scorecardresearch
 

आंखों में उम्मीद, दिल में दहशत और इंतजार... हरदोई के पपेंद्र और ऋषिपाल कहां हैं? नेपाल बाढ़ में लापता युवकों की कहानी

नेपाल में कुदरत ने जो तबाही मचाई है, उसके निशान बहुत दूर-दूर तक फैले हैं. हरदोई के पिहानी के दो युवक भी इसी बाढ़ के बीच लापता हैं. परिवार से आखिरी बातचीत 25 अगस्त को हुई थी, उसके बाद से कोई अता-पता नहीं है. परिवार एक उम्मीद में जी रहा है कि उनके बच्चे सलामत हों. और बस, सुरक्षित घर लौट आएं... जानिए नेपाल त्रासदी से जुड़ी ये पूरी कहानी.

Advertisement
X
उम्मीद और डर के साथ इंतजार में जी रहे परिजन. (Photo: ITG)
उम्मीद और डर के साथ इंतजार में जी रहे परिजन. (Photo: ITG)

हर फोन की घंटी पर घरवालों की नजर दरवाजे पर चली जाती है. मोबाइल बजता है तो कुछ सेकेंड के लिए लगता है- शायद नेपाल से फोन आया हो. शायद पपेंद्र बोल रहा हो. शायद ऋषिपाल की आवाज सुनाई दे. लेकिन फोन किसी और का निकलता है और उम्मीद फिर वहीं ठहर जाती है, जहां कई दिनों से खड़ी है.

हरदोई के पिहानी इलाके के अहेमी गांव के झाला में इन दिनों दो परिवार इसी इंतजार में हैं. उनके अपने नेपाल गए थे रोजी-रोटी कमाने. लेकिन वहां आई भीषण बाढ़ के बाद दोनों से संपर्क टूट गया. आखिरी बार 25 अगस्त को बात हुई थी. उसके बाद दोनों के मोबाइल बंद हैं.

एक का नाम पपेंद्र सिंह है. उम्र करीब 35 साल. दूसरे का नाम ऋषिपाल सिंह है, जो करीब 25 साल का है. दोनों नेपाल के अपर त्रिशूली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट-वन में काम करते थे. पपेंद्र क्रेन ऑपरेटर थे और ऋषिपाल कटर मैन. अब परिवारों के पास इंतजार है, चिंता है और ढेर सारे सवाल हैं.

hardoi pihani two men missing nepal floods families await imotional story

पपेंद्र सिंह, दरबार सिंह के बेटे हैं. करीब पांच साल से नेपाल में रहकर काम कर रहे थे. घर-परिवार की जिम्मेदारी थी, इसलिए दूर रहकर भी काम करना उनकी मजबूरी थी. कुछ समय पहले पपेंद्र छुट्टी लेकर घर आए थे. परिवार के साथ वक्त बिताया और फिर 22 जुलाई को वापस नेपाल चले गए. घरवालों को क्या पता था कि इस बार विदाई इतनी लंबी हो जाएगी.

Advertisement

पपेंद्र की पत्नी रविंद्र कौर की पति से लगभग रोजाना बात हो जाती थी. 25 अगस्त की रात भी फोन पर बात हुई. बिल्कुल सामान्य बातचीत थी. फिर फोन कट गया. और उसके बाद दोबारा बात नहीं हुई.

यह भी पढ़ें: 18 महीने का मासूम देख रहा पिता की राह... रुला देगी नेपाल बाढ़ में लापता हुए ऊना के इंजीनियर की कहानी

रविंद्र कौर कहती हैं कि आखिरी बार 25 को बात हुई थी. बिल्कुल सामान्य बात हुई थी, जैसे रोज होती थी. उसके बाद से कोई बात नहीं हुई. फोन भी नहीं लग रहा. चार-पांच दिन हो गए हैं, अभी तक कोई खबर नहीं मिली है. अब घर में मोबाइल फोन सिर्फ फोन नहीं रह गया है. वो उम्मीद बन गया है.

hardoi pihani two men missing nepal floods families await imotional story

पपेंद्र के साथ ऋषिपाल सिंह भी नेपाल में काम कर रहे थे. करीब दो साल से वह भी वहीं रहकर अपना और परिवार का खर्च चला रहे थे. 25 अगस्त को दोनों परिवारों ने अपने-अपने घर के लोगों से बात की. उसके बाद नेपाल में बाढ़ और तबाही की खबरें आने लगीं. इसी बीच दोनों से संपर्क टूट गया. फोन मिलाया गया. बार-बार मिलाया गया. लेकिन दोनों के मोबाइल बंद मिले. परिवार ने अपने स्तर पर नेपाल में मौजूद लोगों से संपर्क किया. कंपनी के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की. रिश्तेदारों और साथियों से जानकारी ली गई, लेकिन कोई ऐसी खबर नहीं मिली, जिससे परिवार को राहत मिल सके.

