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पति की मौत, गांव वालों ने कहा डायन... फिर एग्जाम के 8 दिन पहले बेटी को खोया, पढ़ें RAS ऑफिसर की कहानी   

राजस्थान की रोहिणी गुर्जर ने जब अपने पति और बेटी को खोया तो, पूरे गांव ने उन्हें डायर करार दिया. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत के बाद वह RAS अधिकारी बन गई हैं. उनकी कहानी हर उस महिला को प्रोत्साहित करती है, जो अपने जीवन में आगे बढ़ते के बारे में सोचती हैं.

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रोहिणी गुर्जर ने अपने पति को खो दिया, गांव में उन्हें 'डायन' करार दिया गया, RAS मेन्स परीक्षा से कुछ दिन पहले उनकी 10 साल की बेटी का निधन हो गया और एक दुर्घटना में उनकी आंख में चोट लग गई. (Photo: YouTube/RAS by Drishti IAS | AI upscaled)
रोहिणी गुर्जर ने अपने पति को खो दिया, गांव में उन्हें 'डायन' करार दिया गया, RAS मेन्स परीक्षा से कुछ दिन पहले उनकी 10 साल की बेटी का निधन हो गया और एक दुर्घटना में उनकी आंख में चोट लग गई. (Photo: YouTube/RAS by Drishti IAS | AI upscaled)

साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली रोहिणी गुर्जर की जिंदगी में दुखों का पहाड़ टूट गया, जब उनकी बेटी और पति का निधन हुआ. ज्यादातर लोगों के लिए इनमें से कोई एक दुखद घटना भी जिंदगी को पूरी तरह बदल देने के लिए काफी होती. लेकिन रोहिणी गुर्जर की जिंदगी में ऐसी कई घटनाएं एक के बाद एक हुईं. 

पहले उनके पति का निधन हुआ. इसके बाद उनकी सास भी चल बसी. उनकी सास ही उन्हें पढ़ाई के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थीं. इसके बाद राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) मुख्य परीक्षा से कुछ दिन पहले उनकी 10 साल की बेटी का भी निधन हो गया. 

लेकिन मुश्किलें यहीं पर खत्म नहीं हुईं. परीक्षा से सिर्फ दो दिन पहले एक हादसे में उनकी आंख बुरी तरह घायल हो गईं. इतनी परेशानियों के बावजूद रोहिणी परीक्षा देने पहुंचीं. 

गांव की पहली ग्रेजुएट 

रोहिणी राजस्थान के घुघरा गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता सेना में थे. उन्होंने साल 2006 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली. लेकिन फिर पढ़ाई छोड़कर उन्होंने एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया. 

शादी, पति की मौत और अफसर 

उनके लाइफ में सब अच्छा चल रहा था. साल 2011 में उनकी शादी अजमेर के नारेली गांव में हो गई. उन्होंने पति के साथ मिलकर सरकारी नौकरी का सपना देखा. दोनों मिलकर RAS की तैयारी भी कर रहे थे. इस बीच साल 2013 में वह एक बेटी की मां बनीं. लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. लेकिन साल 2021 में उनके पति की दिल का दौरा पड़ने के बाद 2 महीने तक चले इलाज के बाद निधन हो गया. उनकी मृत्यु से दुख तो आया ही, लेकिन साथ ही कलंक भी लगा.

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गांव वाले देते थे ताना 

गांव में कुछ लोगों ने तब हद कर दी, जब उसके पति की मौत के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया गया और उसे डायन तक कह दिया गया. इस दौरान उनके भाई नरेंद्र गुर्जर और सास पुष्पा देवी ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया. पुष्पा देवी की उम्र करीब 95 साल थी. उन्होंने खुद कभी पढ़ाई नहीं की थी, लेकिन वह रोहिणी को बार-बार पढ़ाई दोबारा शुरू करने के लिए प्रेरित करती थीं. इसी हौसले के साथ रोहिणी ने 2021 के आखिर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी. 

फिर टूटा दुखों का पहाड़

आरएएस परीक्षा में रोहिणी ने पहली बार प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन मुख्य परीक्षा में वह 10 नंबरों से पीछे रह गईं. इसके बाद उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की और 2023 में जयपुर चली गईं. लेकिन इसी दौरान उनकी सास पुष्पा देवी का निधन हो गया. कुछ समय बाद रोहिणी ने खुद को संभाला और दोबारा पढ़ाई शुरू कर दी. लेकिन 29 जून 2024 को उनकी जिंदगी में एक और बड़ा दुख आया. उनकी 10 साल की बड़ी बेटी अचानक बीमार पड़ गई और उसकी मौत हो गई. उस समय आरएएस मुख्य परीक्षा में कुछ ही दिन बाकी थे. 

रोहिणी ने बताया कि बेटी की मौत के बाद उन्होंने परीक्षा देने की उम्मीद छोड़ दी थी. वह परीक्षा में नहीं बैठना चाहती थीं लेकिन इस दौरान परिवार ने उन्हें समझाया और आगे बढ़ने के लिए हिम्मत दी. खासकर उनकी छोटी बेटी भूमि के लिए उन्होंने परीक्षा देने का फैसला किया. इसके बाद परीक्षा से सिर्फ दो दिन पहले रोहिणी का एक्सीडेंट हो गया और उनकी आंख में गंभीर चोट लग गई. दृष्टि आईएएस के एक वीडियो में उन्होंने बताया कि आंख पर पट्टी बांधकर उन्होंने परीक्षा दी और दूसरी आंख से पेपर पूरा किया. 

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नहीं मानी हार 

रोहिणी ने बताया कि उनके मन में एक ही लक्ष्य था. अपने दिवंगत पति, सास और बेटी को गर्व महसूस कराना. जिंदगी में मुश्किलें लगातार आती रहीं और कई बार वह पूरी तरह टूट गईं. लेकिन हर बार उन्होंने खुद को संभाला और आगे बढ़ती रहीं. आखिरकार इसी हिम्मत और मेहनत ने उन्हें आरएएस परीक्षा की मंजिल तक पहुंचाया. आज रोहिणी अपनी छोटी बेटी के साथ रहती हैं. वह चाहती हैं कि उनकी सफलता गांव में लड़कियों को लेकर बनी पुरानी सोच को बदले. उनका मानना है कि लड़कियों को पढ़ने और अपने सपने पूरे करने का पूरा मौका मिलना चाहिए. रोहिणी अपने गांव से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली पहली लड़की थीं. 
 

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