बॉलीवुड की चमक-दमक, बड़े सितारे, करोड़ों की फिल्में और पर्दे के पीछे की कहानियां हमेशा से लोगों को आकर्षित करती रही हैं. लेकिन इसी चमकती दुनिया का एक स्याह पहलू भी रहा है- अंडरवर्ल्ड का दखल, फिरौती की धमकियां और सितारों पर गोलियों की बौछार. कभी फिल्मी पार्टियों में गैंगस्टरों की मौजूदगी की चर्चा होती थी, तो कभी फिल्मों की फाइनेंसिंग और कास्टिंग पर दबाव बनाने के आरोप सामने आते थे. वक्त बदला, चेहरे बदले, लेकिन बॉलीवुड को निशाना बनाए जाने की खबरें पूरी तरह खत्म नहीं हुईं. एक्टर टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर मुंबई के जुहू इलाके में 18 अक्टूबर 2026 को हुई कथित फायरिंग ने एक बार फिर इसी पुराने सवाल को चर्चा में ला दिया है- आखिर बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का रिश्ता इतना उलझा कैसे?
हाजी मस्तान से दाऊद तक, कैसे बदला खेल?
मुंबई के अंडरवर्ल्ड और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के रिश्तों की चर्चा कई दशकों पुरानी है. 1960 और 1970 के दशक में हाजी मस्तान जैसे अपराधियों के फिल्मी हस्तियों के साथ मेलजोल और फिल्म जगत में पैसा लगाने की कहानियां सामने आती रहीं. बाद के वर्षों में दाऊद इब्राहिम और दूसरे आपराधिक नेटवर्कों का नाम भी फिल्मी दुनिया से जुड़े विवादों में आने लगा.
1990 के दशक में मामला और गंभीर होता गया. उस दौर में फिल्म निर्माताओं को धमकी देने, फिरौती मांगने, फिल्मी प्रोजेक्ट में पैसा लगाने और कलाकारों को लेकर दबाव बनाने जैसे आरोप सामने आए. हालांकि, हर फिल्मी शख्सियत का किसी गैंगस्टर से संबंध होने की बात सही नहीं है. कई मामलों में सितारे और निर्माता खुद धमकियों और हिंसा के शिकार बने.
गुलशन कुमार की हत्या ने हिला दी थी फिल्म इंडस्ट्री
12 अगस्त 1997 को टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की मुंबई के अंधेरी इलाके में एक मंदिर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था. संगीत की दुनिया में बड़ा नाम बन चुके गुलशन कुमार की हत्या ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या शोहरत और कामयाबी किसी कलाकार को अपराधियों के निशाने पर ला सकती है?
इसी दौर में फिल्म निर्माता मुकेश दुग्गल की 7 मार्च 1997 को अंधेरी स्थित उनके कार्यालय में गोली मारकर हत्या कर दी गई. जुलाई 1997 में 'त्रिदेव' और 'गुप्त' जैसी फिल्मों के निर्देशक राजीव राय पर भी हमला हुआ. उनके बॉडीगार्ड ने जवाबी गोलीबारी की और राजीव राय सुरक्षित बच निकले. उस हमले में अबू सलेम के गिरोह का नाम सामने आया था.
ये घटनाएं बताती हैं कि 1990 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री के कुछ बड़े नामों के लिए धमकियां महज फोन कॉल तक सीमित नहीं थीं.
राकेश रोशन पर चली गोली, बेटे ऋतिक को लेकर था विवाद?
21 जनवरी 2000 को फिल्ममेकर राकेश रोशन पर मुंबई के सांताक्रूज इलाके में उनके ऑफिस के बाहर गोलीबारी हुई. 'कहो ना... प्यार है' की कामयाबी के बाद हुए इस हमले में एक गोली उनके हाथ में लगी, जबकि दूसरी सीने को छूकर निकली. राकेश रोशन की जान बच गई.
बाद में राकेश रोशन ने इंटरव्यू में दावा किया कि अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग उनके बेटे ऋतिक रोशन को अपने सहयोगियों की फिल्म में काम करवाना चाहते थे. उनके मुताबिक, मांग के आगे न झुकने और शूटिंग की तारीखें न बदलने के विवाद के बाद उन पर हमला हुआ.
