BJP
INC
CPM
AITC
SUCI
JUP
IND
IND
Nota
NOTA
नंदकुमार, पूर्व मेदिनीपुर जले के तमलुक सबडिवीजन में एक ब्लॉक-लेवल का शहर है. यह एक जनरल कैटेगरी का असेंबली चुनाव क्षेत्र है और तमलुक लोकसभा चुनाव क्षेत्र का एक हिस्सा है. इसमें पूरा नंदकुमार कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक और तमलुक ब्लॉक की विष्णुबाढ़ I, पदुमपुर I और पदुमपुर II ग्राम पंचायतें शामिल हैं, जो इसे पूरी तरह से ग्रामीण इलाका बनाती हैं.
2011 में डिलिमिटेशन के बाद बनी इस सीट ने अब तक सिर्फ तीन असेंबली चुनाव लड़े हैं और यह तुरंत तृणमूल कांग्रेस का गढ़ बन गया है, और पार्टी ने अपनी शुरुआत से अब तक हुए तीनों चुनाव जीते हैं.
तृणमूल कांग्रेस ने सुकुमार डे को अपना कैंडिडेट बनाकर तीनों असेंबली चुनाव जीतकर नंदकुमार को अपना किला बना लिया है. उन्होंने 2011 में समाजवादी पार्टी के ब्रह्ममय नंदा को 11,867 वोटों से हराया, 2016 में लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के सपोर्ट वाले इंडिपेंडेंट सिराज खान को 10,866 वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी, और फिर 2021 में BJP के नीलांजन अधिकारी को 5,406 वोटों या 2.40 परसेंट से हराया.
खास बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस हर बार जीती है, लेकिन हर चुनाव के साथ मार्जिन धीरे-धीरे कम होता गया है, जिससे कोई बड़ा दबदबा नहीं दिखा.
नंदकुमार सेगमेंट में लोकसभा वोटिंग ट्रेंड्स में तृणमूल कांग्रेस का लगभग दबदबा साफ दिखता है, सिवाय 2024 के, जिसने पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी थी. 2009 में यह CPI(M) से 19,843 वोटों से आगे थी और 2014 में, बदलाव शुरू होने से पहले, 23,667 वोटों से आगे थी. BJP, जिसे 2009 और 2014 में सिर्फ 1.89 परसेंट और 5.62 परसेंट वोट मिले थे, 2019 में CPI(M) को पीछे छोड़कर मुख्य चैलेंजर बन गई, और तृणमूल अभी भी BJP से 15,358 वोटों से आगे थी. 2024 में पासा पलट गया जब BJP ने तृणमूल कांग्रेस पर 7,943 वोटों की बढ़त बना ली.
पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर ने 16 दिसंबर, 2025 को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत जो ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी किया था, उसमें नंदकुमार चुनाव क्षेत्र में कुल 2,63,607 वोटर थे. 2024 में रजिस्टर्ड 2,67,319 वोटरों के मुकाबले इस बार 3,712 वोटरों की मामूली कमी आई है. पिछले चुनावों में, 2021 में यह 2,53,829, 2019 में 2,44381, 2016 में 2,28,670 और 2011 में 1,92,113 था.
नंदकुमार चुनाव क्षेत्र में किसी एक समुदाय का दबदबा नहीं है, क्योंकि वोटरों की संख्या फैली हुई है. अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या 12.78 प्रतिशत और मुसलमानों की 13.50 प्रतिशत है. यह 100 प्रतिशत ग्रामीण चुनाव क्षेत्र बना हुआ है और इसकी रोल में कोई शहरी वोटर नहीं है. एक साफ बदलाव दिख रहा है क्योंकि नंदकुमार के वोटर असेंबली इलेक्शन में ज्यादा जोश दिखा रहे हैं, जबकि पार्लियामेंट्री इलेक्शन में वोटिंग में काफी कमी आई है. 2019 में 86.25 परसेंट और 2024 के लोकसभा इलेक्शन में 86.17 परसेंट के सबसे कम वोटिंग के मुकाबले, 2011 में 91.68 परसेंट, 2016 में 89.64 परसेंट और 2021 में 89.87 परसेंट वोटिंग ज्यादा हुई थी.
नंदकुमार, दक्षिणी पश्चिम बंगाल के तटीय इलाके के आम समतल मैदानों में बसा है, जहां नदी के जमाव से उपजाऊ मिट्टी बनी हुई है, जिससे धान की खेती मुख्य आर्थिक गतिविधि के तौर पर होती है, साथ ही मछली पकड़ना, सब्जी की खेती और छोटा व्यापार भी होता है. नदियों के पास होने की वजह से इस इलाके में ज्वार-भाटे का असर और मौसमी बाढ़ आती है. नंदकुमार से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे 116 से इंफ्रास्ट्रक्चर को फायदा होता है, जो कोलाघाट और हल्दिया को जोड़ता है, जबकि स्टेट हाईवे 4 दीघा और दूसरे इलाकों को जोड़ता है. तमलुक-दीघा लाइन पर नंदकुमार रेलवे स्टेशन रेल कनेक्टिविटी देता है. सबडिविजनल हेडक्वार्टर, तमलुक, लगभग 12 km दूर है, हल्दिया लगभग 26 km दूर है, राज्य की राजधानी कोलकाता, लगभग 90 km दूर है, क्योंकि एगरा और कोंटाई तट पर और आगे हैं. यह इलाका सुंदरबन डेल्टा के असर को अपनी तटीय नजदीकी, ज्वार-भाटे के पैटर्न, उपजाऊ डेल्टा और मछली पकड़ने और खेती से आर्थिक संबंधों के जरिए महसूस करता है, हालांकि नंदकुमार खुद मुख्य मैंग्रोव इलाकों के उत्तर में है.
