आंध्र प्रदेश के पारवथीपुरम मान्यम जिले के सीमावर्ती गांवों में इंसान और हाथियों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए राज्य का वन विभाग बड़ा कदम उठाने जा रहा है. वन विभाग जयंत और अभिमन्यु नाम के दो ट्रेंड कुमकी हाथियों को पलामनेरु कैंप से गुचिमी कैंप भेजने की अंतिम तैयारी कर रहा है.
यह निर्देश डिप्टी सीएम और वन और पर्यावरण मंत्री पवन कल्याण की तरफ से दिया गया है, ताकि ओडिशा से आने वाले जंगली हाथियों के झुंड से बने हालात पर काबू पाया जा सके.
जयंत को राज्य के नानियाल एलीफेंट कैंप में खास ट्रेनिंग दी गई है, जबकि अभिमन्यु को कर्नाटक से लाया गया है और उसे मैदानी अनुभव के लिए जाना जाता है. दोनों हाथी हाल ही में छह बड़े ऑपरेशन में हिस्सा ले चुके हैं, जिनमें पलामनेरु के पास एक अकेले और खतरनाक जंगली हाथी को पकड़ने का ऑपरेशन भी शामिल है.
वन अधिकारियों ने बताया कि इन दोनों हाथियों के मैदानी तालमेल, काम करने के तरीके और शांत स्वभाव को देखते हुए ही मान्यम में तैनाती के लिए इन्हें चुना गया है.
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अधिकारियों के मुताबिक, जंगलों के छोटे टुकड़ों में बंटने, पेड़ों की छांव कम होने और प्राकृतिक इलाकों में भोजन-पानी की भारी कमी की वजह से हाथियों के झुंड ओडिशा से मान्यम के सीमावर्ती गांवों की तरफ आ रहे हैं. इन हाथियों की वजह से किसानों की फसलों को लगातार नुकसान हो रहा है और खेती करने वाले लोगों की सुरक्षा को भी लगातार खतरा बना हुआ है.
इस समस्या के लंबे समय के समाधान के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ओडिशा सरकार के साथ बातचीत कर रही है और ओडिशा से और कुमकी हाथी लाने की योजना पर भी काम चल रहा है. वहीं फौरी राहत के तौर पर डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने मुसलमाडुगु यानी पलामनेरु कैंप से जयंत और अभिमन्यु को गुचिमी भेजने का आदेश दिया है, ताकि सीमावर्ती गांवों को तुरंत राहत मिल सके.