बैलिस्टिक मिसाइल (बीएम) (Ballistic Missiles) किसी लक्ष्य पर हथियार पहुंचाने के लिए प्रोजेक्टाइल मोशन का उपयोग करती है. ये हथियार अपेक्षाकृत छोटे अवधि (brief periods) के दौरान ही संचालित होते हैं. यह मध्यम दूरी की मिसाइल है. बैलिस्टिक मिसाइलें क्रूज मिसाइलों से अलग होती हैं. एक बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्टाइल मोशन के साथ अपने दिशा के उड़ान को एक बड़े आर्क के रूप में ऊपर और नीचे की कर सकता है. वहीं क्रूज मिसाइलें हवा में स्व-चालित होती हैं, रॉकेट प्रोपेलेंट की बदौलत एक सीधी रेखा में और कम ऊंचाई पर उड़ती हैं.
कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (एसआरबीएम) आमतौर पर पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर रहती हैं, जबकि अधिकांश बड़ी मिसाइलें वायुमंडल के बाहर उड़ान भर सकती हैं.
एक बैलिस्टिक मिसाइल तीन भाग होते हैं:- संचालित उड़ान भाग(powered flight portion), मुक्त-उड़ान भाग (free-flight portion), और पुनः प्रवेश चरण (re-entry phase), जहां मिसाइल पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश करती है. कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों वायुमंडल के अंदर ही रहती हैं, इसलिए इनके उड़ान फेज आईसीबीएम के पहले दो चरण ही होते हैं.
बैलिस्टिक मिसाइलों को खास साइटों या मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है, जिसमें वाहन (जैसे, ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर), विमान, जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं.
हूती विद्रोहियों को मुख्य हथियार ईरान से मिलते हैं. हिज्बुल्लाह ट्रेनिंग और तकनीकी मदद देता है. हमास से सीधा बड़ा हथियार ट्रांसफर नहीं होता. ये हथियार समुद्री और जमीनी रास्तों से तस्करी होकर आते हैं.
सऊदी अरब हूतियों को कमजोर रखना चाहता है ताकि वे बड़े हमले न कर सकें, लेकिन इतना मजबूत भी नहीं छोड़ना चाहता कि वे पूरी तरह खत्म हो जाएं और ईरान सीधे मैदान में उतरे. साथ ही, यमन के दलदल में नहीं फंसना चाहता. बड़े आर्थिक नुकसान से बचना भी है.
सऊदी अरब ने यमन में हूती ठिकानों पर चीन की DF-15A बैलिस्टिक मिसाइल दागी. यह निशाने से चूककर रेगिस्तान में गिर गई. चीनी मिसाइल तकनीक का युद्ध में पहला संभावित इस्तेमाल विफल रहा.
हूती विद्रोही सऊदी अरब की सीमा से सटी हुई उत्तरी यमन में बैठे हैं. हाल में लाल सागर तट पर उनके कब्जे और मिसाइल हमलों से सऊदी के लिए खतरा बढ़ गया है. तेल मार्ग और सीमा सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
सऊदी अरब 2015 से यमन सरकार का समर्थन कर हूतियों के खिलाफ लड़ रहा है. दोनों पक्षों में सैनिकों, टैंकों, मिसाइलों और जेट्स की भारी असमानता है. हूती ड्रोन-मिसाइल पर निर्भर है. सऊदी आधुनिक हवाई ताकत वाला है.
यमन के हूतियों ने सऊदी अरब के शरूराह में ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से एक बड़ा हमला किया है, हूतियों ने इस दौरान सैन्य हथियार डिपो और कमांड रूम को निशाना बनाया. हूती प्रवक्ता ने इसे सऊदी की आक्रामकता का जवाब बताया है और चेतावनी दी है कि अगर सऊदी ने अटैक नहीं रोके तो वो और घातक हमले करेंगे.
हूतियों ने मोखा पोर्ट पर कब्जा कर लिया. ट्रंप ने सऊदी के हमले के अनुरोध को ठुकराया. अब रियाद खुद हवाई अभियान की तैयारी कर रहा है. लाल सागर शिपिंग और तेल निर्यात पर खतरा बढ़ने से तेल कीमतें चढ़ गईं.
अमेरिकी और मिडिल ईस्ट खुफिया सूत्रों के अनुसार ईरान ने अंडरग्राउंड फैसिलिटी में बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन दोबारा शुरू कर दिया है. युद्ध के दौरान हुए हमलों के बावजूद यह क्षमता लौटने से अमेरिका-इजरायल के दावे कमजोर हो रहे हैं.
अमेरिकी संस्था FAS के अनुमान के अनुसार भारत के पास 190 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से 160 से ज्यादा लॉन्चरों से जुड़े हैं. अतिरिक्त हथियार आगामी मिसाइलों के लिए हैं. भारत इन हथियारों के लिए नो-फर्स्ट-यूज नीति बनाए हुए है.
पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ कोई सीधा सैन्य हमला नहीं शुरू किया है. मक्का रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब पर हूती हमलों के जवाब में पाकिस्तान डिफेंसिव मिलिट्री मिशन या स्ट्रैटेजिक मदद देने के लिए बाध्य हो सकता है.
भारत अपने Su-30MKI लड़ाकू विमानों में रूस के RVV-BD मिसाइल को शामिल करने की तैयारी कर रहा है. यह मिसाइल 7408 km/hr की रफ्तार से उड़ती है. 200-300 किमी रेंज है. AWACS जैसे जरूरी टारगेट को दूर से ही नष्ट कर सकती है.
ईरान अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों और अमेरिकी ठिकानों पर शाहेद ड्रोन तथा फतेह समेत बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर रहा है. सस्ते ड्रोन और मिसाइलों की बौछार से एयर डिफेंस सिस्टम को थकाया जा रहा है.
पूर्व डीआरडीओ प्रमुख ने सुरक्षा सभा में कहा कि पारंपरिक प्लेटफॉर्म के साथ लो-कॉस्ट ऑटोनॉमस सिस्टम का रोल बढ़ेगा. इंडस्ट्री पार्टनरशिप, स्वदेशीकरण और स्पेस क्षमता से भारत आत्मनिर्भर बन रहा है. निर्यात और इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है.
सीडीएस जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने आजतक सुरक्षा सभा में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ सशस्त्र बलों की नहीं, बल्कि सरकार, उद्योग, तकनीक, अकादमिया और पूरे समाज की जिम्मेदारी है. बदलते खतरों, मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया.
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं और 100 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है. ये हमले होर्मुज में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में किए गए हैं. ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया है.
ईरान के साथ लंबे युद्ध के बीच अमेरिका के Patriot इंटरसेप्टर समेत कई अहम हथियारों का भंडार तेजी से घटा है, जिससे चीन और रूस के मोर्चे पर अमेरिकी सैन्य तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ रही है.
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति बताई. सेनाओं ने लोअर एयरस्पेस का इस्तेमाल किया ताकि संघर्ष का स्तर कम रहे, सफलता सुनिश्चित हो और दुश्मन को सरप्राइज मिले.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO द्वारा विकसित सभी मिसाइल सिस्टम की तकनीक भारतीय इंडस्ट्री को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी है. इससे देश में ही एडवांस मिसाइलें बन सकेंगी.
पाकिस्तान में चीन और तुर्की के सैन्य विमानों की आवाजाही तेज हुई है. टीबी2 ड्रोन, लॉयटरिंग म्यूनिशन और उपकरणों की आपूर्ति का दावा किया गया है. भारत के खिलाