हाइपरसोनिक मिसाइल
हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) लगभग 90 किमी की ऊंचाई से नीचे के वातावरण के माध्यम से Mach 5 से अधिक गति से उड़ता है. 2020 तक हाइपरसोनिक की गति, Mach 25+ तक हासिल कर ली गई है. दो चरण वाला बंपर रॉकेट से हाइपरसोनिक उड़ान बनाया गया, जिसमें WAC Corporal के पहले चरण के शीर्ष पर वी -2 और द्वितीय चरण सेट शामिल था. फरवरी 1949 में, व्हाइट सैंड्स में, हाइपरसोनिक रॉकेट की गति 8,288.12 किमी/घंटा यानी लगभग Mach 6.7 तक पहुंच गया था (Speed of Hypersonic Missile).
भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में 6-7 अगस्त 2026 को लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण का नोटैम जारी किया है. रेंज करीब 2530 किलोमीटर है. पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हुई हैं.
ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों से अमेरिका-इजरायल डिफेंस को चकमा देना शुरू कर दिया है. तेज स्पीड, मैन्यूवर और बेहतर निशाना रूस की सैटेलाइट और चीन के टारगेट टेक की मदद से पॉसिबल लग रहा है.
रूस ने यूक्रेन पर 29 हाई-स्पीड मिसाइलें दागीं, जिनको एयर डिफेंस सिस्टम रोक नहीं पाया. कीव में हमलों में 11 लोग मारे गए हैं. यूक्रेन में इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी है, जिसका रूस फायदा उठा रहा है.
ट्रंप प्रशासन का गोल्डन डोम फॉर अमेरिका प्रोजेक्ट अपना पहला लाइव इंटरसेप्ट टेस्ट पास कर गया है. पेंटागन ने कहा कि डायरेक्टेड एनर्जी और DDAD सिस्टम ने कई खतरे वाले ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों को नष्ट कर दिया.
ब्रह्मोस मिसाइल की अचूक मारक क्षमता और ऑपरेशन सिंदूर में इसके प्रदर्शन को देखते हुए अब रूसी सेना भी इसे शामिल करने जा रही है. फिलीपींस के बाद रूस के साथ यह रक्षा सौदा ऐतिहासिक होगा.
इजरायल के पास न्यूक्लियर और हाइपरसोनिक गति वाली जेरिको सीरीज की घातक बैलिस्टिक मिसाइल है. जबकि ईरान के पास फतेह, खैबर शेकन और फत्ताह जैसी 3000 से अधिक मिसाइलों का जखीरा है.
भारतीय नौसेना का प्रोजेक्ट 18 अब डेस्ट्रॉयर नहीं रहा. क्रूजर स्तर का युद्धपोत बन गया है. 144 VLS सेल, लेजर हथियार, ब्रह्मोस, कुशा मिसाइल और स्वदेशी रडार से लैस जहाज समंदर का महाकिलर होगा.
ईरान ने अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी खोलकर अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें बरसाईं. उसके पास अब भी फतह, खैबर शेकन और सेज्जिल जैसी सैकड़ों मिसाइलें बची हुई हैं, जो 2000 KM तक मार कर सकती हैं.
रूस ने यूक्रेन के कीव, खारकीव और निप्रो जैसे कई शहरों पर 60 से अधिक घातक मिसाइलों से भीषण हमला किया है. इस हमले में रिहायशी इमारतें तबाह हो गईं. कई लोग मारे गए.
रूस ने कीव पर हमले के लिए अपनी सबसे घातक मिसाइलों का इस्तेमाल किया. रूसी रक्षा मंत्रालय ने खुद कहा है कि रूसी सेना ने ओरेश्निक, इस्कंदर, किन्झल और ज़िरकॉन मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमले किए. यूक्रेनी सैन्य कमान सुविधाओं, हवाई अड्डों और सैन्य-औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर ये अटैक किए गए. देखें वीडियो.
रूस ने न्यूक्लियर ट्रायड का बड़ा अभ्यास किया. 72 घंटे में 64,000 सैनिकों, मिसाइलों, विमानों और पनडुब्बियों के साथ सरमत और जिरकॉन मिसाइल दागी. विशेषज्ञ इसे NATO को चेतावनी और संभावित जंग की तैयारी मान रहे हैं.
