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डायबिटीज में घाव क्यों नहीं भरता? क्या हो सकता है इसका सही इलाज, नई रिसर्च में चला पता

डायबिटीज के मरीजों में पैर के घाव, जिन्हें डायबिटिक फुट अल्सर कहा जाता है, आसानी से ठीक नहीं होते. नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक थेरेपी विकसित की है जो इस समस्या का इलाज कर सकती है. हालांकि अभी यह शुरुआती ट्रायल में ही है.

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डायबिटीज में घाव क्यों नहीं भरते
डायबिटीज में घाव क्यों नहीं भरते

डायबिटीज के मरीज को अगर कहीं शरीर में हल्का घाव भी जाए तो ये आसानी से ठीक नहीं पो पाता है. ये घाव आमतौर पर पैर में होता है और इसको डायबिटिक फुट अल्सर कहते हैं.  कुछ मामलों में तो यह इतना सड़ जाता है कि डॉक्टरों के पास मरीज की जान बचाने के लिए पैर या उंगलियां काटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता. दशकों से डॉक्टर और वैज्ञानिक सिर्फ यही मानते रहे कि हाई ब्लड शुगर के कारण नसों  में ब्लड सर्कुलेशन पर बुरा असर पड़ता है, जिससे मामूली चोट या घाव भी समय पर ठीक नहीं हो पाते है, लेकिन अब मेडिकल साइंस की एक नई रिसर्च में इस रहस्य को पहचानने की कोशिश की है.

वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि डायबिटीज के मरीजों में उनके अपने ही इम्यून सेल्स एक खतरनाक डैमेजिंग इंफ्लेमेटरी स्टेट में लॉक हो जाते हैं और कभी घाव भरने वाले मोड में जा ही नहीं पाते है. इससे घाव आसानी से नहीं भरता है. सांइस डेली में इस रिसर्च को प्रकाशित किया गया है. 

रिसर्च में पाया गया कि लगातार हाई ब्लड शुगर और टॉक्सिक फ्री-रेडिकल्स के कारण घाव की जगह का माहौल इतना जहरीला हो जाता है कि मैक्रोफेज 'हाइपर-इंफ्लेमेटरी' अवस्था में फंसकर ताले की तरह बंद हो जाते हैं. और वे लगातार ऐसे केमिकल्स छोड़ते रहते हैं जो ठीक होने के बजाय स्वस्थ टिश्यूज को ही गलाने लगते हैं. शरीर को लगता है कि हमला अभी जारी है, जबकि असल में वह अपनी ही स्किन को ठीक से रोक रहा होता है .यही वजह है कि आप बाहर से कितनी भी एंटीबायोटिक्स क्रीम लगा लें या पट्टी बांध लें, जब तक अंदर का यह इम्यून स्विच ठीक नहीं होता, घाव कभी अंदर से नहीं भरता है.  

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क्या है रीप्रोग्रामिंग थेरेपी की

इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने ऐसी नई दवाएं और जैल तैयार किए जा रहे हैं जो इन फंसे हुए इम्यून सेल्स को 'रीप्रोग्राम 'कर सकें. इनको रीप्रोग्रामिंग थेरेपी का नाम दिया गया है.  साथ ही वैज्ञानिक ऐसे मॉलिक्यूल्स पर काम कर रहे हैं जो घाव पर लगाते ही मैक्रोफेज को संदेश देंगे कि घाव को भरना शुरू करो. अगर यह थेरेपी क्लिनिकल ट्रायल्स में सफल होती है, तो भविष्य में डायबिटिक फुट अल्सर के मरीजों को पैर या अंगूठा कटवाने की नौबत से बचाया जा सकेगा.

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डायबिटीज के मरीज इन बातों का रखें ध्यान

रोजाना पैरों के तलवों को चेक करें कि कहीं कोई लाल निशान या कट तो नहीं है.

नंगे पैर कभी न चलें: घर के अंदर भी हमेशा आरामदायक, सॉफ्ट-सोल वाली स्लिपर्स या डायबिटिक फुटवियर पहनें.

ब्लड शुगर को कंट्रोल करें

HbA1c को 7 से नीचे रखने का पूरा प्रयास करें

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