सुबह करीब 9:45 बजे जैसे ही मैं संसद भवन पहुंचा, यह साफ दिखाई दे रहा था कि विपक्ष पूरी रणनीति के साथ आया है. संसद के मकर द्वार के बाहर INDIA गठबंधन के वरिष्ठ नेता पहले से ही जुटे हुए थे और आपस में चर्चा कर रहे थे. जैसे ही मैं थोड़ा आगे बढ़ा, मैंने देखा कि समाजवादी पार्टी के सांसद पिछले शुक्रवार की तरह इस बार भी अपने साथ दान पात्र लेकर पहुंचे थे. उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था, "चंदा चोर, गद्दी छोड़". वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था, जिस पर लिखा था, "अमित शाह संसद से गायब क्यों?"
करीब 10:30 बजे विपक्ष के सभी सांसदों ने मकर द्वार पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. जोरदार नारेबाजी के बीच सबसे पहले "अमित शाह जवाब दो" और "अमित शाह संसद से गायब क्यों हैं?" जैसे नारे लगाए गए. एक तरफ विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर था, तो दूसरी ओर मकर द्वार से ही सरकार के कई मंत्री संसद भवन में प्रवेश करते नजर आए. इसी दौरान केंद्रीय मंत्री संजय सेठ से मेरी बातचीत हुई. उन्होंने झारखंड में हुए कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
कुछ देर बाद अमित शाह के मुद्दे पर प्रदर्शन करने के बाद विपक्ष के कई नेता वहां से आगे बढ़ गए, लेकिन समाजवादी पार्टी के सांसद वहीं डटे रहे. उन्होंने एक छोटे से स्टूल पर दान पात्र रखा और उसे माला पहनाई. उससे पहले सांसदों ने एक गमछा बिछाकर उसे दरी का रूप दिया और उसी पर बैठकर प्रदर्शन शुरू किया. इसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसदों ने प्रतीकात्मक रूप से चंदा इकट्ठा करना शुरू किया. धरना समाप्त होने के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने पत्रकारों को नोटों की एक गड्डी दिखाते हुए दावा किया कि आज 47,100 रुपये का चंदा इकट्ठा हुआ है. जब उनसे पूछा गया कि इस राशि का क्या किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि यह पूरा पैसा अयोध्या जाकर राम मंदिर की दान पेटी में जमा कराया जाएगा.
सांसदों के हाथ में तख्तियां
धरना समाप्त होने के बाद सभी सांसद संसद भवन के भीतर जाने लगे. जिन सांसदों के हाथ में तख्तियां थीं, उन्हें प्रवेश से पहले CISF के जवानों ने बाहर ही रखवा लिया. सदन के भीतर पहुंचते ही विपक्ष ने एक बार फिर अमित शाह के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जबकि समाजवादी पार्टी के सांसद राम मंदिर चंदा मामले पर सरकार से जवाब मांगते रहे. लगातार हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
दोपहर 12 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो विपक्ष का हंगामा जारी रहा. इसी शोर-शराबे के बीच सरकार ने दो महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए, द इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026 और द बैंकर्स बुक एविडेंस बिल, 2026. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला लगातार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन चलने देने की अपील करते रहे, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा. इसके बावजूद सरकार ने अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया.
बिल पारित किया गया
लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया. इस विधेयक में भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव रखा गया. विधेयक पर लगभग कोई चर्चा नहीं हुई. विपक्ष के लगातार शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष ने इसे ध्वनिमत से पारित कराया और कुछ ही मिनटों में यह लोकसभा से पारित हो गया.
इसी दौरान संसद परिसर में यह खबर आई कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को राहत दी है. इसके कुछ ही देर बाद मेरी मुलाकात उनके पुत्र और भाजपा सांसद करण भूषण सिंह से हुई. उन्होंने कहा, 'हमारे परिवार ने पिछले तीन साल बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजारे हैं. आज का दिन हमारे लिए बहुत खुशी का दिन है.' उन्होंने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे पर राजनीति और नौटंकी करने का आरोप भी लगाया. करण भूषण ने कहा कि अब उनके परिवार के लिए जश्न मनाने का समय है और अभी 'बहुत सारे पटाखे फोड़ने बाकी हैं.'
अमित शाह भी संसद भवन पहुंचे
इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी संसद भवन पहुंचे. संसद पहुंचने के बाद उन्होंने अपने कार्यालय में कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं. दिलचस्प बात यह रही कि अमित शाह के संसद पहुंचने से करीब 10 मिनट पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद भवन से बाहर निकल चुके थे.
लगातार हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. हालांकि, राज्यसभा में कार्यवाही कुछ समय तक चलती रही. वहां एमएसएमई से संबंधित विधेयक पर चर्चा हुई और बाद में उसे भी सदन से पारित कर दिया गया. अंततः राज्यसभा की कार्यवाही भी मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संसद के बाहर मकर द्वार पर कई पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता भी नजर आए. इनमें विजय गोयल और प्रियंका चतुर्वेदी प्रमुख थीं. कुछ देर तक प्रियंका चतुर्वेदी की बातचीत जयराम रमेश और पवन खेड़ा से होती रही. इसके बाद जब वह वहां से निकलने लगीं, तो पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया और पुराने संसदीय दिनों की चर्चा छिड़ गई. तभी संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू भी वहां पहुंचे. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि राज्यसभा में प्रियंका चतुर्वेदी की कमी महसूस होती है, क्योंकि वह एक बेहतरीन वक्ता हैं और अपनी बात पूरी मजबूती के साथ सदन में रखती हैं.
परिचित तस्वीर के साथ समाप्त
हंसी-मजाक, राजनीतिक तकरार और पूरे दिन चले हंगामे के बीच धीरे-धीरे सभी सांसद संसद भवन से बाहर निकलने लगे. इस मानसून सत्र का एक और दिन उसी परिचित तस्वीर के साथ समाप्त हुआ,एक ओर विपक्ष ने विरोध-प्रदर्शन के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की, तो दूसरी ओर सरकार ने भारी हंगामे के बावजूद अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाते हुए महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करा लिया. यानी, संसद की कार्यवाही औपचारिक रूप से तो चली, लेकिन सार्थक चर्चा एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गई.