आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र ऐतिहासिक शहर आगरा के आस-पास के ग्रामीण इलाकों को कवर करता है, जहां उपजाऊ कृषि वाले गांव और शहर के बाहरी इलाकों में तेजी से फैलती बस्तियां साथ-साथ मौजूद हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित यह क्षेत्र पारंपरिक ग्रामीण जीवन और बढ़ते शहरीकरण के असर का मिला-जुला रूप दिखाता है. यह फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, जो इसे जिले के सबसे अहम ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में से एक बनाता है.
आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र को परिसीमन आयोग के 2008 के आदेश से बनाया गया था और यहां पहली बार 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान वोटिंग हुई थी, जिसके बाद 2012 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ. इसमें अकोला, बरौली अहीर और बिचपुरी के ग्रामीण सामुदायिक विकास ब्लॉक और ग्राम पंचायत क्षेत्र शामिल हैं, साथ ही अकोला, अजीजपुर, धनाउली और नैनना जाट जैसे जनगणना वाले कस्बे और गांव भी इसमें आते हैं, जिससे इस क्षेत्र को एक अलग तरह की शहरी-ग्रामीण मिली-जुली पहचान मिलती है.
बनने के बाद से आगरा ग्रामीण में तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. जहां पहला चुनाव बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने जीता, वहीं अगले दो चुनावों में BJP ने संगठन के विस्तार और विरोधी पार्टी के नेताओं को रणनीतिक रूप से अपनी पार्टी में शामिल करके यह सीट जीत ली. BSP के काली चरण सुमन ने 2012 का पहला चुनाव समाजवादी पार्टी की हेमलता दिवाकर को 18,846 वोटों से हराकर जीता था, जबकि BJP सिर्फ 11.33 प्रतिशत वोटों के साथ चौथे स्थान पर रही थी. 2017 के चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले जब BJP ने दिवाकर को पाला बदलने और अपनी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए मना लिया. यह कदम दोनों के लिए फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि दिवाकर ने मौजूदा BSP विधायक काली चरण सुमन को 65,296 वोटों के बड़े अंतर से हराया.
हालांकि, BJP को भरोसा नहीं था कि दिवाकर 2022 में यह सीट बचा पाएंगी. इसके बजाय, उन्होंने अपनी वरिष्ठ दलित नेता बेबी रानी मौर्य को मैदान में उतारा, जिन्होंने सक्रिय राजनीति में लौटने के लिए 2021 में उत्तराखंड के राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया था. यह दांव बहुत फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि मौर्य ने BSP उम्मीदवार किरण प्रभा केसरी को 76,608 वोटों के बड़े अंतर से हराकर BJP के लिए यह सीट बरकरार रखी. मौर्य को 137,310 वोट मिले, जबकि केसरी को 60,702 वोट मिले. BJP ने दिवाकर को पूरी तरह से किनारे नहीं किया. वह 2023 में आगरा की मेयर बनीं, जबकि बेबी रानी मौर्य अभी उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं.
BJP ने आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनावों के दौरान भी इसी तरह का रुख अपनाया. 2009 में पार्टी चौथे स्थान पर रही और उसे केवल 9.65 प्रतिशत वोट मिले, जबकि BSP ने कांग्रेस पार्टी पर सिर्फ 266 वोटों की मामूली बढ़त बनाई थी. 2014 में स्थिति पूरी तरह बदल गई, जब BJP ने BSP पर 48,302 वोटों की बढ़त बना ली. 2019 में यह बढ़त बढ़कर 79,024 वोट हो गई, लेकिन 2024 में इसमें भारी कमी आई. विधानसभा क्षेत्र में BJP उम्मीदवार राजकुमार चाहर को 110,699 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रामनाथ सिकरवार को 91,337 वोट मिले, जिससे BJP को 19,362 वोटों की बढ़त मिली.
जब से यह निर्वाचन क्षेत्र बना है, आगरा ग्रामीण में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 344,002 से बढ़कर 2017 में 392,467, 2019 में 408,936, 2022 में 427,896 और 2024 में 447,274 हो गई. मुख्य रूप से ग्रामीण इलाका होने के बावजूद, इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है, जबकि आम तौर पर शहरी इलाकों की तुलना में गांवों में मतदान प्रतिशत अधिक होता है. 2012 में वोटिंग 58.37 प्रतिशत, 2017 में 63.71 प्रतिशत, 2019 में 61.35 प्रतिशत, 2022 के विधानसभा चुनाव में 61.07 प्रतिशत और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान 56.17 प्रतिशत रही.
आगरा ग्रामीण एक हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां अनुसूचित जातियां सबसे प्रभावशाली चुनावी समूह हैं. अनुसूचित जातियों की आबादी कुल मतदाताओं का लगभग 26.93 प्रतिशत है, जिनमें जाटव सबसे बड़ा वर्ग हैं. मुसलमानों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम है, जो अनुमानित रूप से पांच से आठ प्रतिशत मतदाता हैं. अनुसूचित जातियों के अलावा, जाट, राजपूत (ठाकुर), कुशवाहा, ब्राह्मण और कई अन्य पिछड़ी जातियां भी चुनावी नतीजों को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार, आगरा ग्रामीण में 75.96 प्रतिशत ग्रामीण मतदाता और 24.04 प्रतिशत शहरी मतदाता हैं, हालांकि आगरा के आसपास तेजी से हो रहे शहरीकरण ने इन वर्षों में इस संरचना को बदल दिया होगा.
हालांकि आगरा ग्रामीण एक अपेक्षाकृत नया विधानसभा क्षेत्र है, लेकिन जिस क्षेत्र को यह कवर करता है, वह सदियों से आगरा के इतिहास से गहराई से जुड़ा रहा है. आगरा के आसपास के गांवों से मुगल राजधानी को अनाज, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और अन्य जरूरी चीजें मिलती थीं, जबकि महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर स्थित बस्तियां शाही शहर के नजदीक होने के कारण समृद्ध हुईं. मुगल साम्राज्य के पतन के बाद, यह क्षेत्र ब्रिटिश प्रशासन के अधीन आ गया और धीरे-धीरे एक कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ जो बढ़ते शहरी केंद्र की जरूरतों को पूरा करता था.
आजादी के बाद, सिंचाई, सड़कों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार ने इस इलाके का कायापलट कर दिया. आगरा के पास होने की वजह से यहां तेजी से शहरीकरण हुआ है. कई गांवों में रिहायशी कॉलोनियां, शिक्षण संस्थान, गोदाम और छोटे उद्योग बने हैं. इसके बावजूद, खेती यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है और इलाके के सामाजिक और आर्थिक स्वरूप पर इसका गहरा असर है.
यमुना बेसिन के उपजाऊ मैदानी इलाकों में बसा 'आगरा ग्रामीण' (Agra Rural) इलाका ज्यादातर समतल है, जो खेती के लिए बहुत अच्छा है. यहां गेहूं, धान, सरसों, आलू और सब्जियां मुख्य फसलें हैं, जबकि डेयरी फार्मिंग से भी अच्छी-खासी अतिरिक्त कमाई होती है. आगरा के पास होने से ट्रांसपोर्ट सर्विस, लॉजिस्टिक्स, रिटेल व्यापार, निर्माण कार्यों और छोटे पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा मिला है. यहां के कई लोग रोज काम के लिए शहर आते-जाते हैं.
इस इलाके में आगरा-जयपुर हाईवे, आगरा-ग्वालियर रोड और स्टेट हाईवे व जिला सड़कों के बड़े नेटवर्क के जरिए अच्छी सड़क कनेक्टिविटी है. यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे तक यहां के कई हिस्सों से आसानी से पहुंचा जा सकता है, जिससे नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) और मध्य उत्तर प्रदेश से कनेक्टिविटी मजबूत हुई है. आगरा कैंट, आगरा फोर्ट और राजा की मंडी यहां के सबसे पास के बड़े रेलवे स्टेशन हैं, जबकि आगरा एयरपोर्ट से सीमित हवाई कनेक्टिविटी मिलती है. जेवर में चालू होने वाले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी इस इलाके की लंबे समय की आर्थिक और ट्रांसपोर्ट संभावनाओं के मजबूत होने की उम्मीद है.
आगरा ग्रामीण इलाका आगरा शहर से लगभग 15 किमी, फतेहपुर सीकरी से करीब 35 किमी, फिरोजाबाद से लगभग 45 किमी, मथुरा से करीब 60 किमी और पड़ोसी राज्य राजस्थान के भरतपुर से लगभग 70 किमी दूर है. यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए ग्रेटर नोएडा लगभग 170 किमी, नोएडा करीब 185 किमी और नई दिल्ली लगभग 220 किमी दूर है. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से राज्य की राजधानी लखनऊ यहां से लगभग 330 किमी दूर है.
बीजेपी ने 2014 के बाद हुए सभी पांच बड़े चुनावों में जीत हासिल करके और बढ़त बनाकर आगरा ग्रामीण में खुद को एक मजबूत राजनीतिक ताकत के तौर पर स्थापित किया है. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी बढ़त में आई भारी कमी ने पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले नए सिरे से राजनीतिक लामबंदी की जरूरत के प्रति सचेत कर दिया होगा. उम्मीद है कि BJP ऊंची जातियों, गैर-यादव OBC और अनुसूचित जातियों के एक बड़े हिस्से के समर्थन पर भरोसा करेगी. अगर बेबी रानी मौर्य को फिर से मैदान में उतारा जाता है, तो पार्टी को यह भी उम्मीद होगी कि उनकी साथी जाटव वोटरों के बीच उनकी बड़ी दलित नेता वाली छवि उन्हें काफी समर्थन बनाए रखने में मदद करेगी. वहीं, विपक्ष को BJP की कम हुई संसदीय बढ़त से हिम्मत मिलेगी और वे इसे विधानसभा के कड़े मुकाबले में बदलने की कोशिश करेंगे। इसके बावजूद, आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव में BJP को साफ बढ़त हासिल है.
(अजय झा)
Kiran Prabha Keshari
BSP
Mahesh Kumar
RLD
Upendra Singh
INC
Arun Kumar Katheria
AAAP
Nota
NOTA
Balvir
RSPS
Suresh Chand Varun
IND
Rajendra Singh
IND
Pankaj Kumar
IND
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