भारतीय सेना की अग्निवीर स्कीम में सरकार ने बड़ा बदलाव किया है. पहले बैच के 25 फीसदी अग्निवीरों को आर्मी और एयरफोर्स में नौकरी पक्की कर दी गई है, तो वहीं 75 फीसदी अग्निवीरों को 2 साल का एक्सटेंशन दिया गया है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार को यह ऐलान किया. इससे तीनों सेनाओं में तैनात देश के करीब 3.18 लाख अग्निवीरों को फायदा होगा.
केंद्र सरकार द्वारा अग्निपथ योजना के तहत पहले बैच के 75 फीसदी अग्निवीरों के सेवा कार्यकाल को 4 साल से बढ़ाकर 6 साल यानी 2 साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार करने और उसके बाद भी मेरिट के आधार पर स्थायी कैडर में शामिल होने के दरवाजे खोलने का बड़ा फैसला लिया गया है.
उत्तर प्रदेश, जिसे भारतीय सेना की 'नर्सरी' कहा जाता है, वहां चुनावी तपिश के बीच सरकार का यह प्रशासनिक फैसला एक बड़ा सियासी दांव साबित हो सकता है. 2027 के विधानसभा चुनाव के नजरिए से देखें तो यह फैसला सूबे के चुनावी समीकरणों पर सीधा असर डालने की ताकत रखता है.
सरकार ने दिया अग्निवीरों को दिवाली का तोहफा
केंद्र सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना 2022 में शुरू की थी. इसके तहत युवाओं को 4 साल के लिए सेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती किया गया था. 4 साल बाद अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को स्थायी नौकरी देने का प्रावधान था और बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को सेवा से मुक्त होना था.
पहले बैच में 24,400 अग्निवीरों की भर्ती हुई थी, जिनका 4 साल का कार्यकाल 31 दिसंबर को पूरा हो रहा है. इसमें 25 फीसदी को स्थायी नौकरी देने के बाद बाकी बचे 75 फीसदी यानी 18,300 अग्निवीर 31 दिसंबर को 4 साल की सेवा पूरी कर रहे हैं.
अब सरकार के फैसले के बाद 4 साल की सेवा पूरी करके बाहर हो रहे 75 फीसदी अग्निवीरों को 2 साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार देने का फैसला किया गया है. इसके बाद उन्हें नियमित सैनिक बनने का एक और मौका मिलेगा, लेकिन चयन मेरिट के आधार पर होगा. एक तरह से अग्निवीरों को सरकार ने दीपावली का तोहफा दे दिया है.
ग्रामीण और युवा वोटबैंक पर सीधा असर
भारतीय सेना में सबसे अधिक जवान उत्तर प्रदेश से हैं. अग्निवीर के पहले बैच में 24 हजार युवाओं की भर्ती हुई थी, जिसमें से यूपी के कितने लोग थे, उसका राज्यवार आंकड़ा अलग से नहीं है; लेकिन काफी संख्या में अग्निवीर यूपी से हैं.
उत्तर प्रदेश में पश्चिमी यूपी के मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, बुलंदशहर और पूर्वांचल के गाजीपुर, बलिया, देवरिया, आजमगढ़ वे इलाके हैं, जहां के लगभग हर दूसरे गांव से कोई न कोई युवा सेना भर्ती की तैयारी करता है. 2022 में अग्निपथ योजना के ऐलान के बाद युवाओं और उनके परिवारों में '4 साल बाद बेरोजगारी' की गहरी चिंता थी. अब सरकार का फैसला उनके लिए राहत का सबब बन रहा है.
सरकार द्वारा 2 साल का कार्यकाल बढ़ाने, बढ़ी हुई 'सेवा निधि' और 6 साल बाद भी नियमित सैनिक बनने का मौका मिलने से ग्रामीण युवाओं की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा तनाव काफी हद तक कम होगा. यह सत्ताधारी बीजेपी के पक्ष में युवाओं का भरोसा वापस लाने में मददगार हो सकता है. खासकर ग्रामीण इलाकों में यह मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है.
विपक्ष के मुद्दे को बेअसर करने की कोशिश
2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस (INDIA गठबंधन) ने उत्तर प्रदेश में अग्निवीर योजना को 'जय जवान, जय किसान' के खिलाफ बताकर एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था. अखिलेश यादव और राहुल गांधी लगातार रैलियों में वादा करते रहे हैं कि सत्ता में आने पर वे इस योजना को रद्द करेंगे. सपा के अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा था कि केंद्र में हमारी सरकार बनेगी तो हम अग्निवीर योजना को बंद कर देंगे और उसकी जगह पर स्थायी भर्ती करेंगे.
बीजेपी को 2024 के लोकसभा चुनाव में अग्निवीर के मुद्दे से काफी नुकसान हुआ था. हरियाणा और पश्चिमी यूपी के इलाके में बीजेपी को काफी झटका लगा था. कार्यकाल विस्तार और बेहतर वित्तीय पैकेज का यह नया मॉडल विपक्ष के '4 साल में रिटायरमेंट' वाले नैरेटिव को तोड़ने का दांव माना जा रहा है. भाजपा अब इसे स्थायित्व और अनुभव का फॉर्मूला बताकर विपक्ष के हमलों को काउंटर करने की रणनीति अपनाएगी.
'जय जवान' और 'जातीय समीकरण'
यूपी में सेना से जुड़ा वोटर केवल युवा नहीं है, बल्कि उसका पूरा परिवार और गांव इस फैसले से प्रभावित होता है. पूर्वांचल की यादव, राजपूत, मौर्य और राजभर आबादी हो या फिर पश्चिमी यूपी का जाट, गुर्जर और सैनी समुदाय—सेना की नौकरी इन सभी जातियों के लिए आर्थिक रीढ़ के साथ-साथ सामाजिक सम्मान का प्रतीक है.
अग्निवीरों का कार्यकाल बढ़ने से परिवारों को तात्कालिक आर्थिक राहत दिखेगी, जिससे उन इलाकों में भाजपा अपने गैर-यादव ओबीसी और सवर्ण आधार को फिर से मजबूत करने का दावा कर सकती है. यूपी में सपा की 2027 के चुनाव को जातीय पिच पर ले जाने की रणनीति को भी यह फैसला काउंटर कर सकता है.
2027 के यूपी चुनाव का अहम एजेंडा
पहले बैच के अग्निवीरों का 4 साल का कार्यकाल दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा था. अगर लगभग 18,300 अग्निवीर दिसंबर 2026 में बिना किसी ठोस विकल्प के सेना से बाहर हो जाते, तो 2027 के शुरुआती महीनों में होने वाले यूपी चुनाव में यह भाजपा के लिए बहुत बड़ा सिरदर्द बन सकता था. यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 2 साल का विस्तार देकर सरकार ने 2026-27 के चुनाव चक्र में पैदा होने वाली संभावित नाराजगी के टाइम-बम को सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अग्निवीर योजना में इस बदलाव से युवाओं के एक बड़े वर्ग में यह संदेश जरूर गया है कि सरकार उनकी मांगों और परिस्थितियों पर सकारात्मक रूप से विचार कर रही है. उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक और सैन्य रूप से संवेदनशील राज्य में अग्निवीरों की सेवा अवधि का बढ़ना भाजपा के लिए एक बड़ा 'पॉलिटिकल डैमेज कंट्रोल' और रणनीतिक दांव साबित होगा, जो विपक्ष के एक मजबूत चुनावी मुद्दे की धार को कमजोर करने का काम करेगा.