Hariyali Amavasya 2026: सावन माह की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है. चारों ओर फैली हरियाली के कारण इसे यह नाम मिला है. धार्मिक दृष्टि से इस दिन स्नान, दान, ध्यान और पौधे लगाने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इस दिन पौधे लगाने से घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि आती है. ज्योतिषियों के मुताबिक, हरियाली अमावस्या पर कथा सुनना बहुत ही विशेष माना जाता है.
पौराणिक कथा
कथा के अनुसार, एक राज्य के राजा की बहू ने एक दिन छुपकर मिठाई खा ली और उसका इल्जाम घर के चूहे पर लगा दिया. गुस्साए चूहे ने बदला लेने के लिए मेहमानों के रुकने पर बहू की साड़ी उठाकर राजा के कमरे में रख दी. सुबह साड़ी देखकर राजा ने बहू को दोषी माना और महल से निकाल दिया. महल से बाहर आकर बहू पीपल के पेड़ के नीचे हर शाम दीपक जलाती, ज्वार उगाती और लोगों को गुड़धानी का प्रसाद बांटती. एक रात राजा के सैनिकों ने पीपल के पेड़ के नीचे जलते हुए दीपकों को आपस में बात करते सुना. सैनिकों के पूछने पर बहू के दीपक ने पूरी सच्चाई बताई कि मिठाई बहू ने खाई थी, लेकिन साड़ी चूहे ने रखी थी और बहू निर्दोष है. सैनिकों से यह बात सुनकर राजा को अपनी भूल का अहसास हुआ. उन्होंने बहू को आदरपूर्वक वापस महल बुला लिया और सब खुशी-खुशी रहने लगे.
हरियाली अमावस्या पूजन विधि
हरियाली अमावस्या के दिन सुबह पवित्र नदी में स्नान करें. इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और मंदिर में दीपक जलाएं. फिर, सुहागिन महिलाएं लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए हरी चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी बांटती हैं. उसके बाद पीपल और तुलसी के पौधे की पूजा करके परिक्रमा करें. इस दिन मालपुए का भोग लगाना शुभ माना जाता है. इस दिन पितरों की शांति के लिए दान-पुण्य और तर्पण करें. पर्यावरण सुरक्षा और जीवन में शांति-समृद्धि के लिए इस दिन नए पौधे जरूर लगाएं.