इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होने वाली बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप के दौरान बंदरों को स्टेडियम से दूर रखने के लिए आयोजकों ने तीन प्रोफेशनल मिमिक को काम पर रखा है. ये लोग लंगूर की आवाज की हूबहू नकल करेंगे, ताकि इलाके में मौजूद रीसस मकाक बंदर डरकर वहां से दूर चले जाएं.
दिल्ली में रीसस मकाक बंदरों की अच्छी-खासी मौजूदगी है और इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के आसपास का इलाका भी इससे अछूता नहीं है.
इंडिया ओपन में हुई थी फजीहत
दरअसल, इस खास इंतजाम की वजह इस साल जनवरी में हुआ इंडिया ओपन है. उस दौरान बंदर दर्शकों के बीच पहुंच गए थे और कुछ समय के लिए मुकाबलों में भी व्यवधान पैदा हुआ था. बंदरों के स्टैंड में घूमने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और इंटरनेशनल लेवल पर भी इसकी चर्चा हुई.
अब आयोजक किसी भी तरह की ऐसी स्थिति दोबारा नहीं चाहते. खासकर तब, जब भारत करीब 17 साल बाद बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप की मेजबानी कर रहा है.
बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने मिलकर इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में व्यापक तैयारियां की हैं, ताकि इस बार आयोजन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था की गुंजाइश न रहे.
लंगूर की आवाज से क्यों डरते हैं बंदर?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आयोजकों ने तीन ऐसे लोगों को जिम्मेदारी सौंपी है, जिन्हें बंदरों को भगाने के लिए लंगूर की आवाज निकालने का अनुभव है. ये लोग लंगूर की गुर्राहट, घुरघुराहट और दूसरी आवाजों की नकल करेंगे.
इसके पीछे एक खास वजह है. माना जाता है कि रीसस मकाक बंदर लंगूर से दूरी बनाकर रखते हैं. लंगूर आकार में रीसस मकाक से काफी बड़े होते हैं, इसलिए उनकी आवाज सुनकर बंदरों को खतरा महसूस हो सकता है और वे वहां से भाग सकते हैं.
इसी व्यवहार को ध्यान में रखते हुए इस तरीके को अपनाया जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि इस काम के लिए अब असली लंगूरों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. भारत में बंदरों को भगाने के लिए असली लंगूरों के इस्तेमाल पर 2012 से रोक है. ऐसे में प्रोफेशनल मिमिक की मदद लेना आयोजकों के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बन गया है.
पीवी सिंधु का भी वीडियो पर आया रिएक्शन
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु ने भी इस अनोखे इंतजाम पर प्रतिक्रिया दी है.
सिंधु ने माना कि यह तरीका कई लोगों को मजेदार लग सकता है, लेकिन उन्होंने इस पहल की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि समाधान पर हंसी आ सकती है, लेकिन इसके पीछे की कोशिश की सराहना होनी चाहिए.
You can laugh at the solution, but you have to love the effort 😂❤️🇮🇳
— PV Sindhu (@Pvsindhu1) August 10, 2026
So many people are working behind the scenes to make sure India is ready to welcome the world. Our solutions may be uniquely Indian, but so are our warmth, our spirit and our hospitality.
Can’t wait for the… https://t.co/ORDFuAkITL
सिंधु के मुताबिक, भारत को दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार करने में पर्दे के पीछे बहुत से लोग मेहनत कर रहे हैं. उन्होंने इस समाधान को 'यूनिकली इंडियन' बताते हुए कहा कि भारत के समाधान भले ही अलग हों, लेकिन उसकी गर्मजोशी, जज्बा और मेहमाननवाजी भी उतनी ही खास है.
दिल्ली में पहले भी निकली थी मिमिक की भर्ती की जरूरत
बंदरों से निपटने के लिए मिमिक की मदद लेने का यह पहला मामला नहीं है. इसी साल दिल्ली विधानसभा ने भी बंदरों को इलाके में आने से रोकने के लिए मिमिक को काम पर रखने के लिए टेंडर जारी किया था.
यानी राजधानी में बंदरों की समस्या इतनी गंभीर है कि अब सरकारी और बड़े आयोजन भी इससे निपटने के लिए पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर ऐसे उपाय अपना रहे हैं.
पीढ़ियों से कर रहे हैं बंदरों को भगाने का काम
वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए नियुक्त किए गए मंकी व्हिस्परर्स में से एक जफर ने बताया कि लंगूर की आवाज निकालने से काफी बंदर वहां से भाग जाते हैं.
जफर के मुताबिक, इस आवाज के जरिए वे बंदरों को उस जगह से दूर भगाते हैं. उन्होंने बताया कि उनका यह काम पीढ़ियों से चला आ रहा है और वे पूरी जिंदगी इसी काम को करते आए हैं.
उन्होंने कहा कि ऐसा शायद ही कोई स्थान हो, जहां उन्होंने अपनी ड्यूटी न निभाई हो. उन्हें जहां भी काम मिलता है, वे वहां पहुंचते हैं. इसमें नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, राष्ट्रपति भवन से लेकर गुरुग्राम, चंडीगढ़ और मथुरा तक के इलाके शामिल हैं. अब यही अनुभव बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप के दौरान इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में काम आएगा.
17 साल बाद भारत में लौट रही वर्ल्ड चैम्पियनशिप
बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप 17 से 23 अगस्त तक नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी. करीब 17 साल बाद यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट भारत लौट रहा है.
आयोजकों की कोशिश है कि इस बार टूर्नामेंट से जुड़ी कोई भी ऐसी तस्वीर सामने न आए, जो इंटरनेशनल लेवल पर भारत की तैयारियों पर सवाल खड़े करे. इसी वजह से स्टेडियम के इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर सुरक्षा और अब बंदरों की रोकथाम तक, हर छोटी-बड़ी चीज पर ध्यान दिया जा रहा है.
और अगर इस दौरान कहीं से लंगूर की आवाज सुनाई दे, तो हैरान होने की जरूरत नहीं होगी. यह किसी असली लंगूर की आवाज नहीं, बल्कि भारत की अपनी 'देसी' रणनीति का हिस्सा होगी.