BJP
INC
AITC
RSP
SUCI
AJUP
RLJP
IND
Nota
NOTA
छतना पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक जनरल कैटेगरी का विधानसभा चुनाव क्षेत्र है. यह बांकुड़ा लोकसभा सीट बनाने वाले सात हिस्सों में से एक है. यह चुनाव क्षेत्र असल में 1951 में बना था और अब तक राज्य में हुए सभी 17 विधानसभा चुनावों में इसने हिस्सा लिया है. छतना 1952 और 1957 के चुनावों में दो सीटों वाली सीट के तौर पर शुरू हुआ था. 1952 में कांग्रेस और हिंदू महासभा जीतीं, जबकि 1957 में कांग्रेस ने दोनों सीटें जीत लीं. 1962 से छतना एक सीट वाली सीट बन गई. अगले 15 चुनावों में, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, जो CPI(M) के लेफ्ट फ्रंट का हिस्सा है, ने 1977 और 2006 के बीच लगातार सात बार जीत हासिल की. कांग्रेस ने चार बार यह सीट जीती. संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी 1969 में एक बार जीती थी.
2008 में इस चुनाव क्षेत्र की सीमाओं में बड़े पैमाने पर बदलाव किया गया. अब इसमें पूरा छतना कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक और इंदपुर ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायतें आती हैं. सीमा बदलने के बाद, छतना के वोटरों ने लगातार चुनावों में अलग-अलग पार्टियों को सपोर्ट करना शुरू कर दिया.
2011 के बाद से, छतना के वोटरों ने लगातार तीन विधानसभा चुनावों में तीन अलग-अलग पार्टियों को चुना है. तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में अपना खाता खोला, जब सुभासिस बटाब्याल ने RSP के अनंत बंधु मंडल को 7,764 वोटों से हराया. RSP 2016 में वापस आई, जब धीरेंद्र नाथ लायेक ने बटाब्याल को 2,417 वोटों से हराया. 2021 में वोटरों ने तेजी से बदलाव किया, जिसमें BJP के सत्यनारायण मुखोपाध्याय 7,164 वोटों से जीते, जबकि तृणमूल के बटाब्याल दूसरे नंबर पर रहे. RSP का वोट शेयर 2016 में 41.13 परसेंट से गिरकर 2021 में सिर्फ 4.93 परसेंट रह गया, कांग्रेस के सहयोगी होने के बावजूद. इसके उलट, BJP आगे बढ़ी, 2011 में 2.73 परसेंट और 2016 में 7.42 परसेंट से बढ़कर 2021 में 45.84 परसेंट हो गई.
BJP की बढ़त 2019 के लोकसभा चुनाव में ही दिख गई थी, जहां उसने तृणमूल कांग्रेस से 31,182 वोटों की बढ़त हासिल की थी, जो 16.90 परसेंट का मार्जिन है. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर से माहौल बदल गया, जिसमें तृणमूल इस सेगमेंट में 5,657 वोटों या 2.90 परसेंट से आगे हो गई. लेफ्ट फ्रंट की गिरावट जारी रही, CPI(M) को 2019 में 6.04 परसेंट और 2024 में 5.63 परसेंट वोट मिले, जो छतना में उसकी मामूली मौजूदगी को दिखाता है.
2024 में इस चुनाव क्षेत्र में 253,116 रजिस्टर्ड वोटर थे, जो 2021 में 242,770 और 2019 में 232,147 थे. अनुसूचित जाति सबसे बड़ा वोटर ग्रुप है, जो 35.18 परसेंट है, और अनुसूचित जनजाति भी 16.70 परसेंट के साथ काफी बड़ी संख्या में है. छतना ज्यादातर ग्रामीण सीट है, जहां सिर्फ 1.74 परसेंट शहरी वोटर हैं. यहां वोटर टर्नआउट अच्छा रहा, जो 2021 में 81.32 परसेंट के सबसे ज्यादा और 2024 में 77.77 परसेंट के सबसे कम लेवल पर पहुंच गया. नहीं तो हाल के साइकिल में पोलिंग 80 परसेंट के आस-पास रही है.
पुराने समय में, छतना कभी सामंतभूम नाम के पुराने राज्य की राजधानी थी, और इस जमाने के बचे हुए हिस्से, जिसमें खंडहर और स्थानीय कहानियां शामिल हैं, इस इलाके की पहचान को और बढ़ाते हैं. इस इलाके की पहचान ऊबड़-खाबड़ लैटेराइट इलाका है, जिसमें छोटी पहाड़ियां, लाल मिट्टी और चट्टानी उभार हैं. गंधेश्वरी समेत कई छोटी नदियां और नाले इस चुनाव क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, और मौसमी तालाब और पोखर सिंचाई के लिए पानी देते हैं. लोकल इकॉनमी खेती, मिट्टी के बर्तन, हैंडलूम बुनाई, जंगल की पैदावार और छोटे बिजनेस पर निर्भर करती है. बाजार, प्राइमरी हेल्थ सेंटर, गांव की सड़कें, बिजली, पीने के पानी तक पहुँच और रेल से संपर्क इसके इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ हैं.
