90 के दशक के तमिल सिनेमा के शौकीनों के लिए 'इधयम मुरली' नाम कोई नया नहीं है. दिवंगत एक्टर मुरली की आइकॉनिक फिल्म 'इधयम' में एक ऐसे प्रेमी का दर्द दिखाया गया था जो कभी अपनी भावनाएं जाहिर ही नहीं कर पाता और उसका प्यार एकतरफा ही रह जाता है. आज की भाषा में कहें तो एक 'इंट्रोवर्ट' लवर. अब कई दशकों बाद, उनके बेटे अथर्व अपने पिता की उसी विरासत को नए रंग-रूप में लेकर पर्दे पर आए हैं.
नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म 'इधयम मुरली' में अथर्व भी एक ऐसे ही शख्स के किरदार में हैं जो चाहकर भी दिल की बात जुबां पर नहीं ला पाता, लेकिन इस बार कहानी का अंदाज 90s के भारी-भरकम ड्रामे से हटकर थोड़ा हल्का-फुल्का और आज के 'जेन-जी' (Gen Z) दौर जैसा है. डायरेक्टर आकाश भास्करन ने पुरानी यादों को मॉर्डन रोमांस के साथ पेश करने की कोशिश की है.
क्या है फिल्म की कहानी?
कहानी की शुरुआत एक फ्लाइट से होती है, जहां इधया मुरली (अथर्व) अपने जिगरी दोस्तों के साथ न्यूयॉर्क से भारत लौट रहा है. उसकी शादी में महज 24 घंटे बचे हैं और सब बहुत जल्दबाजी में हैं. सफर के दौरान उन्हें सूर्या (फहाद फासिल) नाम का यात्री मिलता है. हालांकि सूर्या को दूसरों की बातें सुनने में कोई खास दिलचस्पी नहीं है, फिर भी इधया के दोस्त उसे अपनी कहानी सुनाने पर मजबूर कर देते हैं. यहीं से फ्लैशबैक में इधया की लव लाइफ का सफर शुरू होता है. कहानी पांच अलग-अलग टाइम पीरियड से गुजरती है, जिसमें चार अलग-अलग महिलाएं - बचपन का क्रश गीता मिस (जोनिता गांधी), पहला प्यार सामंथा (प्रीति मुकुंदन), कॉलेज गर्लफ्रेंड (कायादु लोहार) और मंगेतर (सरप्राइज कैमियो) उसकी जिंदगी में आती हैं. सस्पेंस इस बात का है कि अपने इमोशंस को दबाकर रखने वाला इधया आखिर किसे अपना सच्चा प्यार मानता है और क्या वह सही वक्त पर इजहार कर पाता है?
इधया को उसके अंकल थंगा (नटराजन सुब्रमण्यन) ने पाला-पोसा है. थंगा खुद एक ऐसे इंसान हैं जिन्होंने जिंदगी में कभी खुलकर अपनी भावनाएं जाहिर करना नहीं सीखा और उनकी इसी आदत का सबसे बुरा असर इधया की लव लाइफ पर पड़ता है. हालांकि, फिल्म में एक दिलचस्प बात यह है कि इधया का दिल टूटने पर वह 90 के दशक के प्रेमियों की तरह बिखर नहीं जाता, बल्कि काफी आसानी से मूव ऑन कर लेता है. भले ही फिल्म उसे पुरानी सोच का हिस्सा दिखाती है, लेकिन प्यार को लेकर उसका व्यावहारिक रवैया पूरी तरह से आज की पीढ़ी यानी जेन-जी जैसा नजर आता है.
फिल्म के साथ हो जाएगा कनेक्शन
एक एंटरटेनिंग रोमांटिक-कॉमेडी में जो कुछ होना चाहिए, वह सब इस फिल्म में मौजूद है. स्मार्ट और गुड-लुकिंग स्टारकास्ट, थमन का एनर्जेटिक म्यूजिक (सिर्फ BGM) क्योंकि गाने आपको याद नहीं रहेंगे. मनोज परमहंस व सीएच साई की खूबसूरत सिनेमैटोग्राफी फिल्म को विजुअली काफी रिच बनाती है. मेकर्स ने जानबूझकर फिल्म का माहौल बहुत हल्का-फुल्का रखा है ताकि कोई भी सीन बहुत ज्यादा इमोशनल या ड्रामैटिक न हो जाए. 90 के दशक के क्लासिक रोमांस के भारीपन को छोड़कर इसे मॉर्डन ट्रीटमेंट दिया गया है, जो देखने में काफी फ्रेश लगता है.
कहानी की लिखावट में कहां रह गई कमी?
हालांकि फिल्म का यही हल्का-फुल्का अंदाज इसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी साबित होता है. हीरो को उसका प्यार मिलेगा या नहीं, इस बात से दर्शक के तौर पर हम बहुत ज्यादा इमोशनल कनेक्ट महसूस नहीं कर पाते. जब उसे प्यार मिल भी जाता है, तो उस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल लगता है. फीमेल लीड्स के किरदार बेहद खूबसूरत हैं और वे पेशे से टीचर, नासा एस्ट्रोनॉट और डॉक्टर जैसी शानदार प्रोफेशनल्स हैं, लेकिन लिखावट के मामले में उन्हें बहुत सीमित दायरा दिया गया है. यह साफ नहीं हो पाता कि वे एक-दूसरे के प्यार में आखिर पड़े क्यों? यहां तक कि दोस्तों के किरदारों में भी कोई ऐसी खास बात नहीं गढ़ी गई है, जो उन्हें याद रखने लायक बनाए.
यहां देखें फिल्म का ट्रेलर
स्टार्स की परफॉर्मेंस और थिएटर मोमेंट्स
फिल्म की कमजोर स्क्रिप्ट को एक्टर्स अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से संभाले रखते हैं. फहाद फासिल एक बेहद साधारण से दिखने वाले सपोर्टिंग रोल में भी अपनी अदाकारी से जान फूंक देते हैं. क्लाइमेक्स में उनका एक सीन तो ऐसा है जो थिएटर में सीटी बजाने पर मजबूर कर देता है. यूट्यूबर सुधाकर अपनी कॉमिक टाइमिंग से हंसाने का काम बखूबी करते हैं. इसके अलावा, थमन का लगातार बजने वाला बैकग्राउंड स्कोर कहानी के ढीलेपन को काफी हद तक छुपा लेता है.
फिल्म भले ही थोड़ी लंबी और ज्यादा कसी हुई हो सकती थी, लेकिन समय-समय पर आने वाले मजेदार रेफरेंसेस और ट्विस्ट्स बोरियत नहीं होने देते. पुरानी 'इधयम' (1991) जहां एक तड़पते हुए प्रेमी के दुख और अनकहे प्यार के दर्द की कहानी थी, वहीं 'इधयम मुरली' एक खुशनुमा और परीकथा जैसी फील-गुड फिल्म है, जहां पूरी दुनिया हीरो को बार-बार मौके देती है. फिल्म में कमियां जरूर हैं, लेकिन अगर आप एक हल्की-फुल्की, सुखद मनोरंजन देने वाली फेयरीटेल जैसी लव स्टोरी देखना चाहते हैं, तो यह आपको निराश नहीं करेगी. अगर आप मिलेनियल्स हैं, तो आप इस फिल्म से पूरी तरह कनेक्ट हो जाएंगे, क्योंकि ये आपको आपकी ही कहानी लगेगी.