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बार-बार यूरिन आना डायबिटीज है या प्रोस्टेट कैंसर? डॉक्टर ने बताया पहचान का सही तरीका

बार-बार यूरिन आने के लक्षण को लेकर अक्सर लोग डायबिटीज या प्रोस्टेट कैंसर को लेकर कन्फ्यूजन में रहते हैं. उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट का आकार बढ़ने से भी पेशाब की समस्या हो सकती है. इस बारे में सफदरजंग अस्पताल और VMMC के यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रोफेसर डॉ. अनूप कुमार ने बताया है.

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प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट कैंसर

जिन लोगों को बार-बार यूरिन आने की समस्या होती है उनको सबसे बड़ा कन्फ्यूजन ये रहता है कि ये डायबिटीज है या प्रोस्टेट की कोई बीमारी तो नहीं है. कुछ लोग इसको प्रोस्टेट कैंसर से भी जोड़ते हैं, लेकिन इन लक्षणों के पीछे कारण क्या होता है. कब ये खतरनाक है.  यूरिन आने की समस्या शुगर लेवल बढ़ने के कारण है या प्रोस्टेट की बीमारी हो गई है? ये जानने के लिए हमने एक्सपर्ट से बात की है. 

सफदरजंग अस्पताल और VMMC के यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रोफेसर (डॉ.) अनूप कुमार ने दिल्ली में आयोजित 'सोसाइटी ऑफ़ रोबोटिक सर्जरी (SRS) इंडिया 2026' इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में  Aajtak.in को बताया कि डायबिटीज में ब्लड शुगर बढ़ने पर शरीर पर ज्यादा ग्लूकोज को यूरिन के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश करता है. इससे बार-बार और ज्यादा मात्रा में पेशाब आ सकता है.

वहीं पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट का साइज बढ़ने पर पेशाब की नली पर दबाव पड़ सकता है. इससे धार कमजोर होना, पेशाब शुरू करने में परेशानी, बार-बार पेशाब आना और रात में कई बार उठना जैसी दिक्कत हो सकती है.हालांकि, इन लक्षणों का मतलब सीधे प्रोस्टेट कैंसर नहीं है. प्रोस्टेट कैंसर और सामान्य प्रोस्टेट बढ़ने (BPH) के लक्षण कई बार एक जैसे हो सकते हैं. इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर कैंसर का पता नहीं लगाया जा सकता है. 

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कौन सी जांच से पता चलेगा कारण?

डॉ. अनूप कुमार के मुताबिक, मरीज की समस्या को समझने के लिए डॉक्टर उसकी हिस्ट्री और लक्षणों के साथ जरूरी जांच कराते हैं. इनमें PSA ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और ब्लड शुगर की जांच शामिल हो सकती है, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर प्रोस्टेट की जांच, अल्ट्रासाउंड या दूसरी जांच भी सलाह दे सकते हैं.

कम उम्र में हो रहा कैंसर

डॉक्टर ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में संक्रामक बीमारियों के मुकाबले डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी बीमारियों का बोझ बढ़ा है। कम उम्र में कैंसर के मामले भी सामने आ रहे हैंय इसके पीछे बदलती जीवनशैली, शराब और स्मोकिंग जैसे कई जोखिम कारक भूमिका निभा सकते हैं. अब कैंसर फैलाने वाले जीन बढ़ रहे हैं इस वजह से कम उम्र में ही कैंसर हो रहा है. 

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कैंसर का डर लगे तो भी घबराएं नहीं

डॉ. अनूप कुमार कहते हैं कि ऐसे लक्षणों में घबराने के बजाय समय पर यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. उनका कहना है कि भारत में इन बीमारियों के इलाज के लिए आधुनिक विकल्प उपलब्ध हैं और बीमारी की सही पहचान होने के बाद इलाज किया जा सकता है.

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