन देशों पर हुए हमले से तनाव और बढ़ गया है. ड्रोन अटैक से अजरबैजान भड़क गया है. सुनिए राष्ट्रपति अलीयेव ने ईरान से क्या मांग की.
ईरान ने अजरबैजान पर ड्रोन से हमला किया है जिसके बाद अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत को समन किया है इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया है. दोनों देशों के बीच इस हमले को लेकर चर्चा जारी है और स्थिति गंभीर बनी हुई है.
ईरान ने हाल ही में अजरबैजान पर ड्रोन के जरिए हमला किया है. इस ड्रोन हमले की जानकारी मिलने के बाद अजरबैजान विदेश मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ईरान के राजदूत को समन किया है. यह कदम इस हमले के गंभीरता को दर्शाता है और दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना को इंगित करता है. इस घटना की भूमिका क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति पर प्रभाव डाल सकती है.
अजरबैजान ने एयरपोर्ट और स्कूल पर हुए ईरानी हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने इस हमले का आरोप ईरान पर लगाया है और इसे आतंकी कार्रवाई कहा है. उन्होंने कहा है कि अजरबैजानी सेना हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है.
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी जंग अब कई देशों तक फैलती दिख रही है. अजरबैजान, ओमान, तुर्की और साइप्रस में ड्रोन और मिसाइल घटनाओं से तनाव बढ़ा है. कई आरोप ईरान पर लगे, लेकिन तेहरान ने इन्हें खारिज कर "फॉल्स फ्लैग" साजिश बताया.
ईरान ने अजरबैजान पर ड्रोन हमला किया है जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. अजरबैजान ने ईरान के राजदूत को तलब किया है. अजरबैजान और पाकिस्तान के बीच मजबूत संबंध हैं, जबकि अजरबैजान का भारत के साथ भी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव है.
ईरान ने अजरबैजान पर ड्रोन के जरिए हमला किया है। इस हमले के बाद अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत को समन किया है. यह घटना क्षेत्र में बढ़ती तनाव और राजनीतिक दबाव को बढ़ाने वाली स्थिति को दर्शाती है. दोनों देशों के बीच संबंधों में यह घटना नई चुनौतियां ला सकती है। इस हमले की पुरजोर निंदा की गई है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. राजनीतिक विश्लेषक इस मामले को मध्य पूर्व की जटिलताओं और द्विपक्षीय विवादों के संदर्भ में देख रहे हैं.
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब तुर्की और अजरबैजान तक फैल चुका है, जहां ईरान ने नख़चिवान पर ड्रोन हमला किया. इस हमले में दो नागरिक घायल हुए हैं. अजरबैजान में ये हमला भारत में अलग निगाहों से क्यों देखा जा रहा है?
ईरान ने अब पाकिस्तान के दोस्त अजरबैजान पर ड्रोन्स से हमला किया है. ईरान ने अजरबैजान के एक एयरपोर्ट पर थोड़ी देर पहले ड्रोन बरसाए हैं. इसका निशाना एक एयरपोर्ट बना है.
ईरान ने अजरबैजान के स्वायत्त क्षेत्र नख्चीवान पर ड्रोन हमला किया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है. अजरबैजान ने ईरान के राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध जताया है.
यूएस जाते समय गुजरात के एक युवक-युवती को अज़रबैजान में किडनैप कर लिया गया. जिसके बाद किडनैपरों ने दोनों के परिजनों को फोन किया और उनसे फिरौती मांगी.
पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट्स की मुस्लिम देशों में तेजी से डिमांड बढ़ रही है. लीबिया के साथ 4 अरब डॉलर, सूडान के साथ 1.5 अरब डॉलर के सौदे हुए. सऊदी अरब से 4 अरब डॉलर की बातचीत चल रही है. बांग्लादेश, इंडोनेशिया, अजरबैजान भी रुचि दिखा रहे हैं. इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल सौदा फाइनल करने के साथ JF-17 पर विचार कर रहा है, जिससे भारत चिंतित है.
भारत के इस हथियार को 'ग्रिड इरेज़र' कहते हैं. भगवान शिव के धनुष पर इसका नाम है. सिर्फ 44 सेकंड में 12 रॉकेट दागकर 1 वर्ग किमी इलाका तबाह हो जाता है. नई गाइडेड वर्जन 120 किमी दूर सटीक मार करती है. शूट-एंड-स्कूट से दुश्मन कुछ समझे तब तक गायब. आर्मेनिया ने अपनाया. फ्रांस भी इसे देख रहा है.
अजरबैजान अकेला मुस्लिम देश है, जो इजरायल के साथ दोस्ताना संबंध रखता है. इतना कि तेल अवीव उसे मिडिल-ईस्ट में सबसे मजबूत मित्र की तरह देखता है. दुनिया भर में एंटी-सेमिटिज्म की लहर है, यहूदियों के खिलाफ हिंसा हो रही है, वहीं अजरबैजान अब भी फिलो-सेमिटिक बना हुआ है.
22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इस हमले के बाद चार दिनों तक दोनों देशों के बीच संघर्ष हुआ था. ये संघर्ष 10 मई को सीजफायर के साथ समाप्त हुआ. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का क्रेडिट लिया था, जिस पर काफी विवाद भी हुआ.
अल्बानियाई प्रधानमंत्री एडी रामा ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और अजरबैजान के राष्ट्रपति अलीयेव के साथ बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप के अल्बानिया-अजरबैजान युद्धविराम के गलत दावे पर चुटकी ली. इसका वीडियो वायरल है, जिसमें रामा की बातें सुनकर फ्रेंच राष्ट्रपति समेत दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्ष को ठहाके मारकर हंसते हुए नजर आ रहे हैं.
अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन पहुंचे हैं. सम्मेलन से इतर उन्होंने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने भारत को लेकर अहम दावा किया है.