कर्नाटक कांग्रेस के नेता और मंत्री प्रियंक खड़गे ने बीजेपी के 'हर घर तिरंगा' अभियान को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी को देशभर में देशभक्ति का संदेश देने से पहले अपना यह अभियान नागपुर स्थित RSS मुख्यालय से शुरू करना चाहिए. प्रियंक खड़गे ने दावा किया कि आजादी के बाद कई दशकों तक RSS मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया गया और वहां पहली बार आधिकारिक तौर पर 2002 में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया.
प्रियंक खड़गे ने सवाल किया कि अगर बीजेपी और RSS आज हर भारतीय को तिरंगे और देशभक्ति का संदेश दे रहे हैं तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि RSS ने इतने लंबे समय तक राष्ट्रीय ध्वज के बजाय भगवा ध्वज को प्राथमिकता क्यों दी. उन्होंने यह भी पूछा कि कितने RSS रूट मार्च ऐसे हुए हैं, जिनमें स्वयंसेवक पूरी वर्दी में हाथों में तिरंगा लेकर मार्च करते दिखाई दिए. उनके मुताबिक, दूसरों को देशभक्ति का सर्टिफिकेट देने से पहले इन सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए.
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देशभर में तेज हुईं तिरंगा यात्राएं
प्रियंक खड़गे के बयान के बीच स्वतंत्रता दिवस से पहले 'हर घर तिरंगा' अभियान देशभर में जोर पकड़ रहा है. इस साल अभियान 9 से 17 अगस्त तक चलाया जा रहा है और लोगों से घरों पर तिरंगा फहराने के साथ 'सेल्फी विद तिरंगा' अभियान में हिस्सा लेने की अपील की गई है. सरकार के मुताबिक, यह अभियान अब जनभागीदारी का रूप ले चुका है.
अलीगढ़ में स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए रेलवे स्टेशन पर RPF और GRP ने संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया. डॉग स्क्वॉड की मदद से प्लेटफॉर्म और यात्रियों के सामान की जांच की गई. जम्मू-कश्मीर के रामबन में 1,400 मीटर लंबी तिरंगा रैली निकाली गई, जबकि गांदरबल, अनंतनाग, पुंछ और शोपियां में भी मेगा तिरंगा यात्राएं आयोजित की गईं. श्रीनगर में एलजी मनोज सिन्हा ने तिरंगा रैली में हिस्सा लिया.
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बस्तर से सहारनपुर तक तिरंगे की तैयारी
बिहार के गया और दरभंगा, गुजरात के अहमदाबाद, त्रिपुरा के अगरतला और मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में भी तिरंगा यात्राएं निकाली गईं. छत्तीसगढ़ के नारायणपुर से 'बस्तर तिरंगा यात्रा 2026' शुरू हुई, जहां शहीद जवानों के परिवारों को तिरंगा सौंपा गया. वहीं सहारनपुर में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं हजारों तिरंगे तैयार कर रही हैं. नगर निगम की गौशाला में गोबर से तिरंगा चेस्ट बैज और राखियां भी बनाई जा रही हैं. इस तरह 15 अगस्त से पहले एक तरफ देशभर में तिरंगा अभियान जोर पकड़ रहा है, तो दूसरी तरफ प्रियंक खड़गे के बयान ने इसे लेकर सियासी बहस भी तेज कर दी है.