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Arunachal's Glaw Lake: रामसर साइट बनी अरुणाचल की ये खूबसूरत झील, कहते हैं 'यहां कोई नहीं डूबता'! जानें कैसे पहुंचे?

अरुणाचल प्रदेश की एक अनछुई और बेहद खूबसूरत झील ग्लॉ लेक पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.  घने जंगलों और पूर्वी हिमालय की वादियों के बीच छिपी यह झील भारत की 101वीं रामसर साइट बन गई है. अगर आप भी भीड़-भाड़ से दूर किसी ऑफबीट डेस्टिनेशन की तलाश में हैं, तो ग्लॉ लेक आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए. 

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भारत की 101वीं रामसर साइट जरूर सैर करें. (PHOTO:X@byadavbjp)
भारत की 101वीं रामसर साइट जरूर सैर करें. (PHOTO:X@byadavbjp)

Arunachal Pradesh's Beautiful Glaw Lake: नॉर्थ ही नहीं बल्कि भारत का नॉर्थ-ईस्ट हिस्सा भी बेहद खूबसूरत और अनछुआ है. अरुणाचल प्रदेश अपनी अनछुई सुंदरता के लिए जाना जाता है और एक बार फिर यह जगह सुर्खियों में बनी हुई है. इसकी वजह यहां की एक अनछुई और बेहद खूबसूरत झील ग्लाव झील है, जो पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.

घने जंगलों और पूर्वी हिमालय की वादियों के बीच छिपी इस झील ने इतिहास रच दिया है, क्योंकि यह भारत की 101वीं रामसर साइट बन गई है. खास बात यह है कि यह अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट भी है. अगर आप भी भीड़-भाड़ से दूर किसी ऑफबीट डेस्टिनेशन की तलाश में हैं, तो ग्लाव लेक आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए. आइए आपको इस ग्लाव झील के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं. 

क्या होती है रामसर साइट?

सबसे पहले तो समझ लीजिए रामसर साइट ऐसे वेटलैंड यानी आर्द्रभूमि होते हैं जिन्हें इंटरनेशनल लेवल पर पर्यावरण और बायोडायवर्सिटी के लिए बेहद अहम माना जाता है. रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुआ एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है. इसके तहत दुनिया भर के प्रमुख जल निकायों, जैसे झीलों और दलदली इलाकों को खास पहचान और संरक्षण दिया जाता है, ताकि उनका प्राकृतिक पर्यावरण सुरक्षित रहे.

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क्यों खास है ग्लॉ लेक?

अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित ग्लाव झील पूर्वी हिमालय की गोद में स्थित एक शांत और प्राकृतिक झील है.  यह सालभर बहने वाली पहाड़ी धाराओं से भरी रहती है.  इसके आसपास 150 से ज्यादा पेड़ों की प्रजातियां और करीब 49 तरह की ऑर्किड पाई जाती हैं. 

यह झील कमलांग वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी के अंदर स्थित है, जहां हाथी, तेंदुआ बिल्ली, जंगली सूअर, हिरण, सिवेट, जायंट स्क्विरल और फ्लाइंग स्क्विरल जैसे कई दुर्लभ वन्यजीव देखने को मिल सकते हैं. 

लोककथाएं बढ़ाती हैं रहस्य

ग्लाव झील को लेकर स्थानीय मिश्मी जनजाति के बीच कई रोचक मान्यताएं प्रचलित हैं.  माना जाता है कि इस झील में चार देवता निवास करते हैं, जो झील और यहां आने वाले लोगों की रक्षा करते हैं.  

एक और लोकप्रिय मान्यता यह भी है कि इस झील में कोई डूबता नहीं है.  वहीं, घने जंगलों से घिरी होने के बावजूद झील की सतह पर पत्ते या टहनियां बहुत कम दिखाई देती हैं. हालांकि इन बातों का कोई साइंटिफिक प्रमाण नहीं है, लेकिन ये कहानियां इस जगह को और भी रहस्यमयी बना देती हैं. 

कैसे पहुंचे ग्लाव झील?

हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट डिब्रूगढ़ है, जो ग्लाव झील से लगभग 170-180 किलोमीटर दूर है. 
रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन तिनसुकिया है. उसके बाद आप टैक्सी से वाकरों पहुंच सकते हैं. 
सड़क मार्ग: डिब्रूगढ़ या तिनसुकिया से टैक्सी लेकर वाकरो पहुंचा जा सकता है. वाकरो से ग्लाव लेक लगभग 20 किलोमीटर की ट्रेकिंग के बाद पहुंचा जाता है.

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अरुणाचल प्रदेश जाने के लिए भारतीय पर्यटकों को इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है, इसलिए यात्रा से पहले इसे बनवा लें.

कितना आएगा खर्च?

अगर आप दिल्ली या अन्य बड़े शहर से 4 से 5 दिन की ट्रिप प्लान करते हैं, तो संभावित खर्च कुछ इस प्रकार हो सकता है.

  • फ्लाइट (आना-जाना): ₹8,000–15,000
  • होटल/होमस्टे: ₹1,500–3,000 प्रति रात
  • टैक्सी और लोकल ट्रांसपोर्ट: ₹4,000–8,000
  • ट्रेकिंग गाइड और अन्य खर्च: ₹1,500–3,000
  • खाना-पीना: ₹1,000-1500 प्रतिदिन

कुल अनुमानित बजट: ₹18,000 से ₹50,000 प्रति व्यक्ति, जो सफर के समय, मौसम और आपकी पसंद पर निर्भर करता है. अगर आप फ्लाइट से जाते हैं तो खर्चा ज्यादा हो सकता है और ट्रेन से कम बजट में ट्रिप हो सकती है.

घूमने का सबसे अच्छा समय

ग्लाव झील घूमने के लिए अक्टूबर से अप्रैल का समय सबसे बेहतर माना जाता है. इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और ट्रेकिंग करना भी आसान होता है.  मानसून में यहां भारी बारिश के कारण रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं. 

क्यों करें ग्लॉ लेक की सैर?

अगर आप प्रकृति, ट्रेकिंग, फोटोग्राफी और ऑफबीट ट्रैवल के शौकीन हैं, तो ग्लाव झील आपके लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है. भारत की 101वीं रामसर साइट बनने के बाद यह जगह अब सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी खास पहचान बना चुकी है.  

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