Advertisement

कंपनी की तरफ से कहा गया- रेस्क्यू अभियान चल रहा है

परिजनों को बताया गया कि कंपनी की ओर से रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है. परिवार के कुछ लोग खुद नेपाल पहुंचकर तलाश में जुटे हैं. लेकिन हरदोई में बैठे घरवालों के लिए सबसे मुश्किल चीज है- इंतजार... पपेंद्र की पत्नी रविंद्र कौर की आंखों में आंसू हैं. घर में छोटी-छोटी बेटियां हैं. रिश्तेदार हैं. परिवार के लोग हैं. सबके पास अपनी-अपनी चिंता है, लेकिन सवाल एक ही है- पपेंद्र कहां हैं? ऋषिपाल कहां हैं? दोनों सुरक्षित हैं? कोई जवाब नहीं है. मोबाइल की स्क्रीन बार-बार देखी जाती है. शायद कोई मैसेज आया हो. शायद किसी अनजान नंबर से फोन हो. शायद नेपाल से कोई खबर आई हो.

hardoi pihani two men missing nepal floods families await imotional story

लेकिन अभी तक इंतजार ही हाथ लगा है. पपेंद्र के पिता दरबार सिंह की बात में किसी बड़ी मांग का जिक्र नहीं है. उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए, कोई और आश्वासन नहीं चाहिए. उनकी मांग है- बेटा वापस आ जाए. वह कहते हैं कि हमारी कोई बड़ी मांग नहीं है. बस हमारे बच्चे सही-सलामत घर पहुंच जाएं.

यह भी पढ़ें: 'लेंडे नदी पर बनी झील कभी भी फट सकती है', चीन ने बाढ़ से जूझ रहे नेपाल को दी नई वॉर्निंग

सरकार जल्दी से जल्दी नेपाल में उनकी तलाश करवाए और हमें उनकी सही जानकारी दिलाए. एक पिता के लिए इससे बड़ी मांग शायद हो भी नहीं सकती. पपेंद्र के भाई मंदीप सिंह बताते हैं कि 25 अगस्त को आखिरी बार बात हुई थी. उसके बाद कोई संपर्क नहीं हो सका. परिवार के लोग नेपाल जाकर भी तलाश कर रहे हैं. मंदीप कहते हैं कि सरकार से यही उम्मीद है कि हमारे भाई और परिवार के बाकी लोग सही-सलामत घर वापस आ जाएं.

Advertisement

hardoi pihani two men missing nepal floods families await imotional story

एक तरफ नेपाल में रेस्क्यू चल रहा है. दूसरी तरफ परिवार अपने स्तर पर भी तलाश कर रहा है, लेकिन दोनों परिवारों को अब तक वो एक खबर नहीं मिली, जिसका उन्हें बेसब्री से इंतजार है. नेपाल में आई बाढ़ ने तबाही मचा दी. जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई. इसी तबाही के बीच हरदोई के पिहानी के ये दो परिवार अपने अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं. पपेंद्र की पत्नी और बच्चे घर पर हैं. ऋषिपाल के परिवार वाले भी इंतजार में हैं.

किसी को नहीं पता कि दोनों इस वक्त कहां हैं. बस इतना पता है कि 25 अगस्त के बाद उनसे संपर्क नहीं हुआ है. और यही अनिश्चितता सबसे ज्यादा परेशान कर रही है. जब कोई खबर नहीं मिलती, तो उम्मीद और डर दोनों साथ-साथ चलते हैं. उम्मीद कहती है- दोनों सुरक्षित होंगे. डर पूछता है- अगर सुरक्षित हैं तो खबर क्यों नहीं आई? इसी सवाल के बीच दिन बीत रहे हैं. हर फोन कॉल एक उम्मीद है. हर अनजान नंबर एक संभावना है. और हर गुजरता हुआ दिन परिवार की बेचैनी बढ़ा रहा है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement