बागपत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का एक शहर और जिला मुख्यालय है. इसका अपना नगरपालिका बोर्ड है और यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा है. यह यमुना नदी के पूर्वी किनारे पर बसा है और नदी के दूसरी तरफ हरियाणा और दिल्ली हैं.
बागपत एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और बागपत लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें बागपत नगरपालिका बोर्ड और खेकड़ा तहसील का पूरा इलाका, साथ ही बागपत तहसील के अमीनगर सराय और अग्रवाल मंडी और कई गांव शामिल हैं, जिससे इसकी पहचान मुख्य रूप से ग्रामीण इलाके की है.
1951 में बने बागपत ने अब तक उत्तर प्रदेश में हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है. पड़ोसी बड़ौत के साथ-साथ, यह मशहूर स्वतंत्रता सेनानी उमराव दत्त शर्मा का गढ़ था, जिन्होंने सक्रिय राजनीति से रिटायर होने से पहले 1952 और 1957 के बीच बड़ौत का प्रतिनिधित्व किया था. उनके जीवनकाल में, वोटर ज्यादातर उन्हीं उम्मीदवारों का समर्थन करते थे जिन्हें वे सपोर्ट करते थे. उस दौरान हुए सात चुनावों में, कांग्रेस ने तीन बार, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने दो बार, और भारतीय क्रांति दल और जनता पार्टी ने एक-एक बार यह सीट जीती.
उमराव दत्त शर्मा की मौत के बाद, किसानों के बड़े नेता चौधरी चरण सिंह, जो बाद में प्रधानमंत्री बने, का इस इलाके में काफी असर रहा. कुल मिलाकर, कांग्रेस ने यह सीट छह बार जीती है. CPI, जनता दल, राष्ट्रीय लोक दल और BJP ने दो-दो बार. जबकि भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, भारतीय किसान कामगार पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
2012 में, BSP की हेमलता चौधरी ने RLD के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अनुभवी नेता कौकब हमीद खान को 7,663 वोटों से हराया और उनके लगातार चार बार के कार्यकाल को खत्म किया. BJP, जिसने 2012 में RLD के साथ गठबंधन किया था और इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा था, उसने 2017 में जबरदस्त वापसी की, जब उसके उम्मीदवार योगेश धामा ने BSP के मोहम्मद अहमद हमीद को 31,360 वोटों से हराया. धामा ने 2022 में फिर से यह सीट जीती. उन्होंने मोहम्मद अहमद हमीद को 6,733 वोटों से हराया, जो RLD में शामिल हो गए थे. धामा को 101,420 वोट मिले, जबकि हमीद को 94,687 वोट मिले.
हालांकि बागपत को जाटों का गढ़ माना जाता है और चौधरी चरण सिंह और उनके परिवार के साथ इसके गहरे ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, लेकिन यह कभी भी उनके नेतृत्व वाली पार्टियों का मजबूत गढ़ नहीं बन पाया. लोकसभा चुनाव के नतीजों में भी यह बात साफ दिखती है. 2009 में, BSP ने RLD से 8,576 ज्यादा वोट हासिल किए. 2014 में, BJP ने समाजवादी पार्टी से 33,139 ज्यादा वोट पाए. 2019 में, BJP ने RLD से 15,637 ज्यादा वोट हासिल किए. RLD 2024 में ही BJP की जूनियर सहयोगी के तौर पर सबसे आगे रही और समाजवादी पार्टी से 9,791 ज्यादा वोट हासिल किए. इस इलाके में RLD के राजकुमार सांगवान को 88,880 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के अमरपाल शर्मा को 79,089 वोट मिले.
बागपत विधानसभा क्षेत्र में रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यह संख्या 263,492 थी, जो 2017 में बढ़कर 301,360 और 2019 में 312,892 हो गई. इसके बाद 2022 में यह संख्या बढ़कर 316,266 और 2024 के लोकसभा चुनावों में 328,632 हो गई. 2024 में गिरावट आने से पहले, वोटिंग प्रतिशत आम तौर पर 60 प्रतिशत के मध्य से उच्च स्तर के बीच रहा है. यह 2012 में 62.60 प्रतिशत, 2017 में 65.93 प्रतिशत, 2019 में 64.16 प्रतिशत, 2022 में 67.70 प्रतिशत था और 2024 में गिरकर 57.33 प्रतिशत हो गया.
बागपत एक हिंदू-बहुसंख्यक और जाट-प्रधान निर्वाचन क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी अच्छी-खासी संख्या में है. यहां के कुल मतदाताओं में अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी लगभग 11.98 प्रतिशत है. यहां 72.12 प्रतिशत मतदाता गांवों में रहते हैं, इसलिए यह मुख्य रूप से एक ग्रामीण सीट है. शहरी इलाकों में रहने वाले मतदाताओं की संख्या केवल 27.88 प्रतिशत है.
बागपत का मूल नाम व्याघ्रप्रस्थ था, जिसका उल्लेख महाभारत में मिलता है. बाद में मुगल शासन के दौरान इसका नाम बदलकर बागपत (बगीचों का शहर) कर दिया गया. आधुनिक समय में भी यह क्षेत्र कृषि का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.
बागपत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी इलाकों में यमुना नदी के पूर्वी तट पर स्थित है. यहां जिला और राज्य राजमार्गों के माध्यम से सड़क संपर्क की अच्छी सुविधा है. यहां अपना कोई बड़ा रेलवे स्टेशन नहीं है. सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन बागपत रोड (अग्रवाल मंडी के पास) पर है. हरियाणा का पानीपत यमुना नदी के ठीक दूसरी ओर, लगभग 25-30 किमी दूर है. सोनीपत लगभग 35-40 किमी दूर है. मेरठ लगभग 45-50 किमी, दिल्ली लगभग 50-60 किमी और राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 500 किमी दूर है.
यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जिसमें गन्ना, अनाज और बागवानी प्रमुख फसलें हैं. डेयरी फार्मिंग भी बड़े पैमाने पर की जाती है. मतदाताओं के प्रमुख मुद्दों में गन्ने की कीमतें, सिंचाई, बिजली आपूर्ति, रोजगार के अवसर और बेहतर सड़क संपर्क शामिल हैं.
हाल के वर्षों में बागपत में बीजेपी का अपने प्रतिद्वंद्वियों पर दबदबा रहा है. उम्मीद है कि RLD के सहयोगी बनने से यह स्थिति और मजबूत हुई है, क्योंकि इससे ताकत में काफी इजाफा हुआ है, जैसा कि 2024 के संसदीय चुनावों में भी देखा गया था. यह बात कि समाजवादी पार्टी ने यह सीट कभी नहीं जीती है और उसकी सहयोगी कांग्रेस ने आखिरी बार 1993 में इसे जीता था, 2027 के विधानसभा चुनावों में इस सीट को बनाए रखने की कोशिश में BJP के नेतृत्व वाले NDA को दूसरों से आगे रखती है.
(अजय झा)
Mohd Ahmed Hameed
RLD
Arun Kasana
BSP
Anil
INC
Naveen Kumar
AAAP
Renu
IND
Nota
NOTA
Vinay Kasana
IND
Maharaj Singh
IND
Vinod Kumar
INAPI
Rasid
PECP
Parmod Kumar Goswami
SECINQP
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