सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) भारत के केरल (Kerala) राज्य के पतनमतिट्टा जिले (Pathanamthitta District) के पेरियार टाइगर रिजर्व (Periyar Tiger Reserve) के अंदर सबरीमाला पहाड़ी पर स्थित एक मंदिर परिसर है. यह दुनिया के सबसे बड़े वार्षिक तीर्थ स्थलों में से एक है, यहां हर साल 4 से 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आते हैं. यह मंदिर एक हिंदू ब्रह्मचारी (Brahmachari) देवता अय्यप्पन (Ayyappan) को समर्पित है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार वे शिव और विष्णु के स्त्री अवतार मोहिनी (Son of Shiva and Mohini) के पुत्र हैं. सबरीमाला की परंपराएं शैववाद, वैष्णववाद (Shaivism, Vaishnavism) और अन्य श्रमण परंपराओं का संगम हैं.
यह मंदिर 1260 मीटर की ऊंचाई पर अठारह पहाड़ियों के बीच एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. सबरीमाला के आसपास की तमाम पहाड़ियों पर मंदिर मौजूद हैं.
सबरीमाला मंदिर में प्राचीन काल से 10-50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है ( Restriction on Entry of Women ages 10–50). 28 सितंबर 2018 को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 4-1 बहुमत के फैसले में इस प्रतिबंध को पलट दिया. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद, केरल में हिंसक विरोध हुआ था.
सबरीमाला मंदिर दर्शन और पूजा पाठ के लिए सिर्फ मंडल पूजा (Mandalapooja) यानी लगभग 15 नवंबर से 26 दिसंबर के बीच या मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी और महा थिरुमल संक्रांति यानी 14 अप्रैल के अलावा हर मलयालम महीने के पहले पांच दिनों के लिए खुलता है.
सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मामले की 9 जजों की संवैधानिक बेंच ने जनहित याचिका की वैधता पर तीखी बहस की. अदालत ने कहा कि ऐसी याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर देना चाहिए था। वकील आरके गुप्ता ने याचिका की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे.
सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच सबरीमाला सहित कई धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश, भेदभाव और धार्मिक स्वतंत्रता बनाम समानता के अधिकारों पर अहम संवैधानिक सवालों की सुनवाई कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच सबरीमाला मामले सहित धर्म बनाम कानून के विवाद पर बहस कर रही है. बहस में धार्मिक स्वतंत्रता, पूजा के अधिकार, परंपराएं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन पर सवाल उठाए गए.
केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि धर्म समुदाय की आस्था पर आधारित है.
केरल के कोट्टांकुलंगारा श्रीदेवी मंदिर में हर साल मार्च में मनाया जाने वाला चमयविलक्कु त्योहार पुरुषों द्वारा स्त्री वेशभूषा धारण कर 16 शृंगार के साथ पारंपरिक दीप जलाकर भव्य शोभायात्रा निकालने की अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है.
सबरीमाला मामले की सुनवाई सीजेआई की अगुवाई वाली संविधान पीठ कर रही है. तीन दिन की सुनवाई के दौरान अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से लगायत तमाम मंदिरों की परंपराओं का भी उल्लेख हुआ.
सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने मंदिरों में धार्मिक प्रथाओं, महिलाओं के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा पर बहस की. केंद्र सरकार ने बताया कि धार्मिक प्रथाओं का आकलन समुदाय के भीतर होना चाहिए और न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मामले की तीसरी सुनवाई में नौ जजों की संवैधानिक पीठ ने सात संवैधानिक सवाल तय किए हैं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अनुच्छेद 25 और 26 के दायरे में अपनी दलीलें दीं, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता वैद्यनाथन ने मंदिर की परंपराओं पर प्रकाश डाला.
सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर विवाद पर 9 जजों की बेंच सुनवाई कर रही है, जिसमें 2018 के फैसले के बाद महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक और 'नैष्ठिक ब्रह्मचारी' परंपरा की व्याख्या पर चर्चा हो रही है.
सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला विवाद और धर्म बनाम कानून के मुद्दे पर नौ जजों की संवैधानिक बेंच की बहस जारी है. कोर्ट ने इस मामले में सात संवैधानिक सवाल तय किए हैं जिनके जवाब से न केवल सबरीमाला विवाद का समाधान होगा, बल्कि धार्मिक प्रथाओं और सामाजिक मान्यताओं से जुड़े अन्य विवाद भी सुलझेंगे.
सुप्रीम कोर्ट में सबरीमला मंदिर विवाद पर नौ जजों की बेंच ने धर्म और कानून के बीच बहस जारी रखी. केंद्र सरकार से सवाल पूछे गए कि गैर-भक्त कैसे मंदिर की परंपराओं को चुनौती दे सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट में धर्म और कानून के टकराव से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जेंडर इक्वालिटी और संवैधानिक नैतिकता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कई फैसलों में पश्चिमी दर्शन का प्रभाव है, जबकि भारतीय समाज की अपनी अलग सोच है.
केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित विवाद ने नया मोड़ लिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में 9 जजों की संविधान पीठ ने पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद सुलझाने के लिए 9 जजों की बेंच गठित की है. सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हिंदू धर्म की बहुलता और धार्मिक प्रथाओं की विविधता पर विस्तार से दलीलें दीं.
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला विवाद समेत पांच धार्मिक मामलों की सुनवाई के लिए 9 जजों की बेंच गठित की है. यह विवाद महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश और आस्था के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव से जुड़ा है.
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े विवाद पर बड़ी सुनवाई की तैयारी कर ली है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई में गठित नौ जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल से पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.
केरल के सबरीमाला मंदिर में भगवान अय्यप्पा के दर्शन के लिए खास उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद जारी है. केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नरम रुख अपनाते हुए कहा है कि धार्मिक, सामाजिक और कानूनी विशेषज्ञों से गहन विचार-विमर्श के बाद ही कोई फैसला होगा.
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सरकार का रुख क्या है. पहले जो हलफनामा दाखिल किया गया था, वह अब भी कायम है या नहीं, इस पर मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए. विपक्ष ने विधानसभा में देवस्वम मंत्री के इस्तीफे की मांग की और इसी मुद्दे पर सदन का बहिष्कार किया.
सबरीमाला गोल्ड चोरी केस में एसआईटी ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है कि 36 सैंपल जुटाए गए हैं. इनकी जांच जमशेदपुर की लैब में होगी और वहां से अंतिम जांच रिपोर्ट मिलने के बाद इसे कोर्ट में दाखिल किया जाएगा.
केरल के सबरीमाला मंदिर का मामला फिर से सुर्खियों में है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने फिर से मामले की सुनवाई करने जा रहा है. यह ऐसे समय हो रहा है, जब केरल में विधानसभा चुनाव की सियासी हलचल तेज है. ऐसे में लेफ्ट ने सबरीमाला पर अपना स्टैंड बदल गया है?
केरल में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर फिर सियासत शुरू हो गई है. चुनाव से पहले कांग्रेस और बीजेपी सरकार पर अपना रुख स्पष्ट करने का दबाव बना रहे हैं. वहीं, सरकार ने इस मामले पर संवैधानिक जटिलताओं का हवाला देते हुए जल्दबाजी से बचने की बात कही है.