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महंगे घर, बढ़ता किराया और महंगाई... यूरोप में भड़क रहा है लोगों का गुस्सा

विरोध प्रदर्शनों ने सरकारों के सामने यह सवाल फिर खड़ा किया है कि विकास और बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच आम लोगों के लिए किफायती घर कैसे सुनिश्चित किए जाएं.

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यूरोप में किफायती घरों का संकट (Photo-ITG)
यूरोप में किफायती घरों का संकट (Photo-ITG)

यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई के बीच घर खरीदना और किराये पर रहना आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. महंगे मकान, बढ़ते किराये, कमाई के मुकाबले तेजी से बढ़ते खर्च और कमजोर पड़ती सार्वजनिक सेवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. इसी नाराजगी के बीच फ्रांस, इटली, बेल्जियम और पुर्तगाल में विरोध प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों में अलग-अलग देशों के मुद्दे अलग हैं, लेकिन आम लोगों की जेब पर बढ़ते दबाव और बेहतर जीवन की मांग एक साझा चिंता बनकर उभरी है.

यूरोपीय संघ के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में घरों की कीमतें पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 4.7 फीसदी बढ़ीं, जबकि किराये में 3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह दिखाता है कि आवास की लागत अब भी बढ़ रही है. यूरोपीय संघ के सामने सस्ते और किफायती घर उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है. 

पुर्तगाल में घरों की कीमतें दोगुनी, किराये ने बढ़ाई चिंता

यूरोप में आवास संकट की सबसे स्पष्ट तस्वीर पुर्तगाल में दिखाई दे रही है. राजधानी लिस्बन समेत बड़े शहरों में घर खरीदना और किराये पर रहना लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. 17 अक्टूबर को लिस्बन में हजारों लोग महंगाई, कम वेतन और घरों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ सड़कों पर उतरे. कुछ प्रदर्शनकारियों ने आवास की कमी और महंगे किराये के विरोध में सार्वजनिक जगह पर टेंट भी लगाए.

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रिपोर्ट के मुताबिक, पुर्तगाल में 2017 के बाद से घरों की कीमतें दोगुने से ज्यादा हो चुकी हैं, नए किरायेदारी समझौतों में किराये भी लगभग इसी तरह बढ़े हैं. ऐसे में युवाओं और कम आय वाले परिवारों के लिए शहरों में घर तलाशना कठिन हो गया है. लोगों की मांग है कि सरकार आवास की उपलब्धता और उसकी कीमतों पर ध्यान दे, ताकि आम कमाई वाले लोग भी शहरों में रह सकें.

फ्रांस में महंगाई और सरकारी खर्च में कटौती का विरोध

फ्रांस में 17 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे. शुरुआत में छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों की नाराजगी प्रमुख थी, लेकिन धीरे-धीरे महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट और प्रस्तावित बजट कटौती के खिलाफ गुस्सा भी प्रदर्शनों में शामिल हो गया. कई शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं हुईं. 

इटली और बेल्जियम में भी बढ़ते खर्च पर नाराजगी

इटली के मिलान, बोलोनिया, ट्यूरिन और दूसरे शहरों में भी महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए. यहां लोगों की चिंताओं में घरेलू खर्च, सार्वजनिक सेवाएं और बढ़ते बिल शामिल हैं. बड़े शहरों में घर खरीदने या किराये पर रहने की लागत का दबाव खासकर युवाओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.

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यूरोप के सामने किफायती आवास की बड़ी चुनौती

यूरोपीय संघ में घरों की कीमतों और किराये में लंबे समय से बढ़ोतरी देखी जा रही है. यूरोपीय संघ की परिषद के मुताबिक, 2015 के बाद से घरों की कीमतों में औसतन करीब 60 फीसदी वृद्धि हुई है. कई देशों में यह बढ़ोतरी इससे भी ज्यादा रही है. आवास पर होने वाला खर्च घरेलू बजट का बड़ा हिस्सा ले रहा है और कुछ लोगों के लिए समय पर किराया या होम लोन की किस्त चुकाना भी मुश्किल हो रहा है.

इसका असर केवल उन लोगों पर नहीं पड़ता जो घर खरीदना चाहते हैं, किरायेदार, नौकरी की तलाश में दूसरे शहर जाने वाले युवा, कम वेतन पाने वाले कर्मचारी और छोटे बच्चों वाले परिवार भी इससे प्रभावित होते हैं. जब आय के मुकाबले मकान और किराये का खर्च तेजी से बढ़ता है, तो खाने-पीने, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरतों के लिए बचने वाली रकम कम हो जाती है.

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