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'पाकिस्तान पीक' पर एवलांच, वर्ल्ड फेमस पर्वतारोही निर्मल पुर्जा समेत 10 लापता

पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन यानी एवलांच के बाद विश्वविख्यात पर्वतारोही निर्मल पुर्जा सहित 10 पर्वतारोही लापता हैं. खोज-बचाव अभियान जारी है. पुर्जा ने 2019 में 14 आठ-हजारी चोटियों को 6 माह में फतह किया था.

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बाएं से- ये है पाकिस्तान के काराकोरम रेंज में मौजूद ब्रॉड पीक और दाहिने हैं मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा. (Photo: Getty)
बाएं से- ये है पाकिस्तान के काराकोरम रेंज में मौजूद ब्रॉड पीक और दाहिने हैं मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा. (Photo: Getty)

पाकिस्तान के काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी ब्रॉड पीक (8,047 मीटर) पर गुरुवार दोपहर के आसपास हुई एक बड़े एवलांच ने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण जगत को झकझोर दिया है. इस घटना में विश्वविख्यात नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल पुर्जा समेत कुल 10 पर्वतारोही लापता बताए जा रहे हैं. पुर्जा को निम्स या निम्सदाई के नाम से जाना जाता है. 

अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (ACP) के अनुसार घटना के बाद से इन पर्वतारोहियों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है. खोज और बचाव के प्रयास शुरू हो चुके हैं, लेकिन मौसम की स्थिति और ऊंचाई की चुनौतियों के कारण यह अभियान बेहद जटिल साबित हो रहा है. यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ाई के खतरों, अंतरराष्ट्रीय टीमों की तैयारियों और पर्वतारोहण के बदलते स्वरूप को भी उजागर करती है.

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ACP के अनुसार गुरुवार दोपहर के आसपास ब्रॉड पीक पर एक अंतरराष्ट्रीय टीम हिमस्खलन की चपेट में आ गई. इस टीम में पांच नेपाली पर्वतारोही शामिल थे, जिनका नेतृत्व निर्मल पुर्जा कर रहे थे. इसके अलावा पाकिस्तानी पर्वतारोही सोहेल सखी (हुंजा से), ओमान की नाथिरा, अमेरिकी पर्वतारोही मॉलरी गेइस, चीनी पर्वतारोही मिस्टर वांग और एक अन्य विदेशी पर्वतारोही भी टीम में थे. 

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Nirmal Purja avalanche Pakistan
ये है ब्रॉड पीक जहां पर निर्मल पुर्जा समेत 10 पर्वतारोही गायब हुए हैं. (Photo: Getty)

कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया कि टीम कैंप 2 से कैंप 3 की ओर बढ़ रही थी जब हिमस्खलन हुआ. जीपीएस ट्रैकर्स से कुछ पर्वतारोहियों की अंतिम लोकेशन का पता चला है, जो मार्ग से काफी नीचे, लगभग एक किलोमीटर ऊंचाई के अंतर के साथ दिख रही है. इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वे हिमस्खलन के साथ बह गए होंगे.

घटना की खबर बेस कैंप तक देर से पहुंची. कुछ स्रोतों के अनुसार हिमस्खलन सुबह करीब 9 बजे के आसपास हुआ, लेकिन अलार्म रात तक नहीं बजा. पाकिस्तानी सेना के दो हेलिकॉप्टर खोज अभियान में लगाए गए हैं. मौसम अनुकूल होने पर हवाई सर्वेक्षण और बचाव प्रयास तेज किए जाएंगे. 

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कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में दो शवों की खोज का जिक्र भी आया था, लेकिन उनकी पहचान नहीं हुई है. अधिकांश आधिकारिक अपडेट्स में अब भी सभी को लापता ही बताया जा रहा है. यह स्थिति पर्वतारोहण में संचार की सीमाओं और ऊंचाई पर त्वरित प्रतिक्रिया की कठिनाइयों को साफ दर्शाती है.

निर्मल पुर्जा: एक असाधारण पर्वतारोही की कहानी

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नेपाल में जन्मे निर्मल पुर्जा ने ब्रिटिश सेना में 16 साल सर्विस की. वे गोरखा ब्रिगेड और बाद में रॉयल नेवी की स्पेशल बोट सर्विस (एसबीएस) में रहे. 2012 में एवरेस्ट बेस कैंप की ट्रैकिंग ने उनके अंदर पहाड़ों के प्रति जुनून जगाया. 2019 में उन्होंने दुनिया की सभी 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों को महज 189 दिनों में फतह कर इतिहास रच दिया. 

Nirmal Purja avalanche Pakistan

यह उपलब्धि नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री 14 पीक्स: नथिंग इज इंपॉसिबल में दर्ज है. बाद में 2023 में एक नॉर्वेजियन महिला और नेपाली शेरपा ने नया रिकॉर्ड बनाया, लेकिन पुर्जा की उपलब्धि आज भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.

पुर्जा ने 2024 में बिना सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन के सभी 14 चोटियों को सबसे तेजी से सर करने का भी रिकॉर्ड बनाया. वे अक्सर जोखिम भरे बचाव अभियानों में शामिल रहते थे. एवरेस्ट पर भीड़भाड़ की समस्या को उजागर करने वाले फोटो के लिए भी जाने जाते हैं. उनकी कंपनी एलीट एक्सपेड कमर्शियल अभियान चलाती है. निम्सदाई फाउंडेशन नेपाल के पहाड़ी समुदायों की मदद करती है. 

इस बार ब्रॉड पीक के बाद वे चो ओयू पर चढ़कर सभी 14 चोटियों को दो बार फतह करने वाले पहले व्यक्ति बनने की योजना बना रहे थे. सोमवार को अपने एक्स अकाउंट पर उन्होंने लिखा था कि ब्रॉड पीक से सुरक्षित वापसी की कामना करते हैं और कोई भी पहाड़ हल्के में नहीं लेते.

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ब्रॉड पीक और आठ-हजारी चोटियों का खतरा

ब्रॉड पीक को आसान आठ-हजारी माना जाता है. लेकिन डेथ जोन यानी 8,000 मीटर से ऊपर ऑक्सीजन की कमी, अचानक मौसम बदलाव, हिमस्खलन और बर्फ के पुल जैसी चुनौतियां हमेशा मौजूद रहती हैं. काराकोरम की चोटियां हिमालय से अलग किस्म की चुनौतियां पेश करती हैं. 

Nirmal Purja avalanche Pakistan

गर्मियों के सीजन में कई टीमें एक साथ सक्रिय रहती हैं. पुर्जा जैसी अनुभवी टीम के साथ भी ऐसा होना इस बात को बताता है कि पहाड़ कभी भी पूरी तरह नियंत्रित नहीं होते. आधुनिक पर्वतारोहण में जीपीएस, सैटेलाइट फोन और हेलिकॉप्टर बचाव की सुविधाएं बढ़ी हैं, फिर भी ऊंचाई, मौसम और हिमस्खलन की गति इन सबको चुनौती देती है. 

टीमों में स्थानीय गाइड, विदेशी क्लाइंट और नेपाली शेरपा का मिश्रण आम है. लेकिन कभी-कभी संचार और निर्णय लेने में जटिलता भी पैदा करता है. 

अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान सरकार और सेना से संपर्क में है. मौसम अनुकूल होते ही हेलिकॉप्टर और ग्राउंड टीमें सक्रिय होंगी. परिवारों, अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय और नेपाल-पाकिस्तान दोनों देशों में चिंता का माहौल है. पुर्जा जैसे व्यक्ति की लापता होने की खबर ने सोशल मीडिया और मीडिया में चर्चा छेड़ दी है. यह घटना हमें याद दिलाती है कि पर्वतारोहण सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ने या व्यक्तिगत उपलब्धि का खेल नहीं है.  खोज अभियान जारी है और पूरी दुनिया सुरक्षित वापसी की कामना कर रही है. 

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