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दर्द, डेटा और दौलत... Gen-Z से राहुल गांधी की बात, BJP का वार- प्रयागराज नहीं, रांची जाइए

राहुल गांधी ने प्रयागराज में छात्रों के बीच बेरोजगारी, पेपर लीक और महंगी शिक्षा को लेकर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने 40 करोड़ युवाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि युवा, डेटा और AI मिलकर देश की अर्थव्यवस्था बदल सकते हैं. वहीं बीजेपी ने झारखंड के आंदोलन कर रहे छात्रों से न मिलने पर राहुल गांधी पर सवाल उठाए.

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राहुल गांधी KP ग्राउंड में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल हुए (फोटो- PTI)
राहुल गांधी KP ग्राउंड में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल हुए (फोटो- PTI)

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को भारत के 40 करोड़ युवाओं को देश की 'सबसे बड़ी ताकत' बताया. साथ ही कहा कि लेकिन वे महंगी शिक्षा, घटते नौकरी के मौकों और पेपर लीक के 'चक्रव्यूह' में फंस गए हैं.

बीजेपी ने तुरंत पलटवार करते हुए पूछा कि गांधी कांग्रेस-शासित झारखंड में विरोध कर रहे उम्मीदवारों से मिलने के बजाय प्रयागराज में छात्रों को संबोधित क्यों कर रहे हैं.

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा, 'राहुल गांधी को प्रयागराज के बजाय रांची जाना चाहिए था.' यह बात उन्होंने तब कही जब कांग्रेस नेता KP ग्राउंड में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों को संबोधित कर रहे थे.

विपक्ष के नेता ने अपने भाषण में तीन बातों पर फोकस किया... दर्द, डेटा और दौलत.

उन्होंने तर्क दिया कि भारत के पास अपनी युवा आबादी के रूप में एक बेजोड़ तोहफा है, लेकिन वह इस क्षमता को नौकरियों और आर्थिक अवसरों में बदलने में विफल रहा है.

उन्होंने कहा, 'अगर यह देश आगे बढ़ता है, तो यह आपकी ताकत की वजह से होगा. भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है – 40 करोड़ ऊर्जावान युवा. यही देश की ताकत है.'

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यह कार्यक्रम कांग्रेस के 40-दिवसीय राष्ट्रव्यापी 'छात्रों की गूंज' अभियान का हिस्सा था. इस अभियान को जून में पेपर लीक, भर्ती में अनियमितताओं और बेरोजगारी को उजागर करने और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग करने के लिए शुरू किया गया था.

‘अगर डिग्री से नौकरी न मिले तो उसका कोई मतलब नहीं’

राहुल गांधी ने तर्क दिया कि परिवार हायर एजुकेशन पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन बाद में युवाओं को पता चलता है कि उनकी डिग्री नौकरी की गारंटी नहीं देती.

राहुल ने कहा, 'आप इंजीनियरिंग, मेडिकल, पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स या जो भी चाहें, उसकी पढ़ाई करते हैं. आपके परिवारों से लाखों रुपये लिए जाते हैं और फिर आपको एक सर्टिफिकेट दिया जाता है. लेकिन आज भारत में उस सर्टिफिकेट का कोई मतलब नहीं है क्योंकि यह आपको नौकरी नहीं दिला सकता.'

उन्होंने दावा किया कि हर 1,000 युवा भारतीयों में से केवल 12 को ही पक्की नौकरी मिलती है.

कांग्रेस सांसद ने एक प्रतियोगी परीक्षा उम्मीदवार का भी जिक्र किया, जिसने बताया कि सरकारी परीक्षाओं की तैयारी करने से पहले वह ब्लिंकइट (Blinkit) के लिए दिन में लगभग 10 घंटे काम करता था और भारतीय सेना की परीक्षा पास करने से एक नंबर से चूक गया था.

राहुल ने कहा कि अगर कोई पैसे वाला व्यक्ति लीक हुए परीक्षा पेपर तक पहुंच खरीद ले, तो सालों की मेहनत बेकार हो सकती है.

