हाइपरसोनिक मिसाइल
हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) लगभग 90 किमी की ऊंचाई से नीचे के वातावरण के माध्यम से Mach 5 से अधिक गति से उड़ता है. 2020 तक हाइपरसोनिक की गति, Mach 25+ तक हासिल कर ली गई है. दो चरण वाला बंपर रॉकेट से हाइपरसोनिक उड़ान बनाया गया, जिसमें WAC Corporal के पहले चरण के शीर्ष पर वी -2 और द्वितीय चरण सेट शामिल था. फरवरी 1949 में, व्हाइट सैंड्स में, हाइपरसोनिक रॉकेट की गति 8,288.12 किमी/घंटा यानी लगभग Mach 6.7 तक पहुंच गया था (Speed of Hypersonic Missile).
ब्रह्मोस-2 रूसी जिरकॉन मिसाइल पर आधारित हाइपरसोनिक वर्जन हो सकता है. 7408 km/hr से अधिक गति हो सकती है. रूसी स्क्रैमजेट और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स का मेल हो सकता है.
भारत LR-AShM हाइपरसोनिक मिसाइल को 2027-2029 में शामिल करने जा रहा है. 1500 किमी रेंज वाली यह मिसाइल शुरुआती 10-15 यूनिट प्रति वर्ष उत्पादन से शुरू होगी, जो बाद में 25-40 तक बढ़ेगी.
हूती विद्रोही चीन से मिले पुर्जों से ईरान जैसी मध्यम दूरी की मिसाइल खुद बना रहे हैं. इसकी रेंज 1900 किलोमीटर तक है, जो सऊदी अरब और इजरायल तक पहुंच सकती है.
दक्षिण कोरिया ने घरेलू हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का सफल पहला परीक्षण किया. यह 6174 km/hr से ज्यादा गति पर मैन्यूवर कर समुद्र में लक्ष्य भेदने में सफल रहा. उत्तर कोरिया से होड़ बढ़ी है.
अमेरिकी वायुसेना ने ऑस्ट्रेलिया में HACM हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल का पहला रिलीज परीक्षण किया. स्क्रैमजेट से लैस दो स्टेज वाली मिसाइल. 2027 में खरीदने का टारगेट रखा गया है.
रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस के साथ 661.50 करोड़ का डील किया है. नौसेना के युद्धपोतों के लिए फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदें जाएंगे. 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा.
नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने शनिवार को मध्यम दूरी की मिसाइल का परीक्षण किया. मिसाइल ने 1000 किमी उड़ान भरी और लक्ष्य भेदा. यह अभ्यास परमाणु प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने के लिए था.
दुनिया की टॉप 10 हाइपरसोनिक मिसाइलों की लिस्ट में चीन का डीएफ-17 सबसे ऊपर है. रूस के जिरकॉन-किंझल, अमेरिका के ARRW-CPS, भारत का ब्रह्मोस-2 शामिल है. गति, रेंज और स्टील्थ क्षमता आधुनिक युद्ध को बदल रही है.
अमेरिकी नौसेना ने ब्लैकबीयर्ड हाइपरसोनिक मिसाइल का पहला फ्लाइट टेस्ट फुटेज जारी किया. यह F/A-18E/F पर लगे हुए दिखा. 6174 km/hr से तेज स्पीड. करीब 2.88 करोड़ रुपये प्रति मिसाइल कीमत है. 2028 तक तैनाती का लक्ष्य है.
बलूचिस्तान के आसमान में चमकीली वस्तु दिखाई पड़ी है. इसे बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च माना जा रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में हाइपरसोनिक परीक्षण और री-एंट्री व्हीकल का भी जिक्र है. 23 सितंबर का अघोषित परीक्षण फेल होने का शक है.
रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर ओनिक्स-एम, जिरकॉन, इस्कंदर-एम समेत मिसाइलों और सैकड़ों ड्रोन से हमला किया. कीव, द्निप्रो समेत 10 क्षेत्रों में असर हुआ है. यूक्रेन ने ज्यादातर खतरे रोके लेकिन नुकसान हुआ है.
यूक्रेन की रक्षा खुफिया के अनुसार रूस ने नॉर्थ कोरिया से केएन-30 बैलिस्टिक मिसाइलें प्राप्त की हैं. ये मिसाइलें यूक्रेन पर हमले के लिए इस्तेमाल हो सकती हैं. जुलाई 2026 तक रूस के पास करीब 50 ऐसी नॉर्थ कोरियाई मिसाइलें थीं.
संसदीय समिति ने हाइपरसोनिक मिसाइल, सुपरसोनिक ग्लाइड हथियार और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए अलग बजट हेड बनाने की सिफारिश की है. डीआरडीओ इन पर तेजी से काम कर रहा है.
चीन ने पहली बार कई DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल लॉन्चर सार्वजनिक रूप से दिखाया हैं. रक्षा एक्सपर्ट इसे इस मिसाइल की पूरी कॉम्बैट तैयारी का संकेत मान रहे हैं. जानिए DF-17 क्यों सबसे एडवांस हथियारों में गिनी जाती है.
चीन ने पहली बार DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल के कई लॉन्चर सार्वजनिक रूप से दिखाए हैं. रक्षा एक्सपर्ट इसे व्यापक कॉम्बैट तैनाती का संकेत मान रहे हैं. जानिए इसकी रफ्तार, रेंज और प्रमुख क्षमताएं. DF-17 को मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकता है, जिससे इसकी तैनाती ज़्यादा लचीली मानी जाती है.
भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में 6-7 अगस्त 2026 को लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण का नोटैम जारी किया है. रेंज करीब 2530 किलोमीटर है. पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हुई हैं.
ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों से अमेरिका-इजरायल डिफेंस को चकमा देना शुरू कर दिया है. तेज स्पीड, मैन्यूवर और बेहतर निशाना रूस की सैटेलाइट और चीन के टारगेट टेक की मदद से पॉसिबल लग रहा है.
रूस ने यूक्रेन पर 29 हाई-स्पीड मिसाइलें दागीं, जिनको एयर डिफेंस सिस्टम रोक नहीं पाया. कीव में हमलों में 11 लोग मारे गए हैं. यूक्रेन में इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी है, जिसका रूस फायदा उठा रहा है.
ट्रंप प्रशासन का गोल्डन डोम फॉर अमेरिका प्रोजेक्ट अपना पहला लाइव इंटरसेप्ट टेस्ट पास कर गया है. पेंटागन ने कहा कि डायरेक्टेड एनर्जी और DDAD सिस्टम ने कई खतरे वाले ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों को नष्ट कर दिया.
ब्रह्मोस मिसाइल की अचूक मारक क्षमता और ऑपरेशन सिंदूर में इसके प्रदर्शन को देखते हुए अब रूसी सेना भी इसे शामिल करने जा रही है. फिलीपींस के बाद रूस के साथ यह रक्षा सौदा ऐतिहासिक होगा.
इजरायल के पास न्यूक्लियर और हाइपरसोनिक गति वाली जेरिको सीरीज की घातक बैलिस्टिक मिसाइल है. जबकि ईरान के पास फतेह, खैबर शेकन और फत्ताह जैसी 3000 से अधिक मिसाइलों का जखीरा है.