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Agra District Profile: ताजमहल, पेठे और जूता उद्योग के लिए मशहूर आगरा की सियासत में क्या है खास

आगरा जिले की पहचान ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, पेठे और जूता उद्योग से है. उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इस जिले की अहम भूमिका है. यहां आगरा कैंट, आगरा नॉर्थ, आगरा ग्रामीण, आगरा साउथ, बाह, एत्मादपुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी और खेरागढ़ समेत नौ विधानसभा सीटें हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी. जानिए आगरा का राजनीतिक इतिहास और चुनावी समीकरण.

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आगरा जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें है (Photo: ITG)
आगरा जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें है (Photo: ITG)

आगरा की पहचान ताजमहल से है, लेकिन इस जिले की कहानी सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित नहीं है. यहां का पेठा देशभर में मशहूर है और जूता उद्योग भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देता है. पर्यटन, कारोबार और सामाजिक समीकरणों के साथ आगरा की राजनीति भी हमेशा चर्चा में रही है. जिले की नौ विधानसभा सीटों पर अलग-अलग इलाकों की अपनी पहचान और चुनावी परिस्थितियां हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने के लिए आगरा जिले को जानना जरूरी हो जाता है.

ताजमहल और पेठे से दुनिया भर में पहचान

आगरा का नाम आते ही सबसे पहले ताजमहल का ख्याल आता है. दुनिया के सात अजूबों में शामिल इस इमारत को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं. फतेहपुर सीकरी भी यहां की ऐतिहासिक विरासत का अहम हिस्सा है. जिले में कई दूसरी पुरानी इमारतें भी हैं, जिन्हें संरक्षित किया गया है. यहां का पेठा लोगों के बीच खासा लोकप्रिय है. आगरा आने वाले बहुत से पर्यटक इसे अपने साथ लेकर जाते हैं. वहीं, जूता उद्योग भी जिले की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यहां जूते बनाने वाली हजारों छोटी-बड़ी इकाइयां काम करती हैं. इनका कारोबार देश के बाजारों के साथ निर्यात से भी जुड़ा है.

आबादी और सामाजिक समीकरणों की अहम भूमिका

आगरा एक बड़ा और मिश्रित आबादी वाला जिला है. यहां जाटव, ब्राह्मण, ठाकुर, जाट और मुस्लिम समुदायों की मौजूदगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती है. हालांकि, हर विधानसभा क्षेत्र की सामाजिक बनावट एक जैसी नहीं है. स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की छवि और राजनीतिक दलों का जनाधार भी चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं. जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों की जरूरतें भी अलग-अलग हैं. शहरों में कारोबार, सड़क, यातायात और नागरिक सुविधाएं प्रमुख मुद्दे हो सकते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रहते हैं.

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आगरा जिले में नौ विधानसभा सीटें

आगरा जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं. आगरा कैंट,आगरा नॉर्थ, आगरा रूरल, आगरा साउथ, बाह, एत्मादपुर, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़ 

इन सीटों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां एक-दूसरे से अलग हैं. बाह का इलाका चंबल और यमुना के बीहड़ों के लिए जाना जाता है. वहीं, फतेहपुर सीकरी और खेरागढ़ जैसे क्षेत्रों की अपनी अलग ग्रामीण पहचान है. एत्मादपुर में भी अलग-अलग समुदायों की मौजूदगी चुनावी तस्वीर को प्रभावित करती है. बाह विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है. फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़ और एत्मादपुर में भी ठाकुर और ब्राह्मण समुदायों के साथ मल्लाह, कुशवाहा और जाटव मतदाता चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का दबदबा

आगरा कैंट सीट पर बीजेपी के डॉ. जीएस धर्मेश विजयी रहे. आगरा ग्रामीण सीट से बीजेपी की बेबी रानी मौर्य ने जीत दर्ज की. आगरा साउथ सीट पर योगेंद्र उपाध्याय ने जीत हासिल की, जबकि बाह सीट पर रानी पक्षालिका सिंह विजयी रहीं. आगरा नॉर्थ सीट पर पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने जीत दर्ज की. एत्मादपुर में बीजेपी के धर्मपाल सिंह को सफलता मिली. फतेहाबाद सीट पर छोटे लाल वर्मा विजयी रहे. फतेहपुर सीकरी से बीजेपी के बाबूलाल और खेरागढ़ से भगवान सिंह कुशवाहा ने चुनाव जीता.

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कभी बीएसपी का भी मजबूत आधार रहा

आगरा की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी का भी एक समय अच्छा प्रभाव रहा है. 2012 के विधानसभा चुनाव में इसका असर साफ दिखाई दिया था. उस चुनाव में जिले की नौ में से छह सीटों पर बीएसपी ने जीत दर्ज की थी. बीजेपी को दो और समाजवादी पार्टी को एक सीट मिली थी. इसके बाद जिले की राजनीति में बीजेपी का प्रदर्शन मजबूत होता गया. 2022 के चुनाव में पार्टी ने सभी नौ सीटों पर जीत हासिल की. यह नतीजा आगरा में बीजेपी की राजनीतिक स्थिति को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा.

आगरा की लोकसभा राजनीति का इतिहास

आगरा लोकसभा सीट पर भी अलग-अलग समय में कई प्रमुख नेताओं ने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई. वर्ष 1989 में अजय सिंह यहां से लोकसभा चुनाव जीते थे. इसके बाद बीजेपी के भगवान शंकर रावत ने तीन बार चुनाव जीतकर अपनी जगह बनाई. वह लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भी रहे. आगरा की राजनीति में अभिनेता और समाजवादी पार्टी के नेता राज बब्बर का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है. उन्होंने आगरा से लोकसभा चुनाव जीता था. बाद में परिसीमन के बाद उन्होंने फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़ा, जहां उन्हें बीएसपी की सीमा उपाध्याय से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद राज बब्बर फिरोजाबाद से चुनाव लड़े और वहां जीत हासिल की. आगरा लोकसभा सीट पर बीजेपी के रामशंकर कठेरिया ने भी लगातार दो बार जीत दर्ज की. वर्ष 2019 में पार्टी ने आगरा सीट से एसपी सिंह बघेल को उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीत गए. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी एसपी सिंह बघेल ने जीत हासिल की. वह केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं.

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