पुतिन रूस में परमाणु आपदा वाले हथियार बना रहे हैं. पोसाइडन अंडरवाटर परमाणु ड्रोन, सरमत मिसाइल, बुरेवेस्तनिक न्यूक्लियर क्रूज मिसाइल, हाइपरसोनिक एवनगार्ड-जिरकॉन और स्पेस हथियार शामिल हैं. ये हथियार पश्चिमी देशों को डराने के लिए तैयार किए हैं.
रूस ने सरमत मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. यह परमाणु क्षमता वाली इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 35 हजार किलोमीटर से ज्यादा हो सकती है. राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि साल के अंत तक इसे तैनात कर दिया जाएगा.
DRDO ने ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से अग्नि-5 मिसाइल का एडवांस MIRV वर्जन का सफल टेस्ट किया. एक मिसाइल से कई अलग-अलग टारगेट्स को नष्ट कर सकती है. यह तकनीक भारत की सेकंड स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करेगी.
DRDO के बाद भाजपा ने घोषणा की कि अग्नि-6 मिसाइल इतिहास रचने को तैयार है. 10,000 किमी से ज्यादा रेंज और MIRV तकनीक वाली यह ICBM भारत को अमेरिका, रूस, चीन जैसे देशों की कतार में खड़ा करेगी.
तुर्की की पहली ICBM यिल्दिरिमहान 6000 किमी रेंज और 31 हजार km/hr की रफ्तार के साथ दुनिया के लिए चुनौती है. भारत-इजरायल इसके निशाने पर हैं, जो भविष्य में रक्षा समीकरणों को बदल सकती है.
अमेरिका की सेना ने ईरान के खिलाफ मध्य पूर्व में डार्क ईगल हाइपरसोनिक मिसाइल तैनात करने का रिक्वेस्ट किया है. यह अमेरिका का पहला हाइपरसोनिक हथियार है जो 6174 km/hr से तेज गति से उड़ता है. इसकी रेंज 2780 किलोमीटर है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि चीन को रोकने के लिए नई ट्रंप-क्लास बैटलशिप बनाई जाएगी. 3 जहाजों की लागत 43 अरब डॉलर बताई गई है. ये युद्धपोत हाइपरसोनिक मिसाइल, रेलगन और लेजर हथियारों से लैस होंगे.
अमेरिका और चीन में टॉप डिफेंस वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतें और गायब होने की घटनाएं बढ़ रही हैं. अमेरिका में 11 से ज्यादा वैज्ञानिक गायब या मृत पाए गए, जबकि चीन में 9 वैज्ञानिकों की मौत हुई. ये सभी न्यूक्लियर, हाइपरसोनिक, AI और स्पेस रिसर्च जैसे क्षेत्रों से जुड़े थे. FBI जांच कर रही है, साजिश की आशंका जताई जा रही है.
ईरान युद्ध में अमेरिका ने अब तक टोमाहॉक, JASSM-ER और GBU-57 जैसे हथियार इस्तेमाल किए, लेकिन AGM-183 ARRW, Dark Eagle, Rapid Dragon, GBU-72 और MOAB अभी पूरी तरह नहीं तैनात नहीं किए है. ये हाइपरसोनिक मिसाइलें और भारी बंकर बस्टर हैं जो ईरान के गहरे अंडरग्राउंड बंकरों को कुछ ही मिनटों में तबाह कर सकते हैं. क्या ट्रंप अब इन घातक हथियारों को निकालेंगे?
अमेरिका के पास बचा है क्लस्टर बम से भी खतरनाक हथियार, ईरान पर अब तक ये वेपन नहीं हुए इस्तेमाल. ये हथियार हाइपरसोनिक स्पीड, खास बंकर भेदने की क्षमता और बड़े पैमाने पर हमला करने की ताकत रखते हैं. इनके नाम हैं, AGM-183 ARRW हाइपरसोनिक एयर लॉन्च्ड रैपिड रिस्पॉन्स वेपन, Dark Eagle लॉन्ग रेंज हाइपरसोनिक वेपन, Rapid Dragon पैलेटाइज्ड क्रूज मिसाइल सिस्टम, और परमाणु हथियार, जो बहुत ज्यादा घातक हैं.