Holi 2026: जल्द ही होली का त्योहार आने वाला है. इस पर्व से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं जिसमें से एक कहानी पूतना राक्षसी से संबंधित है. तो आइए पढ़ते हैं होली से जुड़ी ये खास कथा.
Hindu Dharam: हिंदू पुराणों के अनुसार, ब्रह्मांड की संरचना 14 लोकों में विभाजित है और इसका संतुलन अनंत शेषनाग संभालते हैं. जानिए विष्णु पुराण और भागवत पुराण में वर्णित इस अद्भुत रहस्य की पूरी कहानी.
Holi 2026: रंगों और खुशियों का त्योहार होली जल्द ही आने वाला है, जो चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. यह पर्व प्रेम, उल्लास और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. हिंदू धर्म में होली के इस पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. आइए आज हम आपको भगवान शिव-कामदेव और राधा-कृष्ण से जुड़ी खास कथाएं से परिचित कराएंगे, जिसके बाद होली का पर्व मनाया जाने लगा.
शिवरात्रि के बाद अमावस्या की तिथि पर सूर्यग्रहण लगा और 15 दिन बाद होलिका दहन के दिन चंद्रग्रहण होगा. फरवरी से शुरू हुए अग्नि पंचक के दौरान ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दुर्घटना, आग, और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
झारखंड के देवघर को शास्त्रों और परंपराओं के आधार पर असली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग माना जाता है। हिमाचल और महाराष्ट्र के मंदिर भी प्रसिद्ध हैं, लेकिन उन्हें चिताभूमि नहीं माना जाता. आदि शंकराचार्य के स्तोत्र और शिव पुराण में देवघर की चिताभूमि के रूप में पहचान मिलती है.
महादेव का नृत्य भरत मुनि को नाटक में नृत्य का महत्व समझाने, अपस्मार राक्षस पर नियंत्रण करने और आचार्य पाणिनी को संस्कृत व्याकरण की रचना के लिए प्रेरित करने वाला था। नटराज रूप में शिवजी ने अहंकार और अभिमान को नियंत्रित करने की शिक्षा दी. जानिए कैसे?
कृष्ण पक्ष में चंद्रमा क्षीण होता जाता है, जो ‘मन’ के क्षय का प्रतीक है. चतुर्दशी तक आते-आते मन लगभग शांत हो जाता है. यह स्थिति अहंकार के लय और आत्मचिंतन के लिए अनुकूल मानी गई है. भगवान शिव को ‘अहंकार विनाशक’ और ‘संहार के देवता’ कहा जाता है.
महादेव और श्रीकृष्ण दोनों ही योग के महान गुरु हैं, लेकिन उनके योग के मार्ग अलग हैं. गीता में श्रीकृष्ण को योगेश्वर कहा गया है और वे स्वयं कहते हैं कि रुद्रों में शंकर हैं, जो महादेव का प्रतीक हैं.
हर व्यक्ति के मन में यह सवाल आता है कि क्या हर शिवरात्रि एक जैसी होती है? तो आइए महाशिवरात्रि के मौके पर जानते हैं मासिक शिवरात्रि, सावन शिवरात्रि और फाल्गुन की महाशिवरात्रि में छिपा आध्यात्मिक और धार्मिक अंतर.
देश भर में आज महाशिवरात्रि का त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. यह पर्व भगवान शिव की आराधना और उनकी महिमा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है. भारत के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं, जिसमें श्रद्धालु उपवास रखते हुए भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर रहे हैं. मंदिरों में रात्रि जागरण का आयोजन हुआ है.
महाशिवरात्रि केवल शिव-पार्वती के विवाह का दिन नहीं है, बल्कि यह शिव के अनंत ज्योतिर्लिंग स्वरूप के प्राकट्य और आध्यात्मिक जागरण की रात है. यह पर्व शिव-शक्ति के मिलन, तांडव नृत्य, योग साधना और त्याग की महत्ता को दर्शाता है.
Gen-Z के लिए शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि मानसिक सहारा और जीवन का प्रतीक हैं, जो असलियत, संतुलन और संघर्ष की मिसाल हैं. यह पीढ़ी शिव को “Real OG” मानती है, जो पारंपरिक और आधुनिक दोनों हैं.
Maha Shivratri 2026: 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी. इस विशेष अवसर पर जानिए भगवान शिव की तीसरी आंख से जुड़ी पौराणिक कथाएं, कामदेव के भस्म होने की कहानी और पार्वती द्वारा आंखें ढकने से जुड़े रहस्य का आध्यात्मिक महत्व.
महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शिव के अनंत प्रकाश स्वरूप ज्योतिर्लिंग का अनुभव है. ब्रह्मा और विष्णु के विवाद से उत्पन्न विराट प्रकाश स्तंभ की कथा हमें शिव के दिव्य स्वरूप से परिचित कराती है.
भगवान शिव की पूजा में शिवलिंग का विशेष स्थान है, लेकिन इसकी स्थापना और दैनिक पूजा में कठिनाई होती है. नर्मदेश्वर शिवलिंग इस समस्या का समाधान है, जो नर्मदा नदी के प्राकृतिक पत्थरों से बनता है और इसकी पूजा सरल है.
Maha Shivratri 2026: भगवान शिव के दो पहलू हैं, एक आदर्श गृहस्थ का और दूसरा श्मशान में रहने वाला देवता. श्मशान में भगवान शिव का निवास जीवन-मृत्यु के चक्र और वैराग्य का प्रतीक है, जो मोह-माया से ऊपर उठने की सीख देता है.
महाशिवरात्रि का त्योहार शिवजी के विषपान की कथा और प्रकृति पूजा के महत्व को दर्शाता है। शिवजी ने समुद्र मंथन के दौरान निकले जहरीले विष को पीकर सृष्टि के संरक्षण का कार्य किया। इस दिन दूध, बेलपत्र, धतूरा, मदार और भांग जैसी वस्तुएं शिवजी को चढ़ाई जाती हैं, मगर क्यों?
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवजी की पूजा के पांच महत्वपूर्ण तत्वों और उनके पंचमुखी सदाशिव स्वरूप की गूढ़ता को समझना जरूरी है. शिवजी केवल विनाश के देवता नहीं हैं, बल्कि वे सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोधान और अनुग्रह की पांच शक्तियों के स्वामी हैं.
प्रेमानंद महाराज से एक महिला ने पूछा कि क्या बिस्तर पर बैठकर नाम जप करना उचित होता है या नहीं. इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि हां ऐसा किया जा सकता है.
Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा 2026 का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इस दिन स्नान, दान और कथा पाठ से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है. शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा सबसे फलदायी पूर्णिमा मानी जाती है. यहां पढ़ें माघ पूर्णिमा की पौराणिक कथा और इसका धार्मिक महत्व.
प्रेमानंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि जिनके आचरण और विचार गलत होते हैं वो कितनी भी पूजा करें या कितने ही मंदिरों के दर्शन कर लें उन्हें उसका पुण्य नहीं मिलता.