सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ द्वारा सबरीमला मंदिर और महिलाओं के धार्मिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर फैसला सितंबर के आखिरी हफ्ते या अक्टूबर के पहले हफ्ते में आने की संभावना है. कोर्ट ने बोधगया मंदिर प्रबंधन मामले की सुनवाई के दौरान इसके संकेत दिए.
बोधगया मंदिर मामले में वकील ने कहा कि कुछ कानूनी सवालों पर सबरीमला मामले के फैसले के बाद सुनवाई की जा सकती है. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि फैसला अक्टूबर तक आ जाएगा. इसके बाद बोधगया मंदिर प्रबंधन और तीन तलाक से जुड़े मामलों की सुनवाई 6 अक्टूबर तक टाल दी गई.
सबरीमाला मंदिर और अन्य धर्मों में महिलाओं से जुड़े धार्मिक भेदभाव के मामलों पर लंबे समय से सुनवाई चल रही थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ ने 14 मई 2026 को लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब इस मामले में सितंबर के आखिरी हफ्ते में या अक्टूबर के पहले हफ्ते में फैसला आ सकता है.
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यह मामला सिर्फ सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश तक सीमित नहीं है. इसमें महिलाओं के धार्मिक अधिकार और धार्मिक प्रथाओं में भेदभाव से जुड़े कई अहम सवाल शामिल हैं. इनमें मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं का प्रवेश, पारसी महिलाओं के अधिकार और दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला जननांग विकृति (FGM) जैसी प्रथाएं भी शामिल हैं.
9 जजों की संवैधानिक पीठ ने 7 अप्रैल 2026 से सुनवाई शुरू की थी, जो 14 मई को पूरी हुई. करीब 16 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
इस पीठ में चीफ जस्टिस सूर्यकांत के साथ जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्न बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्य बागची शामिल हैं.
सुनवाई के दौरान कोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, पीठ के सभी नौ जजों में से न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना सबसे सक्रिय सदस्य रहीं, जिन्होंने पीठ की तरफ से किए गए कुल संवाद में सबसे ज्यादा बार हस्तक्षेप किए हैं और सवाल पूछे.