छटना, बांकुड़ा शहर, जो जिला हेडक्वार्टर है, से लगभग 15 km दूर है. राज्य की राजधानी कोलकाता लगभग 230 km दूर है. बांकुरा जिले में बिष्णुपुर लगभग 40 km दूर है. पास के पुरुलिया जिले में झालदा लगभग 60 km दूर है. पड़ोसी राज्य झारखंड का धनबाद, छतना से 100 km से थोड़ा ज्यादा दूर है.
जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव पास आ रहे हैं, छतना बराबरी पर है. हाल के चुनावों में कम मार्जिन और बार-बार बदलाव का मतलब है कि तृणमूल कांग्रेस और BJP दोनों को हर वोट के लिए मुकाबला करना होगा. लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन की कमजोर हालत तृणमूल को अपने कोर सपोर्ट में बंटवारे का डर नहीं होने देती. इतनी करीबी लड़ाई वाली सीट पर हर बैलेट बहुत जरूरी हो सकता है, और नतीजा किसी भी तरफ जा सकता है. यह तो तय है कि छतना में एक और करीबी और कड़ा चुनावी मुकाबला होने वाला है.
(अजय झा)
Subasish Batabyal
AITC
Falguni Mukherjee
RSP
Nota
NOTA
Rabindranath Bouri
IND
Dinanath Chatterjee
IND
Bauri Dinabandhu
BMUP
Abir Chandra Mandal
IND
Sadananda Mandal
SUCI
Anath Bauri
IND
Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
आज दस्तक में बात ईरान और अमेरिका के बीच अटकी और लटकी युद्धविराम वाली डील की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का शांति प्रस्ताव एक बार फिर ठुकरा दिया हैं, पेच ट्रंप की परमाणु प्रतिज्ञा पर फंसा है. ईरान होर्मुज खोजने को तैयार है लेकिन अपने परमाणु प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ समझौते को तैयार नहीं. अगर ईरान अपने परमाणु प्रोग्राम पर अड़ा है तो ट्रंप अपनी परमाणु प्रतिज्ञा पर. ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे, ईरान ने परमाणु प्रोग्राम की जिद नहीं छोड़ी तो अमेरिका एक बार फिर हमला कर सकता हैं. अब सवाल यही है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कैसे होंगे, क्या अमेरिका और ईरान की डील फंस गई, आगे क्या होगा?
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव का दूसरा चरण सत्ता की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है. 142 सीटों पर होने वाली वोटिंग में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम है, जहां कई सीटों पर उनकी संख्या पुरुषों से ज्यादा है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर के बीच सभी दल महिला वोटरों को साधने में जुटे हैं, जिससे यह चरण और भी दिलचस्प बन गया है.
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के एजेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि बीजेपी ने रामपुर और संभल में अपने एजेंट भेजे हैं, लेकिन इन एजेंट्स से कुछ भी हासिल नहीं होगा.
ग्यारह घंटे बाद पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान का रण शुरु हो जाएगा. 142 सीटों पर वोटिंग होगी. इसी से जुड़ी कई खबरों पर हम खबरदार करेंगे. बताएंगे कि क्या प्रधानमंत्री मोदी का गोल बंगाल में होगा और क्या सियासी भूगोल बदलेगा? इसी चुनाव में वोटिंग से पहले चर्चा यूपी के सिंघम और बंगाल के पुष्पा की हो रही है. जहां एक अधिकारी हैं जो कहते हैं कायदे में रहो. और दूसरे प्रत्याशी हैं जो कहते हैं झुकुगंगा नहीं. तीसरी खबर एम यानी महिला वोटर के शक्ति परीक्षण की है. जो आज यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों तरफ से किया गया है.
बंगाल चुनाव के बीच यूपी के IPS अफसर अजय पाल शर्मा का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को चेतावनी दे रहे हैं. अब सवाल ये पूछा जा रहा है कि एक पुलिस ऑब्जर्वर की जरूरत क्या होती है, वो क्या करते हैं, क्या वो किसी जगह जाकर वोटर के बीच में चेतावनी दे सकते हैं? आजतक से बातचीत में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस सभी सवालों का जवाब दिया. देखें वीडियो.
पश्चिम बंगाल में कल दूसरे चरण की वोटिंग होनी है. मतदान की बात करें तो पहले चरण में 93.19% वोटिंग हुई थी. ऐसे में राजनीतिक दलों में इसे लेकर भी भारी उठा-पटक देखने को मिल रही है.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल की रात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवानों ने घर में जबरन घुसकर महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ की. शिकायत में भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप है. पीड़िता ने निष्पक्ष जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामला चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है.
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि पुलिस पर्यवेक्षक ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा कर्मियों को धमकाया और बाद में उनके घर जाकर परिवार को डराने की कोशिश की. जहांगीर खान ने इसे चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि भाजपा की मदद के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए जा रहे हैं. इस बयान से क्षेत्र का चुनावी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है.