उत्तर प्रदेश की राजनीति में अलीगढ़ की अपनी अलग पहचान है. एक तरफ यहां ताला और हार्डवेयर का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है, तो दूसरी तरफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कारण इस शहर की पहचान देश-दुनिया तक है. शिक्षा, कारोबार और राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से अलीगढ़ अहम जिला माना जाता है.
अलीगढ़ की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का बड़ा प्रभाव रहा है. उनकी राजनीतिक विरासत को उनके परिवार के सदस्य आगे बढ़ाते रहे हैं. उनके पोते संदीप सिंह अलीगढ़ जिले की अतरौली विधानसभा सीट से विधायक हैं. वहीं, जिले की राजनीति में भाजपा के अलावा समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल और बसपा भी अपनी जगह बनाने की कोशिश करती रही हैं.
अलीगढ़ की राजनीति में कल्याण सिंह का प्रभाव
अलीगढ़ का नाम आते ही पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की चर्चा होती है. जिले की अतरौली विधानसभा सीट से उनका खास राजनीतिक जुड़ाव रहा है. फिलहाल इस सीट से उनके पोते संदीप सिंह विधायक हैं. संदीप सिंह ने 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के वीरेश यादव को हराया था. अलीगढ़ की राजनीति में भाजपा की स्थिति पिछले कुछ चुनावों में मजबूत हुई है. 2012 के विधानसभा चुनाव में पार्टी जिले की किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी थी. इसके बाद 2017 में भाजपा ने सभी सात सीटें जीत लीं. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने अपना प्रदर्शन दोहराया और जिले की सभी सीटों पर कब्जा बरकरार रखा.
मुस्लिम, दलित और ओबीसी वोटर अहम
अलीगढ़ की चुनावी राजनीति में अलग-अलग समुदायों के मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. जिले में मुस्लिम और दलित मतदाताओं की अच्छी मौजूदगी है. इसके अलावा ओबीसी मतदाता भी कई सीटों पर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं. राजपूत, जाट और गुर्जर मतदाताओं का प्रभाव भी जिले की राजनीति में दिखाई देता है. इन्हीं समीकरणों के सहारे राष्ट्रीय लोकदल ने भी यहां अपनी राजनीतिक जमीन बनाए रखने की कोशिश की है. समाजवादी पार्टी और बसपा का जनाधार भी जिले की राजनीति में रहा है. हालांकि, 2017 और 2022 में भाजपा की लगातार जीत ने जिले में पार्टी की मजबूत स्थिति को दिखाया.
अलीगढ़ जिले में सात विधानसभा सीटें
अलीगढ़ जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं. इनमें अलीगढ़ शहर, कोल, बरौली, अतरौली, छर्रा, खैर और इगलास शामिल हैं.
खैर और इगलास अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं. इगलास और छर्रा विधानसभा क्षेत्र हाथरस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. जिला अलीगढ़ मंडल का हिस्सा है. इस मंडल में अलीगढ़ के अलावा हाथरस, कासगंज और एटा जिले भी शामिल हैं. अलीगढ़ जिले की आबादी 36 लाख से अधिक है और साक्षरता दर करीब 69.61 प्रतिशत है.
2022 के विधानसभा चुनाव में किसने कहा से मारी बाजी
अलीगढ़ शहर विधानसभा सीट: इस सीट पर भाजपा ने मुक्ता राजा को उम्मीदवार बनाया था. उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के जफर आलम से हुआ. मुक्ता राजा ने जफर आलम को 12,786 वोटों से हराया.
बरौली विधानसभा सीट: भाजपा ने यहां मौजूदा विधायक दलवीर सिंह की जगह ठाकुर जयवीर सिंह को टिकट दिया था. जयवीर सिंह ने बसपा के नरेंद्र कुमार शर्मा को 90,645 वोटों के बड़े अंतर से हराया.
अतरौली विधानसभा सीट : यह सीट कल्याण सिंह के परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ी रही है. भाजपा के संदीप कुमार सिंह ने सपा के वीरेश यादव को 39,324 वोटों से हराकर जीत दर्ज की.
छर्रा विधानसभा सीट : भाजपा ने मौजूदा विधायक रावेंद्र पाल सिंह पर भरोसा जताया था. उन्होंने सपा की लक्ष्मी ढांगर को 24,327 वोटों से हराया.
इगलास विधानसभा सीट: आरक्षित इगलास सीट पर भाजपा ने राजकुमार सहयोगी को उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के बीरपाल सिंह को 59,163 वोटों से हराया.
खैर विधानसभा सीट : आरक्षित खैर सीट पर भाजपा के अनूप सिंह उर्फ अनूप प्रधान वाल्मीकि ने बसपा की चारू केन को 74,341 वोटों से शिकस्त दी.
कोल विधानसभा सीट: कोल में भाजपा के अनिल पाराशर और सपा के अज्जू इशाक के बीच मुकाबला हुआ. अनिल पाराशर ने 5,028 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. जिले की सातों सीटों में यह भाजपा की सबसे कम अंतर वाली जीत थी.