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जमीनी हमले की तैयारी में ट्रंप, पलटवार को तैयार ईरान- किसकी कितनी ताकत

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में करीब 50 हजार सैनिकों और अत्याधुनिक विमानों के साथ इतिहास की सबसे बड़ी जंगी तैयारी की है, जबकि ईरान अपने अभेद्य अंडरग्राउंड पहाड़ी बंकरों और गुरिल्ला रणनीति के जरिए लड़ने के लिए तैयार है.

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अमेरिका के मरीन्स मिडिल ईस्ट में कई जगह तैनात हैं, जो किसी भी वक्त ईरान पर हमला करने की तैयारी में है. (File Photo: Getty)
अमेरिका के मरीन्स मिडिल ईस्ट में कई जगह तैनात हैं, जो किसी भी वक्त ईरान पर हमला करने की तैयारी में है. (File Photo: Getty)

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भीषण हवाई, मिसाइल और नौसैनिक संघर्ष के बाद अब दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह जंग जमीनी लड़ाई का रूप लेगी? हवाई और मिसाइल हमलों से एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को तबाह करने के बाद, दोनों ही देश अब एक बेहद विनाशकारी जमीनी युद्ध की संभावनाओं को भांप रहे हैं.

दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक वार्ताओं और सीजफायर के प्रयास भी चल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सेनाओं की लामबंदी और रणनीतिक तैयारियां कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं. अमेरिकी पेंटागन से लेकर तेहरान के सैन्य बंकरों तक, एक बड़े पैमाने पर होने वाले सैन्य टकराव के ब्लूप्रिंट तैयार किए जा चुके हैं.   

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अमेरिका की जमीनी युद्ध की तैयारियां 

अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ किसी भी जमीनी कार्रवाई के लिए साल 2026 की शुरुआत में इराक युद्ध (2003) के बाद से अपनी सबसे बड़ा मिलिट्री बिल्डअप है. अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को एक मजबूत मिलिट्री फोर्स में तब्दील कर दिया है.  

अमेरिकी सैन्य रणनीतिकारों का मुख्य ध्यान केवल बड़े पैमाने पर आक्रमण करने पर नहीं, बल्कि ईरान के आक्रमण को रोकने और उसके प्रमुख तटीय तथा रणनीतिक क्षेत्रों को तुरंत नियंत्रित करने पर है. पेंटागन की रणनीति मुख्य रूप से अग्रिम ठिकानों पर भारी हथियारों, बख्तरबंद ब्रिगेडों और रैपिड डिप्लॉयमेंट फोर्सेज को तैनात करने की रही है. 

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अमेरिकी वायु सेना ने पहली बार इजरायल की धरती पर अपने घातक F-22 रैप्टर स्टील्थ फाइटर्स को ओवडा एयर बेस पर तैनात किया है, ताकि जमीनी सेना को हवाई सुरक्षा कवर प्रदान किया जा सके. फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के दर्जनों युद्धपोत, एम्फीबियस असॉल्ट शिप्स  और मरीन कॉर्प्स के जवान किसी भी समय ईरान के तटीय इलाकों में उतरने के लिए चौबीसों घंटे तैयार बैठे हैं.

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ईरान का डिफेंसिव प्लान और गुरिल्ला रणनीति

ईरान इस बात को अच्छी तरह जानता है कि पारंपरिक जमीनी युद्ध में अमेरिकी सेना की अत्याधुनिक तकनीक, बख्तरबंद गाड़ियों और हवाई श्रेष्ठता का सीधे मुकाबला करना उसके लिए बेहद आत्मघाती होगा. इसलिए, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एसिमेट्रिक वॉफेयर स्ट्रैटजी का एक जाल तैयार किया है. 

US-Iran ground war preparations

ईरान की जमीनी तैयारियों का सबसे मुख्य हिस्सा उसके पहाड़ों के नीचे छिपे विशाल 'अंडरग्राउंड मिसाइल और मिलिट्री सिटी' हैं. ईरान ने अपने पश्चिमी पहाड़ी इलाकों  सैकड़ों किलोमीटर लंबी गहरी सुरंगें बनाई हैं, जहां हजारों सैनिक, बख्तरबंद गाड़ियां और मिसाइल लॉन्चर्स सुरक्षित छिपे हुए हैं. 

