BJP
INC
CPM
AITC
SUCI
IND
IND
IND
IND
Nota
NOTA
पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के बिष्णुपुर सबडिवीजन का एक गांव का शहर सोनामुखी, एक शेड्यूल्ड कास्ट रिजर्व्ड असेंबली सीट है. इस सीट का इतिहास डिलिमिटेशन कमीशन के तहत स्टेटस और सीमाओं में बार-बार बदलावों से जाना जाता है. सोनामुखी पहली बार 1952 में दो सीटों वाली सीट के तौर पर बना था और 2006 तक यह एक जनरल कैटेगरी की सीट रही. यह 1957 और 1962 में राज्य के चुनावी मैप से गायब हो गया था, लेकिन 1967 में इसे फिर से शामिल किया गया. आगे के बदलावों की वजह से 2008 में इसे शेड्यूल्ड कास्ट के लिए रिजर्व कर दिया गया, जो 2009 के लोकसभा चुनावों से लागू हुआ और 2011 के असेंबली चुनावों में पहली बार इसका इस्तेमाल किया गया. अभी, इस सीट में सोनामुखी म्युनिसिपैलिटी, सोनामुखी कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक और पत्रासेयर ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायतें शामिल हैं. सोनामुखी बिष्णुपुर लोकसभा सीट के तहत आने वाले सात हिस्सों में से एक है.
सोनामुखी अपनी शुरुआत से अब तक 15 असेंबली चुनाव देख चुका है. इस समय के ज्यादातर समय तक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने यह सीट अपने पास रखी, और 10 बार जीती, और उसकी आखिरी जीत 2016 में हुई थी. कांग्रेस तीन बार जीती है, जबकि तृणमूल कांग्रेस और BJP ने एक-एक बार जीत हासिल की है. सीट के रिजर्व स्टेटस ने अलग-अलग नतीजे दिए हैं क्योंकि रिजर्वेशन के बाद हुए तीन चुनावों में तीन अलग-अलग पार्टियों ने मामूली अंतर से जीत हासिल की है. तृणमूल कांग्रेस की दीपाली साहा ने 2011 का चुनाव जीता था, जिसमें उन्होंने CPI(M) के मनोरंजन चोंगरे को 7,289 वोटों से हराया था. CPI(M) 2016 में वापस आई, जिसमें अजीत रे ने दीपाली साहा को 8,719 वोटों से हराया. BJP ने हर चुनाव में उम्मीदवार बदलने का एक्सपेरिमेंट किया, और 2021 में उसे सफलता मिली जब दिबाकर घरामी ने तृणमूल के श्यामल संतरा को 10,888 वोटों से हराया.
सोनामुखी में BJP की बढ़त लोकसभा वोटिंग ट्रेंड्स में भी साफ है. 2016 के विधानसभा चुनाव में इसका वोट शेयर सिर्फ 8.08 परसेंट था, जो पार्लियामेंट्री चुनावों के दौरान बढ़ गया. 2019 में पार्टी तृणमूल कांग्रेस से 23,835 वोट या 12.30 परसेंट आगे थी, लेकिन 2024 में यह बढ़त घटकर 11,614 वोट या 5.60 परसेंट रह गई.
2024 में इस चुनाव क्षेत्र में 241,651 रजिस्टर्ड वोटर थे, जो 2021 में 233,059 और 2019 में 223,844 थे. अनुसूचित जाति के वोटर 42.84 परसेंट, अनुसूचित जनजाति के 3.15 परसेंट और मुस्लिम 10.90 परसेंट हैं. यह ज्यादातर ग्रामीण इलाका है, और इसके सिर्फ 10.10 परसेंट वोटर शहरी इलाकों में रहते हैं.
सोनामुखी में वोटिंग आम तौर पर अच्छी होती है, खासकर असेंबली इलेक्शन के दौरान, जहां 2011 में पार्टिसिपेशन 91.48 परसेंट तक पहुंच गया था, 2016 में थोड़ा कम होकर 89.05 परसेंट और 2021 में 89.23 परसेंट हो गया. लोकसभा इलेक्शन में 2019 में 87.05 परसेंट और 2024 में 86.16 परसेंट के थोड़े कम आंकड़े देखे गए हैं.
सोनामुखी नाम, जिसका इंग्लिश में मतलब है “सोने का मुंह”, माना जाता है कि यह इसके सिल्क इंडस्ट्री और पिछली सदियों से चले आ रहे लोकल ट्रेड से आई खुशहाली को दिखाता है. सोनामुखी अपने सिल्क प्रोडक्शन के लिए मशहूर है, खासकर सिल्क साड़ियों के लिए जो पूरे इलाके से खरीदारों को खींचती हैं. यह शहर अपने टेराकोटा मंदिरों के लिए भी जाना जाता है, जो कलात्मक और धार्मिक संरक्षण की विरासत को दिखाते हैं. ये मंदिर, अपने बारीक डिजाइन के साथ, जरूरी लैंडमार्क के तौर पर खड़े हैं.
