झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को विधानसभा मार्च तक पहुंच गया. प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ रहे है लेकिन लगातार सुरक्षा घेरे और बैरिकेडिंग के आगे पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया लेकिन इस समय कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं कि लोग देखकर हैरान हो गए हैं.
भीड़ को तितर-बितर करने के लिए प्रशासन ने जैसे ही वाटर कैनन की इस्तेमाल किया छात्र वहां से भागे नहीं बल्कि वहां पर झूमने लगे. लेकिन इस दौरान सवाल उठता है कि आखिर प्रदर्शनकारी विधानसभा या संसद के पास जाकर प्रदर्शन क्यों नहीं कर सकते हैं. क्या किसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करना कानूनी अधिकार नहीं है और पुलिस को भीड़ को रोकने या हटाने का अधिकार कब मिलता है?
प्रदर्शन करना अधिकार है, लेकिन लागू होते हैं शर्तें
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) नागरियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से बिना हथियार के एक साथ होने का अधिकार तो जरूर देती है लेकिन यह अधिकार पूरी तरह असीमित नहीं है. सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा कारणों की वजह से सरकार उचित प्रतिबंध लगा सकती है. इसका मतलब साफ है कि कोई संगठन या ग्रुप अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता है कि वह विधानसभा, संसद या किसी अन्य हाई-सिक्योरिटी इलाके में जा सकते हैं.
क्यों रोका जाता है संसद या विधानसभा के पास भीड़?
बता दें कि संसद और विधानसभा जैसे जगहों पर अहम और हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र होते हैं. यहां बड़ी भीड़ को सीधे पहुंचने देने से सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा रहता है. जो सबसे बड़ी वजह है कि प्रशासन प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह और रूट तय कर सकता है. पुलिस प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड लगाकर संवेदनशील या प्रतिबंधित क्षेत्र से दूर कर सकती है. कई मामलों में प्रशासन निषेधाज्ञा भी लागू कर सकता है. रांची में भी विधानसभा के आसपास प्रशासन ने प्रतिबंध लगाए थे. रिपोर्टों के मुताबिक विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में प्रतिबंध लागू किए गए और बैरिकेडिंग के साथ सुरक्षा बढ़ाई गई थी.
फिर वाटर कैनन क्यों चलाया जाता है?
वाटर कैनन भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक कम घातक भीड़ नियंत्रण उपाय है. इसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाना है और पुलिस तथा प्रतिबंधित क्षेत्र के बीच दूरी बनाए रखने के लिए किया जाता है. रांची में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश के बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. इससे पहले प्रशासन ने विधानसभा की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की थी.
हेमंंत सोरेन को 'खून' वाला गिफ्ट! देवेंद्र महतो ने दी चेतावनी, कांटों का चक्रव्यूह भी टूटा