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‘युवा+डेटा = 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था’

इसके बाद गांधी ने उस चीज पर बात की जिसे उन्होंने युवा आबादी के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा फायदा बताया... डेटा. उन्होंने कहा, 'युवा और डेटा मिलकर 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था बनाते हैं.'

पिछली सदी में पेट्रोलियम से तुलना करते हुए, रायबरेली के सांसद ने तर्क दिया कि डेटा ही वह कच्चा माल है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को चलाता है.

उन्होंने कहा, 'अगर मैं आपको 20वीं सदी में पेट्रोल इंजन देता लेकिन पेट्रोल देने से मना कर देता, तो आप कहते कि इंजन बेकार है. उसी तरह, आपके डेटा के बिना AI का कोई मतलब नहीं है.'

राहुल ने कहा कि भारतीयों द्वारा बनाया गया भारी मात्रा में डेटा एक राष्ट्रीय संपत्ति है.

उन्होंने आरोप लगाया कि इस डेटा से बड़ी कंपनियों - जैसे जियो, अडानी, फेसबुक और गूगल - को फायदा हो रहा है.

‘रील्स 21वीं सदी की लत हैं’

राहुल ने सोशल मीडिया अर्थव्यवस्था पर भी निशाना साधा और रील्स को लगातार देखने को 21वीं सदी की लत कहा.

उन्होंने कहा कि युवा भारतीयों को इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर कंटेंट देखने और बनाने में घंटों बिताने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि सुरक्षित रोजगार उनकी पहुंच से दूर रहता है.

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गांधी ने कहा, 'आपसे कहा जाता है कि आप जितनी चाहें उतनी रील्स देखें, जितने चाहें उतने व्हाट्सएप मैसेज भेजें और जितनी चाहें उतनी इंस्टाग्राम रील्स बनाएं. यह 21वीं सदी की लत है. लेकिन फिर आपसे कहा जाता है कि आपको इस देश में नौकरी या रोजगार नहीं मिल सकता.'

झारखंड में विरोध प्रदर्शनों को लेकर बीजेपी ने राहुल से सवाल पूछे

बीजेपी ने गांधी के छात्रों तक पहुंचने के अभियान को कांग्रेस के खिलाफ ही इस्तेमाल करने की कोशिश की. उन्होंने झारखंड में JPSC और JSSC उम्मीदवारों के चल रहे विरोध प्रदर्शनों की ओर इशारा किया, जहां कांग्रेस JMM के नेतृत्व वाली सरकार में सहयोगी है.

बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने लोकसभा सांसद पर दोहरे राजनीतिक पाखंड का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनके पास प्रयागराज कार्यक्रम में शामिल होने का समय तो था, लेकिन रांची में विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मिलने का समय नहीं था.

'उनमें कोई सहानुभूति नहीं है, और न ही उनके पास झारखंड में भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मिलने का समय है, जिनमें से कुछ तो बेहोश भी हो गए हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'फिर भी आज राहुल गांधी प्रयागराज में अपने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं.'

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जेन Z बना नया राजनीतिक अखाड़ा

कांग्रेस नेता का यह कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब राजनीतिक पार्टियां युवा वोटरों तक अपनी पहुंच बढ़ा रही हैं. पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के हालिया विरोध-प्रदर्शनों ने 'जेन Z' (Gen Z) को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

प्रयागराज कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में युवाओं को संबोधित भी किया.

मोदी ने ग्रेजुएट हो रहे छात्रों से कहा कि वे स्थापित विचारों पर सवाल उठाएं और बड़ी चुनौतियों से घबराने के बजाय उन्हें छोटे और आसानी से हल किए जा सकने वाले हिस्सों में बांटें.

कार्यक्रम में मौजूद 3,000 से ज़्यादा छात्रों और 587 PhD स्कॉलर्स से मोदी ने कहा, 'जीवन में जिज्ञासा बनाए रखें. सीखने की अपनी इच्छा को हमेशा जीवित रखें.'

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