राजस्थान के अलवर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद बुधवार को उस वक्त बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया, जब वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा अपनी ही सरकार के खिलाफ कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए. सफाई कर्मचारी लंबे समय से नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार कर रहे थे.
जानकारी के मुताबिक, करीब सात साल से नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कई सफाई कर्मचारी पत्र के लिए नगर निगम के चक्कर लगा रहे थे. निगम चुनाव नजदीक होने के बीच कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया और नगर निगम परिसर में धरना शुरू कर दिया. इसी दौरान मंत्री संजय शर्मा वहां पहुंचे और उन्होंने कर्मचारियों के साथ बैठकर उनकी मांग का समर्थन किया.
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मंत्री ने जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला और नगर निगम आयुक्त पर लापरवाही का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अधिकारियों की वजह से पात्र सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिल पा रहे हैं. कलेक्टर पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मनमानी के कारण सरकार की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं.
धरने के बाद सरकार में मची हलचल
संजय शर्मा के अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने की खबर तेजी से फैली और मामला जयपुर तक पहुंच गया. इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ी. करीब चार घंटे तक चले धरने के बाद पांच सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंप दिए गए.
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद वन मंत्री ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और अलवर सांसद एवं केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का आभार जताया. नियुक्ति पत्र मिलने से कर्मचारियों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले पर खुशी जाहिर की.
मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल पांच कर्मचारियों तक मामला सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि जो अभ्यर्थी पात्र हैं, उन्हें नियुक्ति से वंचित नहीं किया जाएगा. बाकी योग्य सफाई कर्मचारियों को भी नियुक्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
16 अगस्त को भी मिलेंगे नियुक्ति पत्र
संजय शर्मा ने बताया कि 16 अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यक्रम के दौरान पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे. उन्होंने कहा कि सभी एलिजिबल उम्मीदवारों को उनका हक दिलाया जाएगा और किसी पात्र व्यक्ति को नियुक्ति से बाहर नहीं रखा जाएगा.
मंत्री के इस कदम के बाद सफाई कर्मचारियों की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया. अपनी ही सरकार में मंत्री का कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठना बड़ा संदेश माना गया. मामले की जानकारी जयपुर तक पहुंचने के बाद कुछ ही घंटों में पांच नियुक्ति पत्र जारी होने से विवाद ने और तूल पकड़ लिया.
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति पत्र के इंतजार में थे. अब पांच लोगों को पत्र मिलने के बाद बाकी पात्र अभ्यर्थियों को भी जल्द राहत मिलने की उम्मीद है. मंत्री ने भी भरोसा दिया है कि पात्रता पूरी करने वाले कर्मचारियों को नियुक्ति जरूर दी जाएगी.
कोर्ट की जमीन के मामले में भी समाधान का भरोसा
धरना समाप्त करने के बाद संजय शर्मा ने कोर्ट की जमीन से जुड़े एक अन्य मामले पर भी बात की. उन्होंने कहा कि वकीलों को बैठने के लिए स्थान उपलब्ध कराने के मुद्दे का भी जल्द समाधान निकाला जाएगा. मंत्री ने इस मामले में सुखद परिणाम आने की उम्मीद जताई.
इस पूरे घटनाक्रम में नगर निगम से शुरू हुआ सफाई कर्मचारियों का विवाद प्रदेश की राजनीति तक पहुंच गया. सात साल से लंबित नियुक्ति का मुद्दा मंत्री के धरने के बाद अचानक चर्चा में आया और करीब चार घंटे में पांच कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र मिल गए.
मंत्री के धरने और उसके बाद हुए फैसले को लेकर अब बाकी पात्र सफाई कर्मचारियों की नजर 16 अगस्त के कार्यक्रम पर है. सरकार की ओर से उन्हें नियुक्ति देने का भरोसा दिया गया है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बाकी अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है.