नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र पश्चिम मिदनापुर जिले के खड़गपुर उप-मंडल में स्थित है. यह सामान्य श्रेणी की सीट है और पूरे नारायणगढ़ सामुदायिक विकास खंड को शामिल करती है. इस विधानसभा क्षेत्र का गठन पहली बार 1951 में हुआ था. 1957 में यहां चुनाव नहीं हुए, लेकिन 1962 में यह सीट फिर से बहाल हुई. अब तक यहां 16 बार चुनाव हो चुके हैं.
शुरुआती वर्षों में नारायणगढ़ कांग्रेस का गढ़ माना जाता था और पार्टी ने यहां से चार बार जीत दर्ज की. लेकिन 1982 से तस्वीर बदल गई. राज्य में वाम मोर्चा की सरकार बनने के पाँच साल बाद, 1982 में सीपीआई(एम) ने यह सीट जीत ली और लगातार सात बार अपने कब्जे में रखी.
सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. सूर्यकांत मिश्र ने 1991 से 2011 तक लगातार पांच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. लेकिन 2016 में उन्हें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रद्युत कुमार घोष से 13,589 वोटों से हार का सामना करना पड़ा. यह वाम दलों के लिए एक बड़ा झटका था.
2021 के चुनाव में टीएमसी ने इस सीट पर फिर से जीत हासिल की. इस बार सुरजकांत अट्टा ने बीजेपी के राम प्रसाद गिरी को सिर्फ 2,416 वोटों से हराया.
बात जीत-हार की करें तो सीपीआई(एम) 7 बार, कांग्रेस 4 बार, टीएमसी 2 बार और किसान मजदूर प्रजा पार्टी, बंगला कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार 1-1 बार जीत हासिल की.
बीजेपी का असर यहां 2019 लोकसभा चुनाव में दिखाई दिया, जब दिलीप घोष ने मिदनापुर संसदीय सीट में इस क्षेत्र से 8,750 वोटों की बढ़त ली. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी की जून मलैया ने बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल को 10,614 वोटों से पीछे छोड़ दिया.
2021 विधानसभा चुनाव में नारायणगढ़ में 2,43,832 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें अनुसूचित जनजाति के मतदाता 22.5% और अनुसूचित जाति के मतदाता 18.52% थे. यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां 97% से अधिक मतदाता गांवों में रहते हैं. यहां मतदान का प्रतिशत हमेशा ऊंचा रहा है. 2016 में 90.96% और 2021 में 89.30% था.
नारायणगढ़ का भूभाग ज्यादातर सपाट और उपजाऊ है. पास से बहने वाली सुवर्णरेखा नदी यहां की खेती और पर्यावरण को प्रभावित करती है. धान, सब्जियां और दालें इस क्षेत्र की प्रमुख फसलें हैं. अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर आधारित है. थोड़े बहुत कुटीर उद्योग और छोटे कारोबार मौजूद हैं, लेकिन रोजगार के अवसर सीमित हैं. बड़ी संख्या में लोग काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं.
यहां आधारभूत सुविधाएं साधारण स्तर की हैं. सड़क, प्राथमिक स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था है. नारायणगढ़ नगर प्रशासनिक केंद्र है. जिला मुख्यालय मिदनापुर लगभग 40 किमी दूर है, जबकि राज्य की राजधानी कोलकाता करीब 150 किमी दूर स्थित है. आस-पास के अन्य कस्बों में खड़गपुर (35 किमी), दांतन (25 किमी) और केशियारी (30 किमी) शामिल हैं. झारखंड की सीमा भी पास ही है. पूर्वी सिंहभूम का चाकुलिया यहां से 45 किमी दूर है.
बीजेपी की हालिया मजबूती और 2021 में कड़े संघर्ष को देखते हुए, तृणमूल कांग्रेस के लिए 2026 का चुनाव आसान नहीं होगा. वहीं वाममोर्चा-कांग्रेस गठबंधन की वापसी की कोशिश भी समीकरण बिगाड़ सकती है. ऐसे में यह साफ है कि नारायणगढ़ विधानसभा सीट पर अगला चुनाव बहुकोणीय होगा और हर वोट अहम साबित हो सकता है.
(अजय झा)
Rama Prasad Giri
BJP
Tapas Sinha
CPI(M)
Shyama Pada Jana
SUCI
Nota
NOTA
Banamali Das
IND
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