पत्नी को अर्धांगिनी कहा गया है, जिसका अर्थ है पति का आधा अंग. यहां वामांगिनी शब्द का भी प्रयोग किया जाता है, जो इस बात को दर्शाता है कि पत्नी-पति के हृदय के निकट रहती है. चूंकि मानव शरीर में हृदय बाईं ओर स्थित होता है, इसलिए इसे प्रेम, भावना और आत्मीयता का प्रतीक माना गया है.
टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर कुछ दिन पहले ही मध्य प्रदेश के दतिया स्थित मां बगलामुखी के दर्शन किए. उन्होंने वनखंडेश्वर महादेव की पूजा भी की. गौतम गंभीर की पीतांबरा पीठ में गहरी आस्था है और वह अक्सर यहां आते रहते है.
Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर जानें गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा की अनसुनी कहानी. जब सिद्धार्थ ने संन्यास लिया, तब पत्नी यशोधरा ने कैसे धैर्य, त्याग और सादगी के साथ जीवन बिताया. पढ़ें पूरी कथा.
Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर पढ़ें गौतम बुद्ध की एक प्रेरणादायक कहानी, जो आपको सिखाती है कि असली कीमत दूसरों से नहीं, खुद की पहचान और आत्मविश्वास से तय होती है.
Kamakhya Temple: गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर में हर साल अंबुबाची मेले के दौरान एक अनोखी घटना होती है, जब ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल दिखाई देता है. इसे देवी के मासिक धर्म से जोड़ा जाता है. इस रहस्य के पीछे आस्था, परंपरा और विज्ञान, तीनों की अलग-अलग मान्यताएं हैं.
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, मृत्यु कोई वास्तविक अंत नहीं है, बल्कि यह एक तरह का भ्रम है. हमारा शरीर पंच तत्वों अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश से बना है,मृत्यु के बाद ये तत्व फिर से प्रकृति में मिल जाते हैं. उनका कहना है कि आत्मा कभी खत्म नहीं होती, वह अविनाशी है.
Mohini Ekadashi 2026: मोहिनी एकादशी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र व्रत होता है. इसे भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार की पूजा और भक्ति के लिए मनाया जाता है. यह दिन न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि जीवन में समृद्धि, सुख और मानसिक शांति भी लाता है. इस दिन व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में बुराई और पापों का नाश होता है.
Badrinath Temple: चार धाम यात्रा का बद्रीनाथ धाम सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि रहस्यों और परंपराओं का संगम भी है. यहां की हर मान्यता किसी न किसी गहरी सोच और अनुभव से जुड़ी है, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग पहचान देती है. तो आइए जानते हैं यहां कि शंख न बजाने की खास परंपरा के बारे में.
Kedarnath Dham: केदारनाथ मंदिर के कपाट आज पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. इस ज्योतिर्लिंग की पवित्रता और आस्था के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के मन में अक्सर एक सवाल उठता है कि केदारनाथ में स्थापित शिवलिंग का आकार सामान्य से अलग, यानी बैल की पीठ जैसा त्रिकोणीय क्यों है. आइए जानते हैं इसके पीछे की विशेष कथा.
उत्तराखंड के चार धाम के कपाट अक्षय तृतीया से खुलने लगे हैं, जिससे श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा शुरू हो गई है. गंगोत्री-यमुनोत्री के बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे. केदारनाथ मंदिर महादेव शिव को समर्पित है और इसका इतिहास महाभारत कालीन पौराणिक कथाओं के साथ स्कंदपुराण में वर्णित है.
Parshuram Jayanti 2026: टांगीनाथ धाम सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और रहस्य का अनोखा संगम है. परशुराम जयंती के मौके पर यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है. यहां से जुड़ी मान्यताएं और कथाएं इसे भारत के रहस्यमयी तीर्थ स्थलों में शामिल करती हैं.
Garud Puran: बच्चों के अंतिम संस्कार की अलग परंपरा सिर्फ धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि भावनात्मक और वैज्ञानिक पहलुओं से भी जुड़ी है. यह हमें यह समझाती है कि जीवन और मृत्यु के पीछे कई गहरे अर्थ छिपे हैं, जिन्हें जानना और समझना जरूरी है.
Mahabharat Facts: जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर, जिन्हें एटम बम का जनक कहा जाता है, ने महाभारत के अर्जुन से प्रेरणा ली थी. जैसे अर्जुन कुरुक्षेत्र के युद्ध में अपने कर्तव्य और भावनाओं के बीच संघर्ष फंसे थे, वैसे ही ओपेनहाइमर भी अपने वैज्ञानिक कार्यों में फंसे हुए थे. ओपेनहाइमर ने भगवद्गीता के संदेश को समझा था और अपने कर्तव्य को निभाने के दौरान आंतरिक युद्ध का सामना भी किया था.