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Exclusive: अभय तिवारी ने काली कमाई से बनाई आलीशान कोठी? घरवाले छोड़कर भागे

आजतक की टीम झारखंड के JPSC और JSSC एग्जाम्स में धांधली के आरोपी अभय तिवारी के घर पहुंची. रांची में अभय का 300 गज में मकान बना हुआ है. घर पर टीम को ताला लगा मिला. आरोपी ने दो साल पहले जमीन 300 गज जमीन खरीदकर यह मकान बनवाया है.

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आजतक की टीम JPSC, JSSC धांधली के आरोपी अभय तिवारी के रांची वाले घर पहुंची. (फोटो-ITG)
आजतक की टीम JPSC, JSSC धांधली के आरोपी अभय तिवारी के रांची वाले घर पहुंची. (फोटो-ITG)

झारखंड की चर्चित जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में धांधली और घोटालों के मुख्य आरोपी अभय तिवारी के घर आजतक की टीम पहुंची. आजतक की टीम को धांधली के मुख्य आरोपी अभय तिवारी के रांची स्थित घर पर ताला लगा हुआ मिला था.

टीम जब अभय तिवारी के परिजनों से बातचीत करने रांची के नामकुम इलाके के जोरार गांव पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था. आरोपी के करीब 300 गज में बने इस आलीशान मकान के बाहर और अंदर दोनों तरफ ताले लटके हुए थे. घर के अंदर कुछ दोपहिया वाहन पार्क किए हुए जरूर नजर आए. लेकिन उसके परिवार के लोग कहां गए हैं, इसकी जानकारी आस-पास के किसी भी पड़ोसी को नहीं है.

स्थानीय लोग अच्छी तरह जानते हैं कि यह आलीशान मकान अभय तिवारी का ही है, जिसे उसने करीब दो साल पहले ही इतनी बड़ी जमीन खरीदकर बनवाया था.

घोटाले के पैसों से खड़ी की गई संपत्ति?

इस आलीशान मकान को देखकर अब कई तरह के गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जमीन और इतना बड़ा मकान परीक्षाओं में हुई धांधली और भ्रष्टाचार के काले पैसों से खरीदा गया है? हालांकि, यह अभी जांच का विषय है. इससे पहले सीआईडी (CID) की टीम भी इस आवास पर छापेमारी करने आ चुकी है.

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सीआईडी ने अभय तिवारी को पिछले साल 22 जुलाई को ही गिरफ्तार कर लिया था और फिलहाल वह सीआईडी की रिमांड पर है, जहां पूछताछ के दौरान वह लगातार बड़े खुलासे कर रहा है.

इस दौरान सामने आया है कि अभय तिवारी के कुल दो भाई हैं. गोड्डा जिले में वह फिलहाल सरकारी नौकरी यानी बीएसओ (BSO) के पद पर कार्यरत था. लेकिन इस सरकारी नौकरी में आने से पहले अभय तिवारी परीक्षा संचालन का काम करने वाली 'TDPL' नाम की एजेंसी में काम करता था. वहां वह मार्केटिंग मैनेजर के पद पर था. परीक्षा एजेंसियों पर अपनी मजबूत पकड़ का फायदा उठाकर उसने एक पूरा सिंडिकेट बना लिया था.

ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को ठेका दिलाने का आरोप

आरोप है कि अभय तिवारी ने ही एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को जेपीएससी की 14वीं परीक्षा के लिए आवेदन मंगवाने से लेकर रिजल्ट प्रकाशित करने तक का ठेका दिलवाया था. इस डील के एवज में उसने 25 प्रतिशत कमीशन और 2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम डील की थी.

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एजेंसी के साथ अपनी अंदरूनी सेटिंग और पहुंच का फायदा उठाकर वह अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में अलग-अलग फिक्स रेट पर सीटों की सेटिंग और धांधली का काला कारोबार चलाता था. फिलहाल सीआईडी इस पूरे नेटवर्क और सिंडिकेट से जुड़े अन्य चेहरों की तलाश में जुटी है.

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