नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने शनिवार को मध्यम दूरी की मिसाइल के प्रक्षेपण की देखरेख की. सरकारी न्यूज एजेंसी KCNA ने रविवार को रिपोर्ट दी कि यह मिसाइल पूर्वी नॉर्थ कोरिया से छोड़ी गई और पूर्वी समुद्र में लगभग 1000 किलोमीटर दूर निर्धारित लक्ष्य पर सटीक रूप से गिरी.
किम जोंग-उन ने इसे 'प्रतिरोध क्षमता का अभ्यास' बताया. इस परीक्षण का उद्देश्य हाइपरसोनिक हथियार प्रणाली संचालित करने वाले सैनिकों को प्रशिक्षित करना और देश की युद्ध प्रतिरोध क्षमता की विश्वसनीयता, दक्षता तथा गतिशीलता का आकलन करना था.
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यह लॉन्चिंग साल 2026 में नॉर्थ कोरिया द्वारा किए गए 10 से अधिक मिसाइल परीक्षणों की सीरीज का नवीनतम हिस्सा है. दक्षिण कोरिया की सेना ने शनिवार को कहा कि उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगाया और आकलन किया कि यह पूर्वी समुद्र की ओर 700 किलोमीटर से अधिक उड़ी.
जापान की विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर गिरने का दावा किया गया. किम यो-जोंग, जो किम जोंग-उन की बहन और सत्तारूढ़ पार्टी की वरिष्ठ अधिकारी हैं, ने बताया कि दक्षिण कोरिया और जापान हथियार की उड़ान को ट्रैक करने में विफल रहे क्योंकि मिसाइल ने विशेष वेव-लाइक ट्रैजेक्टरी मोड अपनाया.

डीएमजेड में बढ़ता तनाव
यह परीक्षण कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव बढ़ने के बीच हुआ. पिछले महीने डिमिलिटराइज्ड जोन में लैंडमाइन विस्फोट से तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हुए थे. दक्षिण कोरिया और संयुक्त राष्ट्र कमांड की जांच ने नॉर्थ कोरिया पर आरोप लगाया कि उसने सैन्य सीमा रेखा के दक्षिण में बारूदी सुरंगें बिछाईं, जो युद्धविराम समझौते का उल्लंघन है.
नॉर्थ कोरिया ने जिम्मेदारी से इनकार किया. किम यो-जोंग ने शुक्रवार को तीखे बयान में सियोल की माफी मांग को खारिज करते हुए आरोपों को बेबुनियाद बताया. किम जोंग-उन ने कहा कि प्योंगयांग को अपने दुश्मनों को अपनी रणनीतिक आक्रामक हथियारों की विश्वसनीयता और घातकता का अहसास कराने के प्रयास जारी रखने चाहिए.
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उन्होंने दोहराया कि परमाणु युद्ध प्रतिरोध क्षमता विकसित करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है. कुछ रिपोर्टों में मिसाइल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायता प्राप्त बताया गया, जिसमें मिड-कोर्स या टर्मिनल फेज में सुधार के लिए एआई का उपयोग और मैन्यूवरिंग रीएंट्री व्हीकल का दावा किया गया.
तकनीकी दावे और क्षेत्रीय प्रभाव
केसीएनए के अनुसार यह इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल थी जो हाइपरसोनिक क्षमता वाली रणनीतिक प्रणाली का हिस्सा है. दक्षिण कोरियाई आकलन में दूरी कम बताई गई जबकि नॉर्थ कोरिया ने 1000 किमी का दावा किया. यह अंतर ट्रैकिंग क्षमताओं की सीमाओं को उजागर करता है.

नॉर्थ कोरिया लगातार अपनी मिसाइल तकनीक को उन्नत कर रहा है ताकि क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों और अमेरिका जैसी बड़ी शक्तियों को रोकथाम का संदेश दिया जा सके. इस तरह के परीक्षण क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाते हैं. जापान और दक्षिण कोरिया अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करते हैं जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव का विकल्प तलाशता है.
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नॉर्थ कोरिया का यह रुख उसकी सुरक्षा चिंताओं और आंतरिक राजनीतिक संदेश दोनों को दर्शाता है. किम जोंग-उन का प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण सैनिकों और जनता को नेतृत्व की मजबूती का संकेत देता है. डीएमजेड में घटनाओं के बाद तनाव कम होने के बजाय बढ़ रहा है. नॉर्थ कोरिया अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को और विकसित करने पर जोर दे रहा है.
विश्लेषक मानते हैं कि ऐसे परीक्षण बातचीत के दरवाजे बंद रखने या दबाव बनाने का माध्यम बन सकते हैं. दक्षिण कोरिया की मांगें और नॉर्थ कोरिया का इनकार दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी को रेखांकित करते हैं. कुल मिलाकर यह घटना कोरियाई प्रायद्वीप की अस्थिर सुरक्षा स्थिति को फिर से उजागर करती है जहां सैन्य प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी एक-दूसरे को बढ़ावा दे रहे हैं.