जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले पर हुई कार्रवाई को लेकर बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. मंच पर उनके साथ अलग-अलग राज्यों के 5 प्रदर्शनकारी भी मौजूद रहे. इस दौरान कांग्रेस नेता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 'हक की आवाज उठा रहे युवाओं को पीटा गया, धमकाया गया और उनके घरों तक गुंडे भेजे गए. इतना ही नहीं, 15 साल की एक बच्ची पर दबाव बनाकर जबरन माफी भी मंगवाई गई'. इस पूरे रवैये को पूरी तरह गलत बताते हुए उन्होंने साफ किया कि पार्टी ऐसी बर्बरता को बर्दाश्त नहीं करेगी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद प्रदर्शनकारियों ने भी अपनी आपबीती साझा की. रिया अहिर ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को खारिज करते हुए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि 'मैं मुंबई पुलिस को रोकने वाली लड़की नहीं, बल्कि 30 निर्दोष छात्रों को गैरकानूनी हिरासत से बचाने वाली लड़की हूं'. प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाने के बदले उन्हें लाठियों, धमकियों और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.
खराब शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाना अपराध नहीं: राहुल गांधी
इस दौरान राहुल गांधी कहा कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं से उनकी विस्तार से बात हुई. बातचीत के दौरान छात्रों ने बताया कि किस तरह उन पर लाठियां बरसाई गईं और डराने का प्रयास हुआ. ये युवा देश का भविष्य हैं और संविधान की रक्षा के लिए मैदान में उतरे हैं.
उनका मानना है कि ध्वस्त हो चुकी शिक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल उठाना कोई जुर्म नहीं है. बिना किसी हिंसा के शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग पूरी तरह गलत है. ऐसे में सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह इस व्यवस्था में सुधार करे और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाए.
रिया अहिर ने सुनाई आपबीती
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिया अहिर ने अपने खिलाफ फैलाए जा रहे गलत नैरेटिव पर कड़ी आपत्ति जताई. अपनी बात साफ करते हुए वह बोलीं, "मैं मुंबई पुलिस को रोकने वाली नहीं, बल्कि 30 निर्दोष छात्रों को गैरकानूनी हिरासत से बचाने वाली छात्रा हूं." साथ ही सोशल मीडिया पर हो रही प्रताड़ना का जिक्र करते हुए बताया कि उनके खिलाफ बेहद अश्लील बातें लिखी जा रही हैं. यह सिर्फ साधारण ट्रोलिंग नहीं, बल्कि सीधा अपराध है.
रिया ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने बताया कि 27 जुलाई को उन्होंने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन 5 अगस्त तक उन्हें FIR की कॉपी नहीं मिली. रिया का कहना है कि देश में न तो बेटियों को शांति से पढ़ने दिया जा रहा है और न जीने दिया जा रहा है. जिस दिन घटना हुई, जिनकी जिम्मेदारी सुरक्षा करने की थी, वही पुलिस वाले छात्रों को पीट रहे थे. उन्होंने सवाल किया कि क्या न्याय सिर्फ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए है या संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत सभी के लिए बराबर है?
पैलेट गन चलाने और लाठीचार्ज के आरोप
झारखंड से आई नूतन तोपू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा दावा किया. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान अपनी आंखों से पैलेट गन देखने और खुद भी पैलेट लगने की बात कही. साथ ही साफ किया कि जब-जब अन्याय होगा, छात्र उसके खिलाफ ऐसे ही आवाज उठाते रहेंगे.
अन्य प्रदर्शनकारी छात्राओं ने भी सुरक्षा बलों के रवैये को बेहद खराब बताया. मुस्कान ने कहा कि वह शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रही थीं, लेकिन उनके ऊपर पुलिस और आरएएफ (RAF) की ओर से लाठियां चलाई गईं. वहीं, फरहाना ने उस दिन को अपनी जिंदगी का 'ब्लैक डे' बताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज हुआ और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया.
मंच से राहुल गांधी और प्रदर्शनकारियों ने एक सुर कहा कि शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर आवाज उठाना किसी भी लिहाज से गलत नहीं है. डराने या दबाने के बजाय प्रदर्शनकारियों के साथ बैठकर उनकी समस्या का समाधान निकालना होगा. परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना ही इस पूरे विवाद का स्थायी हल है.