इसी दौर में फिल्म निर्माता मनमोहन शेट्टी पर दिसंबर 1999 में जानलेवा हमले की कोशिश हुई. वहीं, एक्टर दिनेश आनंद की 14 फरवरी 2001 को गोली मारकर हत्या कर दी गई. जुलाई 2002 में निर्देशक लॉरेंस डिसूजा के ऑफिस के बाहर भी फायरिंग हुई. पुलिस को शक था कि इसका मकसद फिल्म इंडस्ट्री में डर पैदा करना और वसूली के लिए दबाव बनाना था.
सलमान खान के घर पर फायरिंग, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम
सालों बाद बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड की धमकियों का मुद्दा फिर सुर्खियों में आया. इस बार केंद्र में थे सलमान खान. 14 अप्रैल 2024 को मुंबई के बांद्रा स्थित उनके घर के बाहर बाइक सवार हमलावरों ने कई गोलियां चलाईं. सलमान को कोई चोट नहीं आई.
इस मामले में मुंबई पुलिस ने जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क की भूमिका का आरोप लगाया और कई आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत कार्रवाई की. सलमान खान को लंबे समय से बिश्नोई गैंग की धमकियों की खबरें मिलती रही हैं. इस विवाद की चर्चा में काला हिरण शिकार मामला भी आता है, लेकिन किसी खास हमले का मकसद तय करने के लिए पुलिस जांच और कानूनी रिकॉर्ड को ही आधार मानना चाहिए.
सवाल यही है कि दशकों बाद भी फिल्मी सितारों को गैंगस्टर नेटवर्कों की धमकियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है? क्या वजह सिर्फ पुरानी दुश्मनी है, या इसके पीछे वसूली, दहशत फैलाने और अपना दबदबा दिखाने की कोशिश भी है?
दिशा पाटनी के घर के बाहर फायरिंग, फिर रोहित शेट्टी निशाने पर
सितंबर 2025 में उत्तर प्रदेश के बरेली में अभिनेत्री दिशा पाटनी के परिवार के घर के बाहर भी गोलीबारी की खबर सामने आई. इस घटना ने एक बार फिर फिल्मी हस्तियों और उनके परिवारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए.
इसके बाद 1 फरवरी 2026 को फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर फायरिंग हुई. मुंबई पुलिस ने अप्रैल 2026 में इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा नेटवर्क था और मकसद अपना दबदबा स्थापित करना था. हालांकि, रोहित शेट्टी को निशाना बनाने की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हुई थी.
अब टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग, क्या फिर लौट रहा है पुराना दौर?
18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में एक्टर टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग की घटना सामने आई. टाइगर इस घटना में सुरक्षित रहे, लेकिन गोलीबारी के दौरान एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर उमेश चौहान घायल हो गए. उन्हें पहले कूपर अस्पताल ले जाया गया और फिर आगे के इलाज के लिए KEM अस्पताल में भर्ती कराया गया. मेडिकल अपडेट के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे हैं.
इस मामले में पुलिस ने राजस्थान के कोटा में आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है. इसके पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया.
पार्टियों की चमक से गोलियों के साये तक
बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड की कहानी सिर्फ कुछ सनसनीखेज घटनाओं की कहानी नहीं है. यह उस दौर की भी याद दिलाती है, जब फिल्मों में पैसा लगाने, कलाकारों पर दबाव बनाने और वसूली के लिए धमकियां देने के आरोप इंडस्ट्री के लिए बड़ी चुनौती बन गए थे.
आज फिल्म इंडस्ट्री का कामकाज पहले से काफी बदल चुका है. कॉरपोरेट फाइनेंसिंग, बड़े प्रोडक्शन हाउस और सख्त सुरक्षा व्यवस्था ने कई पुराने समीकरणों को बदला है. इसके बावजूद सलमान खान और रोहित शेट्टी जैसे सितारों से जुड़े मामलों से लेकर टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग तक, ऐसी घटनाएं सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती हैं.
कभी बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के मेलजोल की कहानियां सुर्खियां बनती थीं, तो आज सवाल यह है कि सितारों और आम लोगों को गोलियों के खतरे से कैसे बचाया जाए. क्योंकि किसी भी हमले में निशाना भले कोई बड़ा स्टार हो, लेकिन उसकी चपेट में आने वाला आम इंसान भी हो सकता है.