नंदकुमार में अभी कड़े मुकाबले के संकेत दिख रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस 2011 से मजबूती से बनी हुई है, लेकिन मार्जिन लगातार कम होता गया है, और 2024 के लोकसभा में उलटफेर, जिसमें BJP ने बढ़त बनाई, बढ़ती चुनौती का संकेत है. लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन 2021 से पहले के अपने गठबंधन के कम शेयर मिलने के बाद भी हाशिए पर है. SIR के बाद 3,712 वोटरों की गिरावट छोटी लग सकती है, लेकिन अगर यह आखिरी लिस्ट में बनी रहती है, तो यह ऐसे कड़े मुकाबलों में निर्णायक साबित हो सकती है, खासकर हाल के मार्जिन के साथ जो हजारों में कम हैं.
हटाए गए नामों के बारे में अभी साफ जानकारी नहीं है, इसलिए खास ग्रुप्स पर कोई भी ज्यादा असर हालात को और बिगाड़ सकता है. इस उभरते बदलाव और कम बढ़त के साथ, नंदकुमार में 2026 का विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस और BJP के बीच बराबरी का दिख रहा है, जहां असरदार वोटर आउटरीच और कहानी की ताकत नतीजा तय कर सकती है, जो एक फोटो-फिनिश होने का वादा करता है.
(अजय झा)
Adhikary Nilanjan
BJP
Karuna Sankar Bhowmik
CPI(M)
Nota
NOTA
Saumitra Pattanayak
SUCI
Marphat Ali Khan
IND
Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
आज दस्तक में बात ईरान और अमेरिका के बीच अटकी और लटकी युद्धविराम वाली डील की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का शांति प्रस्ताव एक बार फिर ठुकरा दिया हैं, पेच ट्रंप की परमाणु प्रतिज्ञा पर फंसा है. ईरान होर्मुज खोजने को तैयार है लेकिन अपने परमाणु प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ समझौते को तैयार नहीं. अगर ईरान अपने परमाणु प्रोग्राम पर अड़ा है तो ट्रंप अपनी परमाणु प्रतिज्ञा पर. ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे, ईरान ने परमाणु प्रोग्राम की जिद नहीं छोड़ी तो अमेरिका एक बार फिर हमला कर सकता हैं. अब सवाल यही है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कैसे होंगे, क्या अमेरिका और ईरान की डील फंस गई, आगे क्या होगा?
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव का दूसरा चरण सत्ता की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है. 142 सीटों पर होने वाली वोटिंग में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम है, जहां कई सीटों पर उनकी संख्या पुरुषों से ज्यादा है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर के बीच सभी दल महिला वोटरों को साधने में जुटे हैं, जिससे यह चरण और भी दिलचस्प बन गया है.
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के एजेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि बीजेपी ने रामपुर और संभल में अपने एजेंट भेजे हैं, लेकिन इन एजेंट्स से कुछ भी हासिल नहीं होगा.
ग्यारह घंटे बाद पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान का रण शुरु हो जाएगा. 142 सीटों पर वोटिंग होगी. इसी से जुड़ी कई खबरों पर हम खबरदार करेंगे. बताएंगे कि क्या प्रधानमंत्री मोदी का गोल बंगाल में होगा और क्या सियासी भूगोल बदलेगा? इसी चुनाव में वोटिंग से पहले चर्चा यूपी के सिंघम और बंगाल के पुष्पा की हो रही है. जहां एक अधिकारी हैं जो कहते हैं कायदे में रहो. और दूसरे प्रत्याशी हैं जो कहते हैं झुकुगंगा नहीं. तीसरी खबर एम यानी महिला वोटर के शक्ति परीक्षण की है. जो आज यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों तरफ से किया गया है.
बंगाल चुनाव के बीच यूपी के IPS अफसर अजय पाल शर्मा का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को चेतावनी दे रहे हैं. अब सवाल ये पूछा जा रहा है कि एक पुलिस ऑब्जर्वर की जरूरत क्या होती है, वो क्या करते हैं, क्या वो किसी जगह जाकर वोटर के बीच में चेतावनी दे सकते हैं? आजतक से बातचीत में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस सभी सवालों का जवाब दिया. देखें वीडियो.
पश्चिम बंगाल में कल दूसरे चरण की वोटिंग होनी है. मतदान की बात करें तो पहले चरण में 93.19% वोटिंग हुई थी. ऐसे में राजनीतिक दलों में इसे लेकर भी भारी उठा-पटक देखने को मिल रही है.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल की रात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवानों ने घर में जबरन घुसकर महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ की. शिकायत में भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप है. पीड़िता ने निष्पक्ष जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामला चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है.
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि पुलिस पर्यवेक्षक ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा कर्मियों को धमकाया और बाद में उनके घर जाकर परिवार को डराने की कोशिश की. जहांगीर खान ने इसे चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि भाजपा की मदद के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए जा रहे हैं. इस बयान से क्षेत्र का चुनावी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है.