यदि अमेरिकी सेना ईरान की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश करती है, तो ईरान का प्लान सीधे आमने-सामने लड़ने के बजाय अमेरिकी सेना को अंदर खींचकर दलदल में फंसाने का है. इसके अलावा, ईरान ने अपनी नियमित सेना के साथ-साथ 'बसीज' मिलिशिया के लाखों लड़ाकों को गुरिल्ला युद्ध, शहरी लड़ाई और आईईडी धमाकों के जरिए अमेरिकी रसद लाइनों को काटने की कड़ी ट्रेनिंग दी है.

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मध्य पूर्व में वर्तमान में कितने अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं?

सैन्य विश्लेषकों और JINSA (Jewish Institute for National Security of America) की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 के इस भीषण युद्ध के दौरान मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की संख्या अपने चरम पर पहुंच गई थी.

कुल अनुमानित संख्या: वर्तमान में मिडिल ईस्ट में लगभग 45,000 से 54,000 अमेरिकी सैनिक विभिन्न देशों में तैनात हैं. युद्ध के चरम स्तर पर यह संख्या अस्थाई तौर पर और अधिक बढ़ गई थी, जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात नौसैनिक भी शामिल थे.

US-Iran ground war preparations

प्रमुख सैन्य ठिकाने: अमेरिकी सैनिकों का एक बड़ा हिस्सा कुवैत में कैंप आरिफजान, कतर में अल-उदेद एयर बेस - जो मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा हवाई अड्डा है. बहरीन- जहां अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा स्थित है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में तैनात है.

अग्रिम मोर्चे: इसके अतिरिक्त, इराक और सीरिया के संकटग्रस्त इलाकों में भी कुछ हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, जिन्हें हालिया संघर्ष के दौरान ईरानी समर्थित ड्रोन हमलों का लगातार सामना करना पड़ा है. हालांकि सीजफायर वार्ताओं के बीच अमेरिका ने खाड़ी से अपने कुछ युद्धपोतों और सैनिकों को वापस बुलाना शुरू किया है, लेकिन पेंटागन ने साफ कर दिया है कि वह तब तक एक मजबूत सैन्य मुद्रा बनाए रखेगा जब तक कि कोई स्थाई समझौता नहीं हो जाता.

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प्रॉक्सी वॉर का जाल और क्षेत्रीय सहयोगियों की तैयारी

इस संभावित जमीनी युद्ध में केवल अमेरिका और ईरान ही सीधे शामिल नहीं हैं. दोनों पक्षों ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार कर रखा है. ईरान ने लेबनान में हिज्बुल्लाह, इराक में पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज और यमन में हूती विद्रोहियों को भारी मात्रा में आधुनिक हथियार मुहैया कराए हैं.

ईरान की रणनीति यह है कि यदि अमेरिका जमीनी हमला शुरू करता है, तो उसके ये 'प्रॉक्सी संगठन' इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी अड्डों पर चौतरफा जमीनी और रॉकेट हमले शुरू कर देंगे ताकि अमेरिकी सेना का ध्यान बंट जाए.

US-Iran ground war preparations

दूसरी तरफ, अमेरिका को इजरायल का सीधा सैन्य और खुफिया सहयोग प्राप्त है. इसके साथ ही सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देश अमेरिकी सेना को लॉजिस्टिक्स, ईंधन और हवाई अड्डों के इस्तेमाल की खुली छूट दे रहे हैं. हालांकि ये खाड़ी देश अपने शहरों पर ईरानी मिसाइल हमलों के डर से सीधे जमीनी युद्ध में कूदने से कतरा रहे हैं, लेकिन वे अमेरिकी सुरक्षा छतरी के नीचे पूरी तरह लामबंद हैं.

जमीनी युद्ध का अंजाम

2026 का यह सैन्य गतिरोध इस बात का गवाह है कि अमेरिका और ईरान के बीच का यह संकट अब केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहने वाला है. यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह विफल हो जाती है. एक भी गलत कदम उठाया जाता है, तो यह मध्य पूर्व को एक ऐसे भीषण जमीनी युद्ध में धकेल देगा जिसकी तबाही की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देगी. हजारों सैनिकों की जान जाने के साथ-साथ यह युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और विश्व शांति को पूरी तरह तहस-नहस कर सकता है.

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