जब भी हम पुराने सोने के गहने बेचने या उन्हें बदलकर नए गहने खरीदने ज्वेलर्स के पास जाते हैं, तो मन में एक सवाल जरूर आता है. आखिर दुकानदार सोने की शुद्धता कैसे जांचता है? क्या गहनों को गलाने या उनकी जांच करने के दौरान उनमें से सोना कम हो सकता है? और क्या किसी ग्राहक की आंखों के सामने ही उसके गहने से सोना निकाल लिया जाता है?
दरअसल, सोने के गहनों की जांच और उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में कई ऐसे स्टेप्स होते हैं, जिनकी जानकारी आम ग्राहकों को नहीं होती. सोने का वजन करना, उसकी शुद्धता जांचना, उसमें मिली दूसरे मेटल को अलग करना और उसे दोबारा गहने बनाने लायक तैयार करना, ये सभी अलग-अलग काम हैं. इन प्रक्रियाओं में सोने की मात्रा का सही हिसाब रखना जरूरी होता है. हालांकि, हर ज्वेलर ऐसा नहीं करता है.
सबसे पहले गहने का वजन किया जाता है
जब आप सोने की चेन, अंगूठी, कंगन या कोई दूसरा गहना बेचने जाते हैं, तो ज्वेलर सबसे पहले उसका वजन करता है. इसके लिए आमतौर पर इलेक्ट्रॉनिक तराजू का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि गहने का कुल वजन और उसमें मौजूद शुद्ध सोने का वजन एक जैसा नहीं होता. उदाहरण के लिए, अगर आपके पास 10 ग्राम का 22 कैरेट सोने का गहना है, तो उसमें पूरा 10 ग्राम शुद्ध सोना नहीं होगा. 22 कैरेट सोने में सैद्धांतिक रूप से करीब 91.6 प्रतिशत सोना होता है. बाकी हिस्से में तांबा, चांदी या दूसरी धातुएं हो सकती हैं.
इसके अलावा, गहने में लगे पत्थर, मोती, लाख या दूसरे गैर-सोने वाले हिस्सों का वजन भी अलग करना पड़ सकता है. इसलिए केवल तराजू पर दिखने वाले वजन के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि आपको कितने शुद्ध सोने के पैसे मिलने चाहिए.
शुद्धता जांचने के नाम पर क्या होता है?
सोने की शुद्धता जांचने के लिए ज्वेलर्स अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. इनमें एक्स-रे फ्लोरेसेंस ( XRF) मशीन और एसिड टेस्ट जैसे तरीके शामिल हैं. XRF मशीन से गहने की सतह पर मौजूद धातुओं की जानकारी मिल सकती है. यह जांच आमतौर पर बिना गहने को नुकसान पहुंचाए की जाती है. दूसरी ओर, एसिड टेस्ट में गहने के एक छोटे हिस्से को जांचने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. कुछ मामलों में गहने को हल्का घिसकर उसके मेटल की जांच की जाती है. इससे बहुत थोड़ी मात्रा में मेटल निकल सकती है, लेकिन केवल इस वजह से यह नहीं कहा जा सकता कि ज्वेलर सोना चुरा रहा है. अगर दुकानदार गहने को घिसने या उसकी जांच करने की बात कहता है, तो आप उससे पूछ सकते हैं कि किस तरीके से जांच होगी और क्या इससे गहने को कोई नुकसान पहुंचेगा.
गहने को गलाने पर सोना कैसे अलग होता है?
पुराने गहनों को नए गहने बनाने के लिए कई बार पिघलाया जाता है. सोने को गर्म करने पर वह पिघल जाता है, लेकिन इससे उसमें मिली दूसरी मेटल अपने आप पूरी तरह अलग नहीं हो जातीं. सोने को शुद्ध करने के लिए जरूरत के हिसाब से रिफाइनिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है. इसमें अलग-अलग केमिकल प्रोसेस की मदद से सोने को दूसरे मेटल से अलग किया जाता है. इसके बाद सोने की शुद्धता और वजन दोबारा जांचे जा सकते हैं.
इस पूरी प्रक्रिया में सोने की मात्रा का हिसाब रखना जरूरी है. अगर गहने में 10 ग्राम सोना मौजूद था, तो उसे पिघलाने के बाद मिलने वाले पदार्थ का वजन और उसमें मौजूद सोने का वजन अलग-अलग हो सकता है. वजह यह है कि गहने में दूसरी मेटल भी थीं और प्रक्रिया के दौरान कुछ मेटल अलग हो सकते हैं. इसलिए पिघलने के बाद कुल वजन कम होना अपने आप में चोरी का सबूत नहीं है. असली सवाल यह है कि शुरुआत में कितना सोना था और प्रक्रिया के बाद कितनी मात्रा में सोना वापस मिला.
फिर आंखों के सामने सोना निकालने की बात कहां से आती है?
ग्राहकों को सबसे ज्यादा शक तब होता है, जब ज्वेलर गहने को जांचने के लिए अपने पास ले जाता है या उसे किसी दूसरी जगह ले जाकर प्रक्रिया करने की बात कहता है. ग्राहक को यह नहीं पता होता कि वहां वास्तव में क्या किया जा रहा है. गड़बड़ी की आशंका कई स्थितियों में हो सकती है. जैसे, गहने का वजन सही तरीके से न बताना, पत्थरों या दूसरे हिस्सों का वजन अलग न करना, शुद्धता कम बताना या सोने की कीमत निकालते समय जरूरी जानकारी स्पष्ट न करना.
क्या सोने को गलाते समय उसका वजन कम हो सकता है?
कुछ परिस्थितियों में सोने के गहने को पिघलाने या साफ करने के दौरान वजन में अंतर आ सकता है. इसकी वजह गहने में मौजूद दूसरे मेटल, गंदगी, सोल्डरिंग के हिस्से या गैर-सोने वाली सामग्री हो सकती है. लेकिन सोना खुद सामान्य गलाने की प्रक्रिया में दूसरी धातुओं की तरह आसानी से जलकर गायब नहीं हो जाता. सोना काफी स्थिर धातु है. इसलिए अगर कोई दुकानदार बिना कोई हिसाब बताए वजन में बड़ी कमी होने की बात कहता है, तो ग्राहक को सवाल जरूर पूछना चाहिए.
गहने को पिघलाने से पहले उसका वजन, शुद्धता और उसकी स्थिति दर्ज कर लेना बेहतर है. अगर बड़ी मात्रा में सोना रिफाइन कराया जा रहा है, तो शुरुआती वजन और अंतिम सोने की मात्रा का लिखित हिसाब मांगना समझदारी है.
ज्वैलर के पास जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पुराने सोने के गहने बेचते समय या उन्हें बदलकर नए गहने खरीदते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले, गहने का वजन अपनी आंखों के सामने कराएं और देखें कि तराजू पर वजन साफ दिखाई दे रहा है या नहीं. अगर गहने में पत्थर, मोती या दूसरी चीजें लगी हैं, तो ज्वेलर से पूछें कि उनका वजन कितना है और सोने का वास्तविक वजन कैसे निकाला जाएगा. इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके गहने में असल में कितना सोना है. गहने की शुद्धता की जांच कराते समय भी पूरी जानकारी लें.