इस इलाके की जमीन समतल और हल्की लहरदार है, जिसमें गंधेश्वरी जैसी छोटी नदियां बहती हैं, जो खेती और सिंचाई में मदद करती हैं. सोनामुखी की लोकल इकॉनमी खेती, हैंडलूम बुनाई, मिट्टी के बर्तन और रेशम के काम के साथ-साथ छोटे बिजनेस और हर हफ्ते लगने वाले बाजारों पर आधारित है. हेल्थ सेंटर, स्कूल और लोकल एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिस बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर देते हैं, हालांकि लोग खास सर्विस के लिए पास के शहरों पर निर्भर रहते हैं.
सोनामुखी, सबडिवीजन और लोकसभा सीट हेडक्वार्टर बिष्णुपुर से 22 km और जिला हेडक्वार्टर बांकुरा से लगभग 47 km दूर है. राज्य की राजधानी कोलकाता शहर से लगभग 130 km दूर है. पास के बर्धमान जिले में खंडघोष और पत्रसायर 16 से 19 km में पहुंचा जा सकता है, जबकि इंडस्ट्रियल शहर दुर्गापुर लगभग 50 km दूर है. सबसे पास का रेलवे स्टेशन सोनामुखी में है, जहां से बांकुरा और आगे कोलकाता तक सीधा रास्ता मिलता है.
जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव पास आ रहे हैं, सोनामुखी में BJP और तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होने वाला है, जिसमें BJP को थोड़ी बढ़त मिलेगी. BJP उम्मीद करेगी कि CPI(M)-कांग्रेस गठबंधन हाशिये से वापस आ जाए, क्योंकि इस गठबंधन में तृणमूल कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने और BJP के लिए मुकाबला आसान बनाने की क्षमता है. यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि सोनामुखी ने 2011 के चुनावों के बाद से किसी भी पार्टी को लगातार दो बार जीत नहीं दिलाई है.
(अजय झा)
Dr. Shyamal Santra
AITC
Ajit Ray
CPI(M)
Avranil Mandal
SUCI
Nota
NOTA
Asim Kumar Mandal
IND
Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
आज दस्तक में बात ईरान और अमेरिका के बीच अटकी और लटकी युद्धविराम वाली डील की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का शांति प्रस्ताव एक बार फिर ठुकरा दिया हैं, पेच ट्रंप की परमाणु प्रतिज्ञा पर फंसा है. ईरान होर्मुज खोजने को तैयार है लेकिन अपने परमाणु प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ समझौते को तैयार नहीं. अगर ईरान अपने परमाणु प्रोग्राम पर अड़ा है तो ट्रंप अपनी परमाणु प्रतिज्ञा पर. ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे, ईरान ने परमाणु प्रोग्राम की जिद नहीं छोड़ी तो अमेरिका एक बार फिर हमला कर सकता हैं. अब सवाल यही है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कैसे होंगे, क्या अमेरिका और ईरान की डील फंस गई, आगे क्या होगा?
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव का दूसरा चरण सत्ता की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है. 142 सीटों पर होने वाली वोटिंग में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम है, जहां कई सीटों पर उनकी संख्या पुरुषों से ज्यादा है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर के बीच सभी दल महिला वोटरों को साधने में जुटे हैं, जिससे यह चरण और भी दिलचस्प बन गया है.
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के एजेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि बीजेपी ने रामपुर और संभल में अपने एजेंट भेजे हैं, लेकिन इन एजेंट्स से कुछ भी हासिल नहीं होगा.
ग्यारह घंटे बाद पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान का रण शुरु हो जाएगा. 142 सीटों पर वोटिंग होगी. इसी से जुड़ी कई खबरों पर हम खबरदार करेंगे. बताएंगे कि क्या प्रधानमंत्री मोदी का गोल बंगाल में होगा और क्या सियासी भूगोल बदलेगा? इसी चुनाव में वोटिंग से पहले चर्चा यूपी के सिंघम और बंगाल के पुष्पा की हो रही है. जहां एक अधिकारी हैं जो कहते हैं कायदे में रहो. और दूसरे प्रत्याशी हैं जो कहते हैं झुकुगंगा नहीं. तीसरी खबर एम यानी महिला वोटर के शक्ति परीक्षण की है. जो आज यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों तरफ से किया गया है.
बंगाल चुनाव के बीच यूपी के IPS अफसर अजय पाल शर्मा का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को चेतावनी दे रहे हैं. अब सवाल ये पूछा जा रहा है कि एक पुलिस ऑब्जर्वर की जरूरत क्या होती है, वो क्या करते हैं, क्या वो किसी जगह जाकर वोटर के बीच में चेतावनी दे सकते हैं? आजतक से बातचीत में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस सभी सवालों का जवाब दिया. देखें वीडियो.
पश्चिम बंगाल में कल दूसरे चरण की वोटिंग होनी है. मतदान की बात करें तो पहले चरण में 93.19% वोटिंग हुई थी. ऐसे में राजनीतिक दलों में इसे लेकर भी भारी उठा-पटक देखने को मिल रही है.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल की रात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवानों ने घर में जबरन घुसकर महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ की. शिकायत में भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप है. पीड़िता ने निष्पक्ष जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामला चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है.
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि पुलिस पर्यवेक्षक ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा कर्मियों को धमकाया और बाद में उनके घर जाकर परिवार को डराने की कोशिश की. जहांगीर खान ने इसे चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि भाजपा की मदद के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए जा रहे हैं. इस बयान से क्षेत्र का चुनावी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है.