बैलिस्टिक मिसाइल (बीएम) (Ballistic Missiles) किसी लक्ष्य पर हथियार पहुंचाने के लिए प्रोजेक्टाइल मोशन का उपयोग करती है. ये हथियार अपेक्षाकृत छोटे अवधि (brief periods) के दौरान ही संचालित होते हैं. यह मध्यम दूरी की मिसाइल है. बैलिस्टिक मिसाइलें क्रूज मिसाइलों से अलग होती हैं. एक बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्टाइल मोशन के साथ अपने दिशा के उड़ान को एक बड़े आर्क के रूप में ऊपर और नीचे की कर सकता है. वहीं क्रूज मिसाइलें हवा में स्व-चालित होती हैं, रॉकेट प्रोपेलेंट की बदौलत एक सीधी रेखा में और कम ऊंचाई पर उड़ती हैं.
कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (एसआरबीएम) आमतौर पर पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर रहती हैं, जबकि अधिकांश बड़ी मिसाइलें वायुमंडल के बाहर उड़ान भर सकती हैं.
एक बैलिस्टिक मिसाइल तीन भाग होते हैं:- संचालित उड़ान भाग(powered flight portion), मुक्त-उड़ान भाग (free-flight portion), और पुनः प्रवेश चरण (re-entry phase), जहां मिसाइल पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश करती है. कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों वायुमंडल के अंदर ही रहती हैं, इसलिए इनके उड़ान फेज आईसीबीएम के पहले दो चरण ही होते हैं.
बैलिस्टिक मिसाइलों को खास साइटों या मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है, जिसमें वाहन (जैसे, ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर), विमान, जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं.
पाकिस्तान ने हाल ही में फतेह-II मिसाइल का सफल ट्रेनिंग लॉन्च किया. यह 400 किमी रेंज वाली गाइडेड रॉकेट सिस्टम है, जिसमें एडवांस नेविगेशन और मैन्यूवर क्षमता है. इससे अमृतसर, जालंधर, चंडीगढ़ जैसे शहर रेंज में आते हैं, जबकि दिल्ली सीमा के करीब से लॉन्च होने पर खतरे में पड़ सकता है. भारत के पास प्रलय और ब्रह्मोस जैसी बेहतर मिसाइलें हैं.
ईरान संघर्ष में अमेरिका ने अपनी बेहतरीन मिसाइलें और अरबों डॉलर का गोला-बारूद फूंक दिया है जिससे उसकी सैन्य ताकत पर बुरा असर पड़ा है. 1200 पैट्रियट और 1000 टोमाहॉक मिसाइलों के खर्च के बाद अब अमेरिका के पास चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वियों के लिए पर्याप्त स्टॉक नहीं बचा है. करीब 2.9 लाख करोड़ रुपये की युद्ध लागत ने पेंटागन की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इस कमी को पूरा करने में कई साल लग सकते हैं
अमेरिका ने खाड़ी देशों को THAAD और पैट्रियट मिसाइल सुरक्षा सिस्टम दिए थे. लेकिन ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के सामने ये असफल साबित हुए हैं. अमेरिकी रक्षा कंपनियों के दावों के बावजूद, ये सिस्टम हमलों को रोकने में नाकाम रहे. इस विफलता ने क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर संकट में डाल दिया है.
उत्तर कोरिया के ताजा मिसाइल परीक्षण ने एक बार फिर क्षेत्रीय और वैश्विक चिंता बढ़ा दी है. लगातार हो रहे परीक्षणों से किम जोंग उन का आक्रामक रुख साफ नजर आ रहा है. जापान और दक्षिण कोरिया ने सुरक्षा कड़ी कर दी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी सतर्क हैं. इस कदम से क्षेत्र में तनाव बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन पर असर पड़ने की आशंका है
पाकिस्तान नौसेना ने अपनी स्वदेशी एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. वॉरशिप से छोड़ी गई मिसाइल ने टारगेट को तेज गति और सटीकता से मारा. इसमें एडवांस नेविगेशन है. जो खतरे को टालकर हमला करती है. यानी एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को धोखा दे सकती है.
युद्धविराम के दौरान ईरान अपने क्षतिग्रस्त भूमिगत मिसाइल बेसों से मलबा साफ कर रहा है. CNN की सैटेलाइट तस्वीरों में खोमिन और तबरेज इलाकों में ट्रैक्टर और डंप ट्रक से टनल एंट्रेंस खोले जा रहे हैं. अमेरिका-इजरायल हमलों में फंसे मिसाइल लॉन्चरों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है. ईरान अपनी मिसाइल क्षमता बचाने में जुटा है.
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) का दावा है कि ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइलें प्रभावहीन हो चुकी हैं. लेकिन अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं और वो भूमिगत स्टोरेज से उन्हें दोबारा सक्रिय कर सकते हैं.
उत्तर कोरिया ने दावा किया कि उसके पास ईरान जैसा हथियार है. उसने इस हफ्ते क्लस्टर वॉरहेड वाली बैलिस्टिक मिसाइल का सफल टेस्ट किया. ह्वासोंग-11 मिसाइल 6.5 से 7 हेक्टेयर क्षेत्र को पूरी तरह राख कर सकती है. दक्षिण कोरिया के खिलाफ परमाणु शक्ति बढ़ाने के लिए तीन दिन तक कई नए वेपन सिस्टम का टेस्ट किया गया.
पाकिस्तान ने कोलकाता पर हमले की धमकी दी है. इसके पीछे उसका सबसे लंबी दूरी वाली मिसाइल शाहीन-III है, जिसकी रेंज 2750 किलोमीटर है. यह मिसाइल पूरे भारत को निशाना बना सकती है. पाकिस्तान के पास शाहीन-II (1800 किमी), अबाबील (2200 किमी, MIRV) और गौरी (1500 किमी) जैसी अन्य मिसाइलें भी हैं.
ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हमलों के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया, जिससे दुनिया के 20% तेल-गैस का ट्रांसपोर्टेशन रुक गया. कीमतें 60 प्रतिशत बढ़ गईं. राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 अप्रैल को यू-टर्न लिया और कहा कि अब जबरन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुलवाएंगे. ईरान की ‘चोक पॉइंट वॉरफेयर’ रणनीति ने कम समय में सफलता हासिल कर ली है.
ईरान जंग में सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुए हथियार थे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें (480+) और हमलावर ड्रोन (1200+). अमेरिका-इजरायल ने 900 से ज्यादा हवाई हमले किए. 1800 से अधिक प्रिसिजन बम गिराए. कुल मिलाकर मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों ने ही सबसे ज्यादा तबाही मचाई.
तुर्की ईरान जंग में तटस्थ रोल निभाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन ईरान की ओर से आ रहे मिसाइल उसका गुस्सा भड़का रहे हैं. NATO सदस्य होने के कारण तुर्की पश्चिमी सुरक्षा ढांचे के साथ खड़ा है, पर वह सीधे युद्ध में शामिल होने से बच रहा है
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया कई बार अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) परीक्षण कर चुका है, जिनकी रेंज अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता दिखाती है. खासकर सॉलिड-फ्यूल मिसाइलें ज्यादा खतरनाक मानी जाती हैं, क्योंकि इन्हें लॉन्च से पहले पहचानना मुश्किल होता है.
पिछले 28 दिनों से अमेरिका-इजरायल की भारी बमबारी के बावजूद ईरान के 5 घातक हथियार अब भी चुनौती दे रहे हैं. फतह हाइपरसोनिक मिसाइल, ज़ोल्फगार बैलिस्टिक मिसाइल, शाहेद-136 ड्रोन, शाहाब-3 और खोर्रमशहर-4 मिसाइलें तेज, सस्ती और रडार से छिपने में माहिर हैं. ये हथियार दुश्मन के डिफेंस को भेदकर युद्ध जारी रखे हुए हैं.
ईरान युद्ध के पहले 14 दिनों (28 फरवरी से 14 मार्च 2026) में 56 लाख टन CO2 और ग्रीनहाउस गैसें निकलीं, जो आइसलैंड के पूरे साल के उत्सर्जन से ज्यादा हैं. इमारतों के गिरने, तेल सुविधाओं पर हमलों और ईंधन खपत से ज्यादा प्रदूषण हुआ. क्लाइमेट एंड कम्युनिटी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध जलवायु पर भारी बोझ डाल रहा है.
ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध रोकने के लिए कई शर्तें रखीं हैं, जिनमें खाड़ी देशों से अमेरिकी सैन्य बेस हटाना, प्रतिबंध खत्म करना और समुद्री मार्गों पर नियंत्रण शामिल है. ईरान ने युद्ध के नुकसान के लिए मुआवजा मांगा है और हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायल के हमलों को रोकने की मांग भी की है.
इजरायल में एक ऐसा सिस्टम है जो आयरन डोम से भी बेहतर है. ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तुलना में ज्यादा लोगों की जान बचाता है. रडार मिसाइल को पकड़ते ही 90 सेकंड पहले सायरन बज जाते हैं. SMS आ जाता है. इससे लोग तुरंत शेल्टर में पहुंच जाते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में...
24 मार्च 2026 को ईरान ने इजरायल के तेल अवीव शहर पर मिसाइल दागी. हमले में कई लोग घायल हो गए. सुरक्षा बल और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे. इजरायल ने जवाबी हमलों की तैयारी शुरू कर दी है. ईरान ने इसे पिछले हमलों का जवाब बताया. तेल अवीव में दहशत फैल गई है और युद्ध के और बढ़ने की आशंका है.
ईरान ने इजरायल के डिमोना न्यूक्लियर सेंटर के पास मिसाइल हमला किया. सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. डिमोना में इजरायल का मुख्य परमाणु प्लांट है जहां हथियारों पर रिसर्च होती है. इस हमले से न्यूक्लियर वॉर का डर पूरी दुनिया में फैल गया. अभी युद्ध पारंपरिक है, लेकिन एक छोटी सी गलती पूरे मिडिल ईस्ट को परमाणु युद्ध में धकेल सकती है.
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर युद्ध के कारण पाबंदी लगा दी है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार प्रभावित हुआ है. ट्रंप बार-बार सहयोगी देशों से इस रास्ते को खुलवाने के लिए सहयोग मांग रहे हैं. इस बीच, नाटो महासचिव मार्क रुट ने बताया कि 22 देश अब शिपिंग चैनल की सुरक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं.
क्या ईरान के बाद अब अमेरिका पाकिस्तान को टारगेट करेगा? क्योंकि अमेरिका उसके मिसाइल और परमाणु हथियारों के प्रोग्राम को लेकर टेंशन में है. कहीं ऐसा न हो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अमेरिका कोई सख्त कदम उठाए. पाकिस्तान के पास फिलहाल 170 परमाणु बम हैं. मिसाइल प्रोग्राम तेजी से आगे बढ़ रहा है.