इगलास पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले का एक सब-डिविजन स्तर का कस्बा है, जो अपने आलू के लिए मशहूर है. यहां के आलू पूरे देश में सप्लाई किए जाते हैं. यह एक ऐसी जगह है जिसकी अपनी अलग ग्रामीण पहचान है और इसका राजनीतिक महत्व भी समय के साथ लगातार बढ़ा है.
1951 में बना इगलास, अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है और हाथरस लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. 2001 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर 'संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश, 2008' (जो 2012 के चुनावों के लिए लागू हुआ) के तहत इसका दर्जा बदलने से पहले इगलास एक सामान्य श्रेणी की सीट थी. परिसीमन आयोग के इसी 2008 के आदेश से इगलास को हाथरस लोकसभा क्षेत्र में शामिल किया गया था. हालांकि, जाट समुदाय इस फैसले का लगातार विरोध करता रहा है. इस समुदाय की आबादी यहां के कुल वोटरों में लगभग 40 प्रतिशत है. उनका मानना है कि उन्हें इगलास विधानसभा और हाथरस लोकसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने और प्रतिनिधित्व करने का मौका न देकर उनके साथ अन्याय किया गया है, क्योंकि ये दोनों सीटें अब अनुसूचित जाति समुदाय के लिए आरक्षित हैं.
2008 में इगलास निर्वाचन क्षेत्र की सीमाए फिर से तय की गईं. अब इसमें पूरा इगलास सब-डिविजन (इगलास कस्बा और तहसील के लगभग 184 गांव और ग्रामीण इलाके) शामिल है. साथ ही, इलाके को आपस में जोड़ने और आबादी का संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ आस-पास के हिस्से भी इसमें जोड़े गए हैं, जिससे इसकी पहचान मुख्य रूप से ग्रामीण हो गई है.
इगलास में अब तक 20 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2004 और 2019 में हुए दो उपचुनाव भी शामिल हैं. इसे काफी हद तक 'स्विंग सीट' (ऐसी सीट जहां कोई भी पार्टी लगातार नहीं जीतती) माना जाता है, क्योंकि यहां किसी एक पार्टी का लंबे समय तक दबदबा नहीं रहा है. हाल ही में यह पैटर्न टूटा है, जब बीजेपी ने लगातार तीन बार यह सीट जीती है. कांग्रेस पार्टी ने यह सीट छह बार, बीजेपी ने चार बार, भारतीय क्रांति दल, राष्ट्रीय लोक दल और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो बार जीत हासिल की है, जबकि जनता पार्टी, लोक दल, जनता दल और बहुजन समाज पार्टी ने एक-एक बार जीत दर्ज की है.
RLD ने 2007 में अपना पहला चुनाव जीता था. यह इगलास में सामान्य श्रेणी की सीट के तौर पर आखिरी चुनाव था. इसके बाद, SC-आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र में बदले जाने के बाद भी यह सीट जीतने वाली RLD पहली पार्टी बनी. 2012 में, त्रिलोकी राम ने BSP के राजेंद्र कुमार को 8,193 वोटों से हराकर RLD के लिए यह सीट जीती.
BJP की किस्मत में अचानक और जबरदस्त बदलाव आया. 2012 में चौथे स्थान पर रहने के बाद, 2017 में पार्टी ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए इगलास सीट जीती. उनके उम्मीदवार राजवीर सिंह दिलेर ने BSP के राजेंद्र कुमार को 74,800 वोटों के बड़े अंतर से हराया. 2019 में लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद दिलेर ने इगलास के MLA पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे उसी साल उपचुनाव हुआ, जिसमें BJP के राजकुमार सहयोगी ने BSP के अभय कुमार को 25,937 वोटों से हराया. सहयोगी ने 2022 में भी BJP के लिए यह सीट बरकरार रखी और RLD के बीरपाल सिंह को 59,163 वोटों से हराया. सहयोगी को 127,209 वोट मिले, जबकि बीरपाल सिंह को 68,046 वोट मिले.
हाल के वर्षों में लोकसभा चुनावों के दौरान इगलास क्षेत्र में BJP का दबदबा रहा है. 2009 में इसकी सहयोगी पार्टी RLD, BSP से 19,342 वोटों से आगे थी. BJP ने 2014 में हाथरस लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा और BSP से 80,919 वोटों के भारी अंतर से आगे रही, और तब से उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2019 में वह समाजवादी पार्टी से 73,701 वोटों से और 2024 में 46,240 वोटों से आगे रही. BJP के अनूप प्रधान बाल्मीकि को 108,719 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के जसवीर वाल्मीकि को 62,479 वोट मिले.
इगलास में मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. 2012 में यहां 309,684 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिनकी संख्या 2017 में बढ़कर 370,237, 2019 में 375,813, 2022 में 396,755 और 2024 में 399,803 हो गई. यहां वोटिंग का प्रतिशत ज्यादातर अच्छा रहा है, सिवाय पिछले संसदीय चुनाव के, जब इसमें भारी गिरावट आई थी. यह 2012 में 61.72 प्रतिशत, 2017 में 66.48 प्रतिशत, 2019 में 61.86 प्रतिशत, 2022 में 61.42 प्रतिशत और 2024 में 53.55 प्रतिशत था.
इगलास हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां अकेले जाट समुदाय के वोटर लगभग 40 प्रतिशत हैं. उनकी संख्या अनुसूचित जाति (SC) के 23.05 प्रतिशत वोटरों से ज्यादा है, हालांकि यह सीट SC समुदाय के लिए आरक्षित है, और यह बात जाटों के लिए विवाद का विषय बनी हुई है. शहरी अलीगढ़ या कोइल जैसे आस-पास के इलाकों की तुलना में यहां मुस्लिम आबादी कम है और अनुमान है कि वे कुल वोटरों का लगभग 7 प्रतिशत हैं. इगलास का इलाका मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां 93.85 प्रतिशत वोटर ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जबकि शहरी वोटर 6.15 प्रतिशत हैं.
इगलास शहर का इलाका करबन नदी से मथुरा की ओर और पुरानी नहर से अलीगढ़ की ओर फैला हुआ है, जिससे इगलास को एक स्पष्ट ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण स्वरूप मिलता है. यह मुख्य रूप से अपनी कृषि-प्रधान पहचान और हाल के दशकों में हासिल किए गए राजनीतिक महत्व के लिए जाना जाता है. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर टिकी है. आलू यहां की सबसे मशहूर फसल है, साथ ही दूसरी मुख्य फसलें भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देती हैं. यहां परिवहन का मुख्य साधन सड़क मार्ग है. इगलास रेलवे नेटवर्क से नहीं जुड़ा है और सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अलीगढ़ जंक्शन है.
आस-पास के शहरी इलाकों में जिला मुख्यालय अलीगढ़ (लगभग 30-35 किमी दूर), हाथरस (लगभग 25-30 किमी दूर), मथुरा (लगभग 65 किमी दूर), खैर (लगभग 20 किमी दूर), जेवर (लगभग 55 किमी दूर), वृंदावन (लगभग 70 किमी दूर), आगरा (लगभग 95 किमी दूर), बुलंदशहर (लगभग 80 किमी दूर) और दिल्ली (लगभग 120-130 किमी दूर) शामिल हैं. राज्य की राजधानी लखनऊ सड़क मार्ग से लगभग 300-320 किमी दूर है.
2014 से इगलास में BJP के शानदार प्रदर्शन (जिसमें उसने सभी चुनाव जीते हैं) और स्थानीय जाटों पर अच्छी पकड़ रखने वाली RLD के अब उसके जूनियर सहयोगी के तौर पर वापस आने को देखते हुए, BJP 2027 के चुनावों में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर साफ बढ़त के साथ उतरने के लिए तैयार है. इगलास में BSP के संघर्ष से पता चलता है कि वह स्थानीय SC वोटरों की पसंदीदा पार्टी नहीं है, जो आमतौर पर BJP का साथ देते हैं. समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्ष को यहां BJP को हराने के लिए अपनी सामान्य क्षमता से कहीं ज्यादा जोर लगाना होगा.
(अजय झा)
Birpal Singh
RLD
Sushil Kumar
BSP
Priti
INC
Nota
NOTA
Kunwarpal Singh
LD
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