हाइपरसोनिक मिसाइल
हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) लगभग 90 किमी की ऊंचाई से नीचे के वातावरण के माध्यम से Mach 5 से अधिक गति से उड़ता है. 2020 तक हाइपरसोनिक की गति, Mach 25+ तक हासिल कर ली गई है. दो चरण वाला बंपर रॉकेट से हाइपरसोनिक उड़ान बनाया गया, जिसमें WAC Corporal के पहले चरण के शीर्ष पर वी -2 और द्वितीय चरण सेट शामिल था. फरवरी 1949 में, व्हाइट सैंड्स में, हाइपरसोनिक रॉकेट की गति 8,288.12 किमी/घंटा यानी लगभग Mach 6.7 तक पहुंच गया था (Speed of Hypersonic Missile).
तुर्की की पहली ICBM यिल्दिरिमहान 6000 किमी रेंज और 31 हजार km/hr की रफ्तार के साथ दुनिया के लिए चुनौती है. भारत-इजरायल इसके निशाने पर हैं, जो भविष्य में रक्षा समीकरणों को बदल सकती है.
अमेरिका की सेना ने ईरान के खिलाफ मध्य पूर्व में डार्क ईगल हाइपरसोनिक मिसाइल तैनात करने का रिक्वेस्ट किया है. यह अमेरिका का पहला हाइपरसोनिक हथियार है जो 6174 km/hr से तेज गति से उड़ता है. इसकी रेंज 2780 किलोमीटर है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि चीन को रोकने के लिए नई ट्रंप-क्लास बैटलशिप बनाई जाएगी. 3 जहाजों की लागत 43 अरब डॉलर बताई गई है. ये युद्धपोत हाइपरसोनिक मिसाइल, रेलगन और लेजर हथियारों से लैस होंगे.
अमेरिका और चीन में टॉप डिफेंस वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतें और गायब होने की घटनाएं बढ़ रही हैं. अमेरिका में 11 से ज्यादा वैज्ञानिक गायब या मृत पाए गए, जबकि चीन में 9 वैज्ञानिकों की मौत हुई. ये सभी न्यूक्लियर, हाइपरसोनिक, AI और स्पेस रिसर्च जैसे क्षेत्रों से जुड़े थे. FBI जांच कर रही है, साजिश की आशंका जताई जा रही है.
ईरान युद्ध में अमेरिका ने अब तक टोमाहॉक, JASSM-ER और GBU-57 जैसे हथियार इस्तेमाल किए, लेकिन AGM-183 ARRW, Dark Eagle, Rapid Dragon, GBU-72 और MOAB अभी पूरी तरह नहीं तैनात नहीं किए है. ये हाइपरसोनिक मिसाइलें और भारी बंकर बस्टर हैं जो ईरान के गहरे अंडरग्राउंड बंकरों को कुछ ही मिनटों में तबाह कर सकते हैं. क्या ट्रंप अब इन घातक हथियारों को निकालेंगे?
अमेरिका के पास बचा है क्लस्टर बम से भी खतरनाक हथियार, ईरान पर अब तक ये वेपन नहीं हुए इस्तेमाल. ये हथियार हाइपरसोनिक स्पीड, खास बंकर भेदने की क्षमता और बड़े पैमाने पर हमला करने की ताकत रखते हैं. इनके नाम हैं, AGM-183 ARRW हाइपरसोनिक एयर लॉन्च्ड रैपिड रिस्पॉन्स वेपन, Dark Eagle लॉन्ग रेंज हाइपरसोनिक वेपन, Rapid Dragon पैलेटाइज्ड क्रूज मिसाइल सिस्टम, और परमाणु हथियार, जो बहुत ज्यादा घातक हैं.
पिछले 28 दिनों से अमेरिका-इजरायल की भारी बमबारी के बावजूद ईरान के 5 घातक हथियार अब भी चुनौती दे रहे हैं. फतह हाइपरसोनिक मिसाइल, ज़ोल्फगार बैलिस्टिक मिसाइल, शाहेद-136 ड्रोन, शाहाब-3 और खोर्रमशहर-4 मिसाइलें तेज, सस्ती और रडार से छिपने में माहिर हैं. ये हथियार दुश्मन के डिफेंस को भेदकर युद्ध जारी रखे हुए हैं.
ईरान की वॉर स्ट्रैटजी तीन फेज में है- पहले ब्लाइंड... सस्ते स्वार्म ड्रोन और मिसाइलों से अमेरिका-इजरायल के रडार और कमांड सेंटर को नष्ट करना. दूसरा डिप्लीट... कम लागत वाले हथियारों से दुश्मन के महंगे इंटरसेप्टर खत्म करवाना. तीसरा ओवरव्हेल्म... कमजोर डिफेंस पर हाइपरसोनिक और बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़े हमले करना.
चीन और रूस, ईरान के हथियारों के सबसे बड़े सहयोगी हैं. रूस ईरान को Su-35 फाइटर जेट, S-300 एयर डिफेंस सिस्टम, वेरबा मिसाइलें और अटैक हेलीकॉप्टर सीधे सप्लाई करता रहा है. चीन मुख्य रूप से मिसाइल पार्ट्स, केमिकल्स तथा ड्रोन कंपोनेंट्स देता है. दोनों देशों के साथ जॉइंट प्रोडक्शन भी चल रहा है जैसे रूस में शाहेद ड्रोन बनाना.
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच अब तक 5-6 बार छोटी जंग हुई हैं. 1988 में अमेरिका ने ईरान की नौसेना तबाह की. 2020 में सुलेमानी की मौत पर मिसाइल हमले हुए. 2024 में दो बार इजरायल पर ईरान ने ड्रोन दागे.2025 की 12-दिन की जंग में ईरान को भारी नुकसान हुआ. हर बार इजरायल-अमेरिका जीते. अभी 2026 की जंग जारी है.
भारत को इजरायल अपनी सीक्रेट गोल्डन होराइजन एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM) ऑफर कर सकता है. यह Su-30MKI से लॉन्च होगी. रेंज 800-2000 किमी है. हाइपरसोनिक स्पीड से तेज. दुश्मन की डिफेंस के बाहर से गहरे बंकरों पर सटीक हमला कर सकेगी. इससे पाकिस्तान और चीन पर मजबूत डिटरेंस बनेगा, क्योंकि भारत दूर से ही उनके महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बना सकेगा.
इजरायल का एरो-4 इंटरसेप्टर सिस्टम जल्द होगा ऑपरेशनल होगा. यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स और घुमावदार बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करेगा. शूट-लुक-शूट और AI सेंसर से असली खतरे पहचानता है. इजरायल के मल्टी-लेयर्ड डिफेंस का ऊपरी हिस्सा है. एरो-3 और डेविड्स स्लिंग के साथ काम करेगा.
DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों की भूमिका अहम रही. अब SFDR तकनीक सफल हो चुकी है. लंबी रेंज की एंटी-शिप मिसाइल का तीसरा टेस्ट जल्द ही होगा. हाइपरसोनिक मिसाइल के अलग-अलग वर्जन पर काम हो रहा है. ब्रह्मोस-एनजी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी है. रेंज 800 किमी तक बढ़ेगी.
ईरान के 5 बड़े हथियार अमेरिकी नौसेना को मिडिल ईस्ट में चुनौती दे सकते हैं. फतह हाइपरसोनिक मिसाइलें, खलीज-ए-फार्स एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें, सेज्जिल/खोर्रमशहर बैलिस्टिक मिसाइलें, कादर/गादर क्रूज मिसाइलें और शाहेद स्वार्म ड्रोन्स. ये स्वार्म अटैक, सैचुरेशन और A2/AD रणनीति से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यूएस कैरियर ग्रुप को महंगा/जोखिम भरा बना सकते हैं.
प्रलय की घड़ी यानी डूम्सडे क्लॉक अब मिडनाइट से सिर्फ 85 सेकंड पहले सेट की गई है – इतिहास में सबसे करीब. वैज्ञानिकों ने रूस, चीन, अमेरिका की आक्रामकता, यूक्रेन-मिडिल ईस्ट युद्ध, न्यूक्लियर संधियों का टूटना, AI के खतरे, डिसइंफॉर्मेशन और जलवायु परिवर्तन को मुख्य वजह बताया है. वैश्विक लीडरशिप की कमी से खतरा बढ़ रहा है. न्यूक्लियर युद्ध का जोखिम ज्यादा है.
DRDO की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में दिखाई गई. ये भारत के भविष्य का बह्मास्त्र है. इसकी रेंज 1500 किमी है. दुश्मन के रडार इसे पकड़ नहीं पाएंगे. भारतीय नौसेना के लिए बनी यह मिसाइल हिंद महासागर में समुद्री हमले की क्षमता बढ़ाएगी. भविष्य में रेंज 3000-3500 किमी तक होगी.
DRDO की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) पहली बार 26 जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस परेड में दिखाई जाएगी. इसकी रेंज 1500 किमी है. हाइपरसोनिक स्पीड से दुश्मन रडार इसे पकड़ नहीं पाते. भारतीय नौसेना के लिए बन रही यह मिसाइल हिंद महासागर में समुद्री हमले की क्षमता बढ़ाएगी. भविष्य में रेंज 3000-3500 किमी तक होगी.
भारत का अग्नि मिसाइल सिस्टम स्वदेशी परमाणु डिटरेंस की मजबूत ढाल है. अग्नि-5 की MIRV तकनीक से एक मिसाइल कई लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकती है. रेंज 5000+ किमी और स्पीड 29635 km/hr है. पूरी तरह मोबाइल है. अगर पाकिस्तान या चीन युद्ध शुरू करें, तो यह सेकंड स्ट्राइक से दुश्मन के प्रमुख ठिकानों को तबाह कर सकता है.
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के गार्ड्स पर C-130 विमान से डायरेक्टेड एनर्जी वेपन का इस्तेमाल हुआ. ये ईयर ब्लीड सोनिक वेव था. जिससे गार्ड्स के कान से खून निकलने लगा. उल्टियां होने लगीं. लकवा आया. ये एक तरह का फ्यूचर वेपन है, जिसमें लेजर, हाइपरसोनिक मिसाइल, AI ड्रोन स्वॉर्म्स प्रमुख भी आते हैं.
पाकिस्तान और चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. पाक की ARFC में फतह सीरीज (750-1000 किमी) तेजी से बढ़ रही है, जबकि चीन की PLARF दुनिया की सबसे बड़ी है- 1250+ मिसाइलें, 600+ परमाणु वॉरहेड और हाइपरसोनिक तकनीक है. भारत की मिसाइलें (अग्नि-5, ब्रह्मोस) मजबूत हैं, लेकिन संख्या और टेक्नोलॉजी में पीछे हैं. दो-मोर्चे पर जंग का खतरा गंभीर परिणाम ला सकता है.
DRDO ने हैदराबाद में फुल-स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कम्बस्टर का 12 मिनट (720+ सेकंड) लंबा सफल ग्राउंड टेस्ट किया. यह भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोग्राम का बड़ा मील का पत्थर है. अब हाइपरसोनिक स्पीड वाली मिसाइलें रडार से बचकर दुश्मन को चुनौती देंगी. DRDO इस समय 12 हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है.