हाइपरसोनिक मिसाइल
हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) लगभग 90 किमी की ऊंचाई से नीचे के वातावरण के माध्यम से Mach 5 से अधिक गति से उड़ता है. 2020 तक हाइपरसोनिक की गति, Mach 25+ तक हासिल कर ली गई है. दो चरण वाला बंपर रॉकेट से हाइपरसोनिक उड़ान बनाया गया, जिसमें WAC Corporal के पहले चरण के शीर्ष पर वी -2 और द्वितीय चरण सेट शामिल था. फरवरी 1949 में, व्हाइट सैंड्स में, हाइपरसोनिक रॉकेट की गति 8,288.12 किमी/घंटा यानी लगभग Mach 6.7 तक पहुंच गया था (Speed of Hypersonic Missile).
इजरायल का एरो-4 इंटरसेप्टर सिस्टम जल्द होगा ऑपरेशनल होगा. यह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स और घुमावदार बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करेगा. शूट-लुक-शूट और AI सेंसर से असली खतरे पहचानता है. इजरायल के मल्टी-लेयर्ड डिफेंस का ऊपरी हिस्सा है. एरो-3 और डेविड्स स्लिंग के साथ काम करेगा.
DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों की भूमिका अहम रही. अब SFDR तकनीक सफल हो चुकी है. लंबी रेंज की एंटी-शिप मिसाइल का तीसरा टेस्ट जल्द ही होगा. हाइपरसोनिक मिसाइल के अलग-अलग वर्जन पर काम हो रहा है. ब्रह्मोस-एनजी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी है. रेंज 800 किमी तक बढ़ेगी.
ईरान के 5 बड़े हथियार अमेरिकी नौसेना को मिडिल ईस्ट में चुनौती दे सकते हैं. फतह हाइपरसोनिक मिसाइलें, खलीज-ए-फार्स एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें, सेज्जिल/खोर्रमशहर बैलिस्टिक मिसाइलें, कादर/गादर क्रूज मिसाइलें और शाहेद स्वार्म ड्रोन्स. ये स्वार्म अटैक, सैचुरेशन और A2/AD रणनीति से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यूएस कैरियर ग्रुप को महंगा/जोखिम भरा बना सकते हैं.
प्रलय की घड़ी यानी डूम्सडे क्लॉक अब मिडनाइट से सिर्फ 85 सेकंड पहले सेट की गई है – इतिहास में सबसे करीब. वैज्ञानिकों ने रूस, चीन, अमेरिका की आक्रामकता, यूक्रेन-मिडिल ईस्ट युद्ध, न्यूक्लियर संधियों का टूटना, AI के खतरे, डिसइंफॉर्मेशन और जलवायु परिवर्तन को मुख्य वजह बताया है. वैश्विक लीडरशिप की कमी से खतरा बढ़ रहा है. न्यूक्लियर युद्ध का जोखिम ज्यादा है.
DRDO की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में दिखाई गई. ये भारत के भविष्य का बह्मास्त्र है. इसकी रेंज 1500 किमी है. दुश्मन के रडार इसे पकड़ नहीं पाएंगे. भारतीय नौसेना के लिए बनी यह मिसाइल हिंद महासागर में समुद्री हमले की क्षमता बढ़ाएगी. भविष्य में रेंज 3000-3500 किमी तक होगी.
DRDO की लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) पहली बार 26 जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस परेड में दिखाई जाएगी. इसकी रेंज 1500 किमी है. हाइपरसोनिक स्पीड से दुश्मन रडार इसे पकड़ नहीं पाते. भारतीय नौसेना के लिए बन रही यह मिसाइल हिंद महासागर में समुद्री हमले की क्षमता बढ़ाएगी. भविष्य में रेंज 3000-3500 किमी तक होगी.
भारत का अग्नि मिसाइल सिस्टम स्वदेशी परमाणु डिटरेंस की मजबूत ढाल है. अग्नि-5 की MIRV तकनीक से एक मिसाइल कई लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकती है. रेंज 5000+ किमी और स्पीड 29635 km/hr है. पूरी तरह मोबाइल है. अगर पाकिस्तान या चीन युद्ध शुरू करें, तो यह सेकंड स्ट्राइक से दुश्मन के प्रमुख ठिकानों को तबाह कर सकता है.
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के गार्ड्स पर C-130 विमान से डायरेक्टेड एनर्जी वेपन का इस्तेमाल हुआ. ये ईयर ब्लीड सोनिक वेव था. जिससे गार्ड्स के कान से खून निकलने लगा. उल्टियां होने लगीं. लकवा आया. ये एक तरह का फ्यूचर वेपन है, जिसमें लेजर, हाइपरसोनिक मिसाइल, AI ड्रोन स्वॉर्म्स प्रमुख भी आते हैं.
पाकिस्तान और चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. पाक की ARFC में फतह सीरीज (750-1000 किमी) तेजी से बढ़ रही है, जबकि चीन की PLARF दुनिया की सबसे बड़ी है- 1250+ मिसाइलें, 600+ परमाणु वॉरहेड और हाइपरसोनिक तकनीक है. भारत की मिसाइलें (अग्नि-5, ब्रह्मोस) मजबूत हैं, लेकिन संख्या और टेक्नोलॉजी में पीछे हैं. दो-मोर्चे पर जंग का खतरा गंभीर परिणाम ला सकता है.
DRDO ने हैदराबाद में फुल-स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कम्बस्टर का 12 मिनट (720+ सेकंड) लंबा सफल ग्राउंड टेस्ट किया. यह भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोग्राम का बड़ा मील का पत्थर है. अब हाइपरसोनिक स्पीड वाली मिसाइलें रडार से बचकर दुश्मन को चुनौती देंगी. DRDO इस समय 12 हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है.
DRDO ने 9 जनवरी 2026 को हैदराबाद में फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कंबस्टर का 12 मिनट से ज्यादा ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम की मजबूत नींव बताया. यह सफलता भारत को अमेरिका, रूस, चीन के साथ हाइपरसोनिक तकनीक में आगे ले जाती है.
रूस ने यूक्रेन के ल्विव क्षेत्र में नई हाइपरसोनिक ओरेशनिक बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया, जो गैस स्टोरेज फैसिलिटी को निशाना बनाया. मिसाइल की स्पीड 13 हजार किमी/घंटा और MIRV तकनीक वाली थी. यानी एक ही मिसाइल से कई टारगेट हिट किए गए. रूस ने इसे पुतिन निवास पर कथित ड्रोन हमले का बदला बताया, जिसे यूक्रेन-अमेरिका ने खारिज किया था.
अमेरिका ने रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया है. इसे रूस ने समुद्री डकैती कहा है. रूसी डूमा डिप्टी झुरावलेव ने टॉरपीडो से अमेरिकी जहाज डुबोने की मांग भी की है. वेनेजुएला तेल संकट से तनाव बढ़ा है. रूस के हाइपरसोनिक हथियार जैसे सरमत, अवानगार्ड अमेरिका के लिए खतरा बने हुए हैं.
ईरान की सैन्य ताकत मध्य पूर्व में मजबूत है. 2025 ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में 16वें स्थान पर है. इसके पास हजारों मिसाइलें और ड्रोन हैं. ईरान से अमेरिका की दूरी बहुत ज्यादा है इसलिए ईरान वहां तक नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा. लेकिन अरब देशों में अमेरिकी बेस पर हमला करेगा. अमेरिका के लिए दूरी समस्या नहीं है.
रूस अपनी नई न्यूक्लियर हाइपरसोनिक मिसाइल ओरेश्निक को बेलारूस के क्रिचेव एयरबेस पर तैनात कर रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों से तेज निर्माण और लॉन्चर सुविधाएं दिख रही हैं. यह मिसाइल 12000 km/hr की स्पीड से उड़ती है. इसकी रेंज 5500 km तक है. यह कदम NATO को चेतावनी और यूरोप में रूस की ताकत बढ़ाने का राजनीतिक संदेश है.
यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशों के बीच रूस ने एक बार फिर ताकत दिखाई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की प्रस्तावित मुलाकात से ठीक पहले कीव पर बड़ा सैन्य हमला हुआ है.
यूक्रेन की राजधानी कीव पर 27 दिसंबर की रात रूस ने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया राजधानी और आसपास के इलाकों में कई जोरदार धमाके सुने गए
भारत ने 17-20 दिसंबर 2025 को बंगाल की खाड़ी में मिसाइल परीक्षण के लिए 3550 किमी का डेंजर जोन घोषित किया है. NOTAM जारी कर हवाई-सागरीय यातायात रोका जाएगा. संभावित K-4 SLBM या लंबी रेंज वाली मिसाइल का टेस्ट होने वाला है. चीन की जासूसी जहाजों पर नजर है. यह भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस को मजबूत करेगा.
पुतिन-मोदी शिखर सम्मेलन में आज रक्षा सौदों पर सबकी नजरें हैं. SU-57 फाइटर जेट (84+ विमान), S-500 एयर डिफेंस सिस्टम, अतिरिक्त S-400 रेजिमेंट, ब्रह्मोस-एनजी और Su-30 अपग्रेड पर बड़े ऐलान संभावित हैं. भारत में जॉइंट प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर जोर रहेगा. डिफेंस सेक्टर में उत्साह दिख रहा है. डिफेंस कंपनियों के शेयरों में उछाल की उम्मीद भी है.
आजतक के वर्ल्ड एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि भारत-रूस परमाणु सहयोग में बड़ी घोषणा जल्द आने वाली है. पुतिन ने कहा कि मोदी किसी के दबाव में नहीं झुकते. S-400, Su-57 जैसे सौदों पर बोले- हम सिर्फ हथियार नहीं, तकनीक और विश्वास साझा करते हैं. ब्रह्मोस, टी-90, कलाश्निकोव भारत में ही बन रहे हैं.
भारत को S-500 इसलिए चाहिए क्योंकि चीन-पाकिस्तान की हाइपरसोनिक मिसाइलों का मुकाबला करना है. S-400 इन तेज मिसाइलों को नहीं रोक सकता. S-500 एक साथ 12 बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें 600 किमी दूर मार गिरा सकता है. पुतिन की दिसंबर 2025 यात्रा में डील फाइनल हो सकती है. 100% तकनीक ट्रांसफर के साथ भारत में बनेगा.