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भारत को S-400 की टेक्नॉलजी ट्रांसफर करेगा रूस, देश में ही बनेंगे 2 मिसाइल डिफेंस सिस्टम

पांच स्क्वाड्रन के प्रस्ताव को मार्च 2026 में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मंजूरी दी थी, जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 2.38 लाख करोड़ रुपये की मंजूरियों का हिस्सा था. यह प्रोजेक्ट 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रहने का अनुमान है.

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नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत डिलीवरी, समझौते पर हस्ताक्षर होने के लगभग तीन साल बाद शुरू होने की संभावना है.  (File Photo: Getty)
नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत डिलीवरी, समझौते पर हस्ताक्षर होने के लगभग तीन साल बाद शुरू होने की संभावना है. (File Photo: Getty)

भारतीय वायुसेना के लिए एस-400 'सुदर्शन' लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम के 5 और स्क्वाड्रन खरीदने के टेंडर पर रूस ने रक्षा मंत्रालय को अपना विस्तृत प्रपोजल सौंप दिया है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, रूस का जवाब मिल चुका है और इस पर प्रोसेसिंग चल रही है. यह प्रोजेक्ट 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रहने का अनुमान है. बताया जा रहा है कि दो स्क्वाड्रन भारत में ही तैयार किए जाएंगे.

दरअसल, नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत स्क्वाड्रन की डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के लगभग तीन साल बाद शुरू होने की उम्मीद है. बातचीत में भारत में MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर, ओवरहॉल) सुविधा बनाना और 'ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी' के तहत प्राइवेट सेक्टर द्वारा भारत में 2 यूनिट का जॉइंट प्रोडक्शन करना भी शामिल है, जबकि 3 यूनिट सीधे खरीदी जाएंगी.

यह कदम मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 के गेम-चेंजर साबित होने के बाद उठाया गया है. इस सिस्टम ने बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सर्विलांस और फाइटर एयरक्राफ्ट को मार गिराया था और साथ ही अन्य को भारतीय सीमा के 200 किमी के दायरे में उड़ान भरने से भी रोका था.

भारत ने 2018 में पांच स्क्वाड्रन के लिए 5.43 अरब डॉलर की डील साइन की थी. तीन स्क्वाड्रन पहले ही शामिल किए जा चुके हैं और पंजाब-जम्मू, राजस्थान-गुजरात और सिक्किम सेक्टर में तैनात हैं, जिससे एक त्रिकोणीय सुरक्षा घेरा बना है.

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अधिकारियों ने पिछले हफ्ते पुष्टि की कि चौथा स्क्वाड्रन समुद्री रास्ते से शुरू हो चुकी है. पहले कॉन्ट्रैक्ट का पांचवां और आखिरी स्क्वाड्रन नवंबर 2026 तक आने की उम्मीद है. यूक्रेन युद्ध के कारण इसमें पहले देरी हुई थी.

अगले पांच स्क्वाड्रन के प्रस्ताव को मार्च 2026 में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मंजूरी दी थी, जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 2.38 लाख करोड़ रुपये की मंजूरियों का हिस्सा था. यह एक 'फॉलो-ऑन' ऑर्डर है. सूत्रों का कहना है कि इस पर अमेरिकी CAATSA प्रतिबंध लागू नहीं होंगे क्योंकि 2018 की डील के लिए पहले से ही छूट मिली हुई है.

इन अतिरिक्त यूनिट्स को पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर तैनात किए जाने की उम्मीद है, ताकि स्वदेशी 'प्रोजेक्ट कुशा' के साथ मिलकर भारत के लेयर्ड एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत किया जा सके.

IAF अलग से 10,000 करोड़ रुपये की मिसाइल खरीद की प्रक्रिया भी कर रही है ताकि 'सिंदूर' (Sindoor) के दौरान इस्तेमाल किए गए S-400 इंटरसेप्टर्स की भरपाई की जा सके. सभी 10 स्क्वाड्रन के तैनात हो जाने पर, अधिकारियों का कहना है कि भारत का एयरस्पेस ड्रोन, 4.5 जेनरेशन के फाइटर जेट्स और बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए लगभग अभेद्य हो जाएगा.

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