5 नवंबर 1941 को जापान की संयुक्त नौसेना को टॉप सीक्रेट ऑर्डर नंबर-1 जारी किया गया. इसमें साफ निर्देश दिया गया था कि आने वाले दिनों में जापान को अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर पर हमला करना है. इस ऑर्डर के तहत अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर के अलावा मलाया (आज का मलेशिया), डच ईस्ट इंडीज और फिलीपींस पर भी हमले की तैयारी करनी थी. यह आदेश जापान की सेना के बड़े अधिकारियों और नौसेना के कमांडरों तक पहुंचाया गया था. खास बात यह थी कि इस आदेश के करीब एक महीने बाद ही जापान ने पर्ल हार्बर पर बम बरसाकर अमेरिका को सीधे दूसरे विश्व युद्ध में खींच लिया.
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान एशिया में अपना प्रभाव और कब्जा बढ़ाने में जुटा था. साल 1940 में जापान ने फ्रेंच इंडोचाइना (आज के वियतनाम, लाओस और कंबोडिया का इलाका) पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद जापान ने फिलीपींस के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ानी शुरू कर दी.
फिलीपींस उस समय अमेरिका के संरक्षण में था. ऐसे में जापान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को अमेरिका ने अपने हितों के लिए खतरा माना. जापान ने फिलीपींस के पास कैम रान्ह नौसैनिक अड्डे पर भी कब्जा कर लिया था. यह जगह फिलीपींस की राजधानी मनीला से करीब 800 मील दूर थी.
जापान की इन गतिविधियों से नाराज होकर अमेरिका ने भी सख्त कदम उठाए. उसने अमेरिका में मौजूद जापान की संपत्तियों को जब्त कर लिया और जापानी जहाजों के लिए पनामा नहर का रास्ता बंद कर दिया. इससे जापान पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ गया.
सितंबर 1941 में अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने एक कड़ा बयान भी जारी किया. यह बयान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने तैयार किया था. इसमें चेतावनी दी गई थी कि अगर जापान ने दक्षिण-पूर्व एशिया या दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में अपना कब्जा और बढ़ाया, तो अमेरिका और जापान के बीच युद्ध छिड़ सकता है.
इस पूरे विवाद में जापान की सेना की भूमिका बेहद अहम थी. उस समय जापान की विदेश नीति और बड़े फैसलों पर सेना का काफी प्रभाव था. अमेरिका और जापान के बीच तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत भी चल रही थी, लेकिन जापान की सेना पीछे हटने को तैयार नहीं थी.
जापान के तत्कालीन युद्ध मंत्री हिदेकी तोजो का कब्जे वाले इलाकों से सेना हटाने का कोई इरादा नहीं था. तोजो को अमेरिका की चेतावनी एक तरह का अल्टीमेटम लगी. उन्हें लगा कि अब अमेरिका के साथ टकराव टालना मुश्किल है.
इसके बाद जापान ने तय किया कि वह अमेरिका के खिलाफ पहले हमला करेगा. इसी रणनीति के तहत पर्ल हार्बर पर बमबारी की योजना तैयार की गई.
आखिरकार, 7 दिसंबर 1941 को जापान ने हवाई में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर्ल हार्बर पर अचानक हवाई हमला कर दिया. इस हमले में अमेरिकी नौसेना को भारी नुकसान हुआ और बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए. इसके अगले दिन अमेरिका ने जापान के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया.