आगरा कैंट, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा का एक अहम हिस्सा है. इसकी पहचान 19वीं सदी की शुरुआत में बने ब्रिटिश-कालीन बड़े मिलिट्री छावनी से जुड़ी है. देश की सबसे पुरानी छावनियों में से एक होने के साथ-साथ, यह एक महत्वपूर्ण मिलिट्री स्टेशन भी है और साथ ही घनी आबादी वाला शहरी निर्वाचन क्षेत्र भी है, जिसमें रिहायशी इलाके, कमर्शियल प्रतिष्ठान और रक्षा ठिकाने शामिल हैं.
आगरा कैंट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है और आगरा लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. यह निर्वाचन क्षेत्र 1967 के विधानसभा चुनावों से पहले एक सामान्य सीट के तौर पर बनाया गया था, लेकिन बाद में परिसीमन आयोग के 2008 के आदेश के तहत इसकी सीमाएं बदली गईं और इसे अनुसूचित जाति समुदाय के लिए आरक्षित कर दिया गया. अब इसमें आगरा कैंटोनमेंट बोर्ड का पूरा इलाका और आगरा नगर निगम के 21 वार्ड शामिल हैं, जिससे यह पूरी तरह से शहरी निर्वाचन क्षेत्र बन गया है.
आगरा कैंट की एक खास बात यह रही है कि यहां लंबे समय तक एक ही राजनीतिक पार्टी को बार-बार समर्थन मिलता रहा है. इसके बनने के बाद से हुए 15 विधानसभा चुनावों में केवल तीन पार्टियां ही यह सीट जीत पाई हैं. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने छह-छह बार जीत हासिल की है, जबकि बहुजन समाज पार्टी (BSP) तीन बार जीती है. शुरुआती दौर में इस क्षेत्र पर कांग्रेस का दबदबा था, जिसने 1967 और 1985 के बीच लगातार छह चुनाव जीते. इसके बाद BJP ने लगातार चार जीत हासिल कीं, लेकिन फिर BSP ने लगातार तीन जीत के साथ BJP के इस सिलसिले को रोक दिया. बाद में BJP ने फिर से इस सीट पर कब्जा किया और लगातार दो जीत हासिल करके अपनी पकड़ मजबूत की.
2002 और 2007 में BSP की जीत खास तौर पर उल्लेखनीय थी क्योंकि उसने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे और अपनी 'सोशल इंजीनियरिंग' रणनीति के तहत अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं को सफलतापूर्वक एक साथ लाने में कामयाबी हासिल की थी. 2008 में इस सीट के अनुसूचित जाति समुदाय के लिए आरक्षित होने के कारण BSP को वह प्रयोग छोड़ना पड़ा, हालांकि शुरू में उसका काफी समर्थन आधार बना रहा। 2012 में, BSP के गुटियारी लाल दुवेश ने BJP उम्मीदवार गिर्राज सिंह धर्मेश को 6,415 वोटों से हराकर पार्टी के लिए लगातार तीसरी बार जीत हासिल की. 2017 में राजनीतिक माहौल में बड़ा बदलाव आया जब BJP ने BSP से यह सीट छीन ली. गिर्राज सिंह धर्मेश ने BSP के मौजूदा विधायक गुटियारी लाल दुवेश को 46,325 वोटों के अंतर से हराया. 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने अपनी स्थिति और मजबूत की, जब धर्मेश ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कुंवर चंद वकील को 48,697 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी. धर्मेश को 117,796 वोट मिले, जबकि वकील को 69,099 वोट मिले. वहीं BSP तीसरे स्थान पर खिसक गई.
लोकसभा चुनावों के दौरान आगरा कैंट विधानसभा क्षेत्र में भी ऐसा ही राजनीतिक बदलाव देखने को मिला. 2009 में, BSP BJP से 5,752 वोटों से आगे थी. 2014 के आम चुनाव में BJP ने इस ट्रेंड को पलट दिया और तब से अपनी बढ़त बनाए रखी है. उसने 2014 में BSP पर 44,436 वोटों की और 2019 में 21,370 वोटों की बढ़त बनाई. 2024 तक, समाजवादी पार्टी ने BJP के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर BSP की जगह ले ली थी, लेकिन सत्ताधारी पार्टी ने फिर भी 37,642 वोटों की अच्छी-खासी बढ़त बनाए रखी. इस विधानसभा क्षेत्र में BJP उम्मीदवार सत्य पाल सिंह बघेल को 113,161 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सुरेश चंद कर्दम को 75,519 वोट मिले.
पिछले दशक में आगरा कैंट में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या 2012 में 383,405 से बढ़कर 2017 में 427,525, 2019 में 444,540, 2022 में 467,201 और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान 481,327 हो गई. हालांकि, कई शहरी निर्वाचन क्षेत्रों की तरह, आगरा कैंट में भी मतदाताओं की भागीदारी लगातार कम रही है. 2012 में वोटिंग प्रतिशत 54.45% था, जो 2017 में बढ़कर 59.14% हो गया, फिर 2019 में घटकर 54.20% और 2022 में 53.93% हो गया, और अंत में 2024 के संसदीय चुनाव के दौरान यह गिरकर 47.93% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया.
आगरा कैंट एक हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी कुल मतदाताओं का अनुमानित 15 से 20 प्रतिशत है. अनुसूचित जातियां यहां का सबसे बड़ा सामाजिक समूह हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 25.83 प्रतिशत हिस्सा हैं. पूरी तरह से शहरी निर्वाचन क्षेत्र होने के कारण यहां कोई ग्रामीण मतदाता नहीं हैं. सभी पंजीकृत मतदाता नगरपालिका और छावनी की सीमाओं के भीतर रहते हैं.
आगरा छावनी का इतिहास 1805 से शुरू होता है, जब दूसरे आंग्ल-मराठा युद्ध में मराठों पर जीत के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां एक स्थायी सैन्य अड्डा स्थापित किया था. हालांकि मुगल बादशाहों ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली दो सदी से भी पहले स्थानांतरित कर दी थी, फिर भी उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण आगरा का रणनीतिक महत्व बहुत अधिक बना रहा. अंग्रेजों ने अपने बढ़ते क्षेत्रीय कब्जों की सुरक्षा और पूरे उत्तर भारत में महत्वपूर्ण संचार लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए इस शहर को एक प्रमुख सैन्य अड्डे के रूप में चुना.
समय के साथ, यह छावनी देश के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक बन गई. आम लोगों की बस्तियों के साथ-साथ चौड़ी सड़कों, बैरक, परेड ग्राउंड, अधिकारियों के क्वार्टर और सैन्य संस्थान धीरे-धीरे बनते गए. आज भी, आगरा छावनी भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण बेस है और इसने अपने औपनिवेशिक दौर की पहचान को काफी हद तक बनाए रखा है. रक्षा संस्थानों की मौजूदगी ने इस क्षेत्र के व्यवस्थित शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं पर भी असर डाला है.
आगरा छावनी, आगरा शहर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में यमुना बेसिन के समतल जलोढ़ मैदानों पर स्थित है. यमुना नदी उत्तर-पूर्व में कुछ किलोमीटर दूर बहती है, जबकि मशहूर ताजमहल छावनी क्षेत्र से लगभग छह किलोमीटर दूर है. इस क्षेत्र में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे अच्छा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है.
आगरा छावनी रेलवे स्टेशन उत्तर भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है और यहां से दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर और कई अन्य बड़े शहरों के लिए सीधी कनेक्टिविटी मिलती है. शहर में आगरा एयरपोर्ट भी है, जबकि जेवर में चालू नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को और मजबूत किया है. नेशनल हाईवे 19, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे दिल्ली, लखनऊ और राज्य के अन्य हिस्सों तक आसान सड़क संपर्क प्रदान करते हैं.
इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था व्यापार, पर्यटन, रक्षा संस्थानों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और एक फलते-फूलते सर्विस सेक्टर पर टिकी है. हजारों निवासी सरकारी कार्यालयों, सशस्त्र बलों, हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्ट और छोटे व्यवसायों में काम करते हैं. ताजमहल और अन्य मुगल स्मारकों पर केंद्रित पर्यटन उद्योग पूरे शहर में बड़ी आर्थिक गतिविधि पैदा करता रहता है.
आगरा छावनी ताजमहल से लगभग छह किलोमीटर, आगरा किले से लगभग आठ किलोमीटर, मथुरा से लगभग 60 किलोमीटर, फिरोजाबाद से लगभग 45 किलोमीटर और कानपुर से लगभग 285 किलोमीटर दूर स्थित है. यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते, ग्रेटर नोएडा लगभग 165 किलोमीटर, नोएडा लगभग 180 किलोमीटर और नई दिल्ली लगभग 215 किलोमीटर दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के रास्ते लगभग 335 किलोमीटर दूर है.
आगरा छावनी, आगरा क्षेत्र में बीजेपी के सबसे भरोसेमंद शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरी है. 2014 से, पार्टी ने विधानसभा चुनाव जीते हैं और तीनों लोकसभा चुनावों में अच्छी बढ़त बनाई है. इससे पता चलता है कि सवर्ण मतदाताओं के बीच अपने पारंपरिक समर्थन आधार से आगे बढ़कर पार्टी का सामाजिक दायरा बढ़ा है.
इसके बावजूद, इस निर्वाचन क्षेत्र का सामाजिक ढांचा ऐसा है कि अनुकूल राजनीतिक परिस्थितियों में यहां कड़ा मुकाबला हो सकता है. अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी और मुस्लिम मतदाताओं की ठीक-ठाक संख्या मिलकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की ताकत रखती है, बशर्ते वे एकजुट होकर किसी एक विपक्षी उम्मीदवार को वोट दें. बीएसपी ने लगातार तीन जीत के दौरान ऐसे सामाजिक गठबंधन की ताकत दिखाई थी. इनमें से दो जीत मुस्लिम उम्मीदवारों के साथ तब मिली थीं, जब यह सीट अनुसूचित जाति समुदाय के लिए आरक्षित नहीं थी.
हालांकि, उस समीकरण को फिर से बनाना अब बहुत मुश्किल हो गया है. बीजेपी ने लगातार संगठनात्मक प्रयासों और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अनुसूचित जाति के मतदाताओं के बीच अपना समर्थन काफी बढ़ाया है, जबकि आगरा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की बढ़ती मौजूदगी ने विपक्षी वोटों, खासकर मुसलमानों के वोटों को बांट दिया है. नतीजतन, विपक्ष अक्सर बीजेपी के दबदबे को गंभीर चुनौती देने के बजाय बीजेपी के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर उभरने की होड़ में ही लगा रहता है.
जब तक बीजेपी-विरोधी कोई व्यापक सामाजिक गठबंधन नहीं बनता और एकजुट नहीं रहता, तब तक आगरा कैंट सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को स्पष्ट बढ़त हासिल रहेगी. मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लगता है कि यह सीट विपक्ष के जीतने के बजाय सत्ताधारी पार्टी के हारने की संभावना वाली सीट है.
(अजय झा)
Kunwar Chand
SP
Dr. Bhartendra Kumar Arun
BSP
Sikandar Singh
INC
Nota
NOTA
Prem Singh
AAAP
Prakash Indiver
IND
Hari Kishan
IND
Sundar Singh
BMJP
Mona
PECP
Akash Soni
IND
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