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आज चांद से SpaceX रॉकेट के टुकड़े की जोरदार टक्कर... स्कूल बस जितना बड़ा, 4,000 KG वजन, 8,690 KM की स्पीड

करीब डेढ़ साल से अंतरिक्ष में भटक रहा SpaceX के फाल्कन-9 रॉकेट का एक विशाल हिस्सा अब चांद से टकराने वाला है. यह स्कूल बस के आकार का मलबा हजारों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा की सतह पर गिरेगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे कोई खतरा नहीं है, लेकिन अंतरिक्ष कचरे के बढ़ते संकट पर नई बहस जरूर छिड़ सकती है.

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इस अंतरिक्ष कचरे के टकराने से चंद्रमा की धूल का गुबार उठेगा (फोटो- सोशल मीडिया)
इस अंतरिक्ष कचरे के टकराने से चंद्रमा की धूल का गुबार उठेगा (फोटो- सोशल मीडिया)

SpaceX रॉकेट का एक टुकड़ा बुधवार को चांद से टकराने वाला है. SpaceX रॉकेट का ये टुकड़ा पिछले साल से अंतरिक्ष में घूम रहा है. अब बुधवार सुबह (अमेरिकी टाइम के हिसाब से) ये तेज रफ्तार के साथ चंद्रमा से टकराने वाला है.

स्कूल-बस के साइज की यह चीज SpaceX Falcon 9 रॉकेट की है. जिसने जनवरी 2025 में Firefly Aerospace के लूनर लैंडर को चंद्रमा की तरफ लॉन्च किया था.

चार मीट्रिक टन (4,000 किलोग्राम) वजन वाला यह रॉकेट का हिस्सा लगभग 2:35 a.m. ET (0635 GMT) पर चंद्रमा से टकराएगा. यह 5,400 मील प्रति घंटे (8,690 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ़्तार से चंद्रमा की सतह से टकराएगा. इस अंतरिक्ष कचरे के टकराने से चंद्रमा की धूल का गुबार उठेगा. यह धूल सूरज की रोशनी में चमक सकती है, लेकिन पृथ्वी से इसे नंगी आंखों से देखना मुश्किल होगा.

SpaceX का कहना है कि यह टक्कर अनजाने में हो रही है. रॉकेट का यह टुकड़ा चंद्रमा के पश्चिमी हिस्से में मौजूद आइंस्टीन क्रेटर (Einstein Crater) से टकरा सकता है, जिसे पृथ्वी से देखना अक्सर मुश्किल होता है.

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आमतौर पर, रॉकेट के पेलोड को कक्षा (ऑर्बिट) में सही जगह पर पहुंचाने के बाद, ऐसे चरण पृथ्वी के वायुमंडल में वापस गिरकर जल जाते हैं या समुद्र में गिर जाते हैं.

लेकिन जनवरी के लूनर लैंडर मिशन के लिए पृथ्वी के करीब वाले मिशनों की तुलना में ज्यादा जोर (थ्रस्ट) की जरूरत थी, इसलिए रॉकेट का दूसरा चरण अंतरिक्ष में ही रह गया. यह हजारों अन्य अंतरिक्ष कचरे के टुकड़ों के बीच बिना किसी मकसद के तैरता रहा, जिनसे सक्रिय उपग्रहों (सैटेलाइट्स) को बचकर निकलना पड़ता है.

इस साल की शुरुआत में एक्सपर्ट्स को पता चला कि रॉकेट एक ऐसे ऑर्बिटल रास्ते पर था जो चंद्रमा पर जाकर खत्म होता है. इससे पहले ही ये रॉकेट अपना बचा हुआ ईंधन खत्म कर चुका था और इसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता था. 

रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, SpaceX में NASA साइंस और ड्रैगन प्रोग्राम की डायरेक्टर जूलियाना शाइमन ने कहा कि सौर गतिविधि और गुरुत्वाकर्षण बलों के मेल ने इसे चंद्रमा की ओर जाने वाले रास्ते पर डाल दिया. उनके मुताबिक, इससे कोई खतरा नहीं है. हालांकि, इससे ये साफ है कि बचे हुए अंतरिक्ष हार्डवेयर (अंतरिक्ष कचरे) को ठिकाने लगाने में कुछ लापरवाही बरती जाती है.

चंद्रमा पर अंतरिक्ष कचरे के टकराने की घटनाएं कम ही होती हैं. मार्च 2022 में एक चीनी रॉकेट का चरण लूनर टेस्ट मिशन पूरा करने के बाद चंद्रमा से टकरा गया था. 2009 में, NASA ने चांद पर रॉकेट का एक हिस्सा जानबूझकर क्रैश कराया था, ताकि टक्कर से उड़ी चांद की धूल और मलबे का अध्ययन किया जा सके.

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शाइमन ने कहा कि NASA और SpaceX भविष्य में चांद पर होने वाली ऐसी टक्करों को रोकने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं. अमेरिकी स्पेस एजेंसी अपने अरबों डॉलर के आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत इस दशक के आखिर में चांद पर एक बेस बनाने और नियमित रूप से एस्ट्रोनॉट मिशन भेजने की प्लानिंग कर रही है. वह नहीं चाहेगी कि स्पेस जंक के भटकते टुकड़े उन एसेट्स से टकराएं.

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