चंडीगढ़ में शुक्रवार को पंजाब सरकार के हजारों कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. सेक्टर-39 स्थित दाना मंडी ग्राउंड में विभिन्न विभागों के कर्मचारी संझा मुलाजम मंच (जॉइंट एम्प्लॉइज फ्रंट पंजाब) के बैनर तले एकत्र हुए. प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने AAP सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की. इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. अमृतसर से आई कई नर्सें वॉटर कैनन चलने के बाद भी प्रदर्शन स्थल पर डटी रहीं.
कर्मचारियों और पेंशनर्स की मुख्य मांगों में लंबित 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) जारी करना, पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना, एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) योजना (4-9-14) लागू करना, संविदा, आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है. इसके अलावा वे वेतन विसंगतियों को दूर करने, कुछ भत्तों को बहाल करने और सेवा से जुड़े अन्य लंबित मामलों का समाधान भी चाहते हैं.
संझा मुलाजम मंच के संयोजक सुखचैन सिंह खैरा ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने साढ़े चार साल तक इंतजार किया, लेकिन सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए. उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन और तेज किया जाएगा और इसका असर चुनावों में भी दिखाई देगा.
सरकार के खिलाफ नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई. यूनाइटेड नर्सिंग एसोसिएशन की ज्योति शर्मा ने कहा कि सरकार ने वेतनमान नहीं बढ़ाकर कर्मचारियों के साथ अन्याय किया है. स्टाफ नर्स विजय ने कहा कि मंत्रियों और उनके सहयोगियों का वेतन बढ़ाया गया, लेकिन कई कर्मचारी वर्गों का वेतनमान कम स्तर पर तय कर दिया गया.
हर महीने हो रहा है नुकसान
पंजाब मंडी बोर्ड के कर्मचारी राजीव राम ने कहा कि कर्मचारियों को हर महीने 5,000 से 8,000 रुपये तक का नुकसान हो रहा है. बढ़ती महंगाई और परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा. वहीं, बठिंडा से आए बिजली विभाग के कर्मचारी कुलदीप सिंह ने आरोप लगाया कि जिन कर्मचारियों से सरकार ने वादे किए थे, अब उन्हीं की अनदेखी की जा रही है.
फतेहगढ़ साहिब से आए पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रमुख सरदार हरजीत सिंह ने कहा कि सरकार को आने वाले चुनावों में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. अमृतसर से आई नर्स अमनदीप कौर ने कहा कि उनका भविष्य दांव पर लगा है. उनकी साथी ने कहा कि सरकार दूसरी योजनाओं पर पैसा खर्च करने को तैयार है, लेकिन कर्मचारियों का DA जारी करने और पुरानी पेंशन बहाल करने को तैयार नहीं है.
इन मांगों पर बनी सहमति
कई घंटे तक चले प्रदर्शन और टकराव के बाद पंजाब सरकार ने कर्मचारियों की मांगों, खासकर 18 प्रतिशत DA के मुद्दे पर 27 अगस्त को बातचीत करने पर सहमति जताई. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया. साढ़े चार साल से अपनी मांगों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों की नजर अब 27 अगस्त को होने वाली वार्ता पर टिकी है.