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केजरीवाल ने पूछा- जब दिल्ली में BSP-RJD के ऑफिस तो AAP का क्यों नहीं

जिसकी सरकार है,और 67 विधायक हैं, लेकिन एक भी पार्टी दफ्तर नहीं है. आम आदमी पार्टी के पीछे पड़ गए हैं, 'आप' के साथ ही भेदवाव क्यों ?

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अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल

दिल्ली में शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट के बाद आप पार्टी का ऑफ़िस आवंटन रद्द हो गया .केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि 'उपराज्यपाल महोदय द्वारा आम आदमी पार्टी के ऑफ़िस का आवंटन रद्द करना यह दिखाता है कि आम आदमी पार्टी के ख़िलाफ़ भेदभाव की दृष्टि के साथ बर्ताव किया जा रहा है'. ये बहुत दुःख की बात है, जिसकी सरकार है,और 67 विधायक हैं, लेकिन पार्टी दफ्तर नहीं है. आम आदमी पार्टी के पीछे पड़ गए हैं, 'आप' के साथ ही भेदवाव क्यों ?

केजरीवाल ने कहा कि आज़ादी के बाद ये पहला वाक़या है. जिस कांग्रेस के पास एक भी विधायक नहीं हैं उनके पास 5 ऑफिस है. वहीं दिल्ली में बीजेपी की 3 सीटें आईं हैं लेकिन बीजेपी के पास 11 अशोक रोड़ मुख्यालय के साथ 6 ऑफिस और भी हैं जिसमें बीएचपी, आरएसएस के ऑफिस शामिल हैं. दिल्ली में आरजेडी का भी आफिस है.

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केजरीवाल बोले हमारा क्या कसूर है? हमारा कसूर है कि देश के सबसे बड़े टैंकर माफिया को खत्म किया. जब से हाउस टैक्स माफ करने की बात की है उससे बाजेपी बौखला गई है.अब हमारे दफ्तर को भी छीन लिया है. आम आदमी पार्टी जनता के हक़ के लिए, अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे.

केजरीवाल ने यह भी कहा कि ,नगर निगम के स्कूलों और अस्पतालों की हालत ठीक नहीं है, आप के एमसीडी चुनाव में जीत के आने के बाद दिल्ली सरकार के स्कूलों और हॉस्पिटल्स के जैसे कर देंगे.

दरअसल सच्चाई यह है कि ये लोग हमें ख़त्म करना चाहते हैं. देश के आम आदमी की ये जो पार्टी है उस पार्टी को ही ख़त्म कर देना चाहते हैं, आम आदमी की आवाज़ ही दबा देना चाहते हैं लेकिन ऐसा होगा नहीं, हम सच्चाई के रास्ते पर चल रहे हैं और भगवान हमारे साथ हैं. हमने कोई ग़लत काम नहीं किया. हम जनता के लिए लड़ रहे हैं. और आज मैं दिल्ली की जनता को ये आश्वासन देना चाहता हूं कि चाहे ये लोग हमसे सबकुछ छीन लें, चाहे हमारा ऑफ़िस छीन लें, हम लोग सड़क पर बैठकर काम कर लेंगे लेकिन जनता के हक़ के लिए हम यूं ही लड़ते रहेंगे. अंतिम सांस तक इस देश के लिए लड़ते रहेंगे. अंतिम सांस तक इन माफ़ियाओं से लड़ते रहेंगे जनता को हक़ दिलाने के लिए. और मुझे यकीन है कि जनता ये सबकुछ देख रही है और 23 अप्रैल को एमसीडी चुनाव में इसका जवाब दिल्ली की जनता अपने वोट से देगी और इनको सबक सिखाएगी.

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