एत्मादपुर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा के पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित एक सब-डिविजन लेवल का शहर है. आगरा जिले का हिस्सा होने के नाते, यह शहर उस इलाके में आता है जो 16वीं और 17वीं सदी में मुगल साम्राज्य का मुख्य केंद्र था और ऐतिहासिक शहर आगरा के पास होने का इसे आज भी फायदा मिलता है. व्यस्त दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर पर स्थित होने की वजह से एत्मादपुर धीरे-धीरे एक अहम पेरी-अर्बन (शहर के बाहरी इलाके वाला) केंद्र बन गया है, जहां खेती, व्यापार और शहरी विस्तार साथ-साथ चलते हैं.
एत्मादपुर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है जिसे 1956 में परिसीमन आयोग के आदेश से बनाया गया था. यह आगरा लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है और इसमें पूरी एत्मादपुर तहसील के साथ-साथ आगरा नगर निगम के सात वार्ड भी शामिल हैं, जिससे इसे एक खास अर्ध-शहरी पहचान मिलती है, जिसमें ग्रामीण गाँव और तेजी से फैलते शहरी इलाके दोनों शामिल हैं.
एत्मादपुर का चुनावी इतिहास कुछ अलग तरह का रहा है. इस क्षेत्र में पहली बार 1957 में चुनाव हुए थे, लेकिन 1962 और 1969 के बीच हुए अगले तीन विधानसभा चुनावों के दौरान इसका अस्तित्व खत्म हो गया था, और फिर 1974 के चुनावों से पहले इसे फिर से बहाल किया गया. कुल मिलाकर, यहां 14 विधानसभा चुनाव हुए हैं. कांग्रेस पार्टी ने 1957 में पहला चुनाव जीता था और उसे यह सीट दोबारा जीतने के लिए 1980 तक इंतजार करना पड़ा, जो यहां उसकी आखिरी जीत भी साबित हुई. बहुजन समाज पार्टी (BSP) इस क्षेत्र की सबसे सफल पार्टी रही है, जिसने तीन बार यह सीट जीती है. BJP और जनता दल ने दो-दो बार जीत हासिल की है, जबकि भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, लोक दल, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने एक-एक बार जीत हासिल की है. लंबे समय तक 'स्विंग कॉन्स्टिट्यूएंसी' माने जाने वाले एत्मादपुर में हाल के वर्षों में वोटिंग पैटर्न में ज्यादा स्थिरता देखी गई है, जिसमें BSP ने लगातार दो चुनाव जीते और उसके बाद BJP ने लगातार दो जीत हासिल कीं.
BSP ने 2007 में पहली बार यह सीट जीतने के बाद 2012 में भी इसे अपने पास बनाए रखा. उसके उम्मीदवार धर्मपाल सिंह ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रेम सिंह बघेल को 8,504 वोटों से हराया, जबकि BJP तीसरे स्थान पर रही. BJP ने 2017 में BSP से यह सीट छीनकर एत्मादपुर में अपना खाता खोला. इसके उम्मीदवार राम प्रताप सिंह ने मौजूदा BSP विधायक धर्मपाल सिंह को 47,255 वोटों के अंतर से हराया था. 2022 के चुनाव से पहले, धर्मपाल सिंह BJP में शामिल हो गए, जिसके कारण पार्टी ने अपने मौजूदा विधायक राम प्रताप सिंह को दोबारा टिकट नहीं दिया और उनकी जगह पूर्व BSP विधायक को मैदान में उतारा. यह रणनीति काम कर गई और धर्मपाल सिंह ने लगभग उतने ही अंतर (47,924 वोट) से BJP के लिए यह सीट बरकरार रखी. उन्हें 146,603 वोट मिले, जबकि BSP उम्मीदवार प्रबल प्रताप सिंह को 98,679 वोट मिले.
एत्मादपुर में BJP का उभार लोकसभा चुनावों में भी साफ दिखा है. 2009 में, इस विधानसभा क्षेत्र में BSP, BJP से 1,862 वोटों के मामूली अंतर से आगे थी. 2014 में हालात पूरी तरह बदल गए, जब मोदी लहर के दम पर BJP ने BSP पर 64,974 वोटों की बढ़त बना ली और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2019 में यह BSP से 52,754 वोटों और 2024 में समाजवादी पार्टी से 78,151 वोटों से आगे रही. पिछले संसदीय चुनाव में, BJP उम्मीदवार सत्य पाल सिंह बघेल को इस क्षेत्र में 143,178 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सुरेश चंद कर्दम को 65,027 वोट मिले.
एत्मादपुर में मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या 2012 में 361,756 से बढ़कर 2017 में 417,210, 2019 में 431,120, 2022 में 444,849 और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान 466,585 हो गई. इस दौरान ज्यादातर समय मतदाताओं की भागीदारी काफी ज्यादा रही, लेकिन पिछले संसदीय चुनाव में इसमें गिरावट आई. 2012 में वोटिंग प्रतिशत 65.23% था, जो 2017 में बढ़कर 68.13% हो गया, 2019 में घटकर 63.67% रह गया, 2022 के विधानसभा चुनाव में फिर से बढ़कर 65.20% हुआ और 2024 में गिरकर 58.22% हो गया.
एत्मादपुर हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी एक अहम अल्पसंख्यक समूह है. हिंदुओं में ठाकुर (राजपूत), बघेल और ब्राह्मण प्रमुख सामाजिक समूह हैं. अनुसूचित जातियों (जिनमें जाटव मुख्य समूह हैं) की आबादी कुल मतदाताओं का लगभग 22.81% है और चुनावी नतीजों में इनकी अहम भूमिका रहती है. यहां की आबादी मिली-जुली है, 62.70% मतदाता ग्रामीण इलाकों में और 37.30% शहरी केंद्रों में रहते हैं.
एत्मादपुर का इतिहास मुगल काल से जुड़ा है और इसका नाम मिर्जा गियास बेग के नाम पर पड़ा है, जिन्हें उनके खिताब 'एतिमाद-उद-दौला' से ज्यादा जाना जाता है. वे सम्राट जहांगीर के दरबार में एक वरिष्ठ दरबारी थे और महारानी नूरजहां के पिता थे. यह इलाका बड़े आगरा क्षेत्र का हिस्सा था, जो अपने सुनहरे दौर में मुगल साम्राज्य की राजधानी और मुख्य केंद्रों में से एक था.
आगरा के पास होने की वजह से एत्मादपुर को शाही राजधानी की व्यावसायिक और प्रशासनिक गतिविधियों का फायदा मिला. यमुना बेसिन के उपजाऊ मैदानों ने खेती में मदद की, जबकि इस इलाके से गुजरने वाले व्यापारिक मार्गों ने इसे उत्तर भारत के अहम शहरी केंद्रों से जोड़ा.
मुगल सत्ता के कमजोर होने के बाद, यह इलाका ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और एक प्रशासनिक उप-मंडल के रूप में विकसित हुआ. आजादी के बाद, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और पास के शहर आगरा के विस्तार ने इस कस्बे की तरक्की में योगदान दिया. आज, एत्मादपुर एक महत्वपूर्ण तहसील मुख्यालय है और शहरी आगरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों के बीच एक कड़ी के रूप में काम करता है.
एत्मादपुर, आगरा जिले के पूर्वी हिस्से में यमुना बेसिन के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में स्थित है. यमुना नदी इस निर्वाचन क्षेत्र के दक्षिण में बहती है और ऐतिहासिक रूप से इस पूरे इलाके में खेती-बाड़ी में मददगार रही है. यहां की जमीन ज्यादातर समतल है और मिट्टी उपजाऊ है, जो खेती के लिए बहुत अच्छी है.
खेती-बाड़ी यहां की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है. यहां गेहूं, धान, सरसों, आलू और सब्जियों की बड़े पैमाने पर खेती होती है. साथ ही, आगरा के पास होने का भी इस इलाके को फायदा मिलता है. यहां के बहुत से लोग व्यापार, ट्रांसपोर्ट, छोटे पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और खेती से अलग दूसरे कामों में लगे हुए हैं. आगरा की टूरिज्म-आधारित अर्थव्यवस्था का असर भी इस इलाके के कुछ हिस्सों में दिखता है.
एत्मादपुर में सड़क और रेल कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है. नेशनल हाईवे 19, जिसे पहले ग्रांड ट्रंक रोड के नाम से जाना जाता था. इस इलाके से होकर गुजरता है और इसे आगरा, कानपुर, दिल्ली और कोलकाता से जोड़ता है. एत्मादपुर रेलवे स्टेशन से पास के शहरी इलाकों के लिए ट्रेनें मिलती हैं, जबकि लंबी दूरी की मुख्य ट्रेनें आगरा कैंट और आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशनों से उपलब्ध हैं.
एत्मादपुर, आगरा से लगभग 20 किमी, टूंडला से करीब 35 किमी, फिरोजाबाद से लगभग 45 किमी, मथुरा से करीब 70 किमी, नई दिल्ली से लगभग 220 किमी, राज्य की राजधानी लखनऊ से करीब 274 किमी और कानपुर से लगभग 290 किमी दूर स्थित है.
कई दशकों तक एत्मादपुर अपनी बदलती राजनीतिक निष्ठाओं के लिए जाना जाता था. यहां कोई भी एक पार्टी लंबे समय तक अपना दबदबा नहीं बना पाई. हालांकि, पिछले दशक में यह ट्रेंड कमजोर होता दिख रहा है. 2014 के बाद हुए हर चुनाव में बीजेपी सबसे आगे रही है. उसने पिछले दो विधानसभा चुनाव जीते हैं और लगातार तीन लोकसभा चुनावों में बड़ी बढ़त हासिल की है.
बीजेपी के पक्ष में जो बात सबसे खास है, वह सिर्फ उसकी लगातार जीत ही नहीं, बल्कि जीत का बड़ा अंतर भी है. विधानसभा चुनावों में 47,000 से ज्यादा वोटों से लगातार जीत और संसदीय चुनावों में बड़ी बढ़त ने पार्टी को इस सीट पर एक साफ ढांचागत फायदा दिया है. यहां कांग्रेस का असर बहुत कम है, जबकि समाजवादी पार्टी अभी भी अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए संघर्ष कर रही है. नतीजतन, हाल के वर्षों में मुख्य मुकाबला अक्सर इस बात पर रहा है कि BJP को चुनौती देने वाला मुख्य दावेदार कौन बनेगा, न कि इस बात पर कि उसे कौन हरा सकता है.
जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश 2027 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है, एत्मादपुर में BJP को साफ बढ़त मिलती दिख रही है. हालांकि चुनावी राजनीति शायद ही कभी एक जैसी रहती है, लेकिन पिछले दशक में पार्टी की लगातार जीत और बड़े अंतर ने उसे मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है. विपक्ष के लिए इस ट्रेंड को पलटने के लिए सिर्फ मौजूदा सरकार के खिलाफ नाराजगी (एंटी-इनकंबेंसी) काफी नहीं होगी. उन्हें एक ऐसे सामाजिक और राजनीतिक गठबंधन की जरूरत होगी जो इस सीट पर BJP के मजबूत जनाधार का मुकाबला कर सके.
(अजय झा)
Praval Pratap Singh
BSP
Dr.virendra Singh Chauhan
SP
Nota
NOTA
Shivanidevi Devi
INC
Shailendra Pal Singh
IND
Shiv Charan Lal
IND
Sumit Singh
AAAP
Maha Veer
IND
Rakesh Kumar Gupta
RVyP
Sunil Ojha
BSRD
Vinod Singh
PECP
Satish
BMUP
Kapil Gautam
IND
Dr. Anil Kumar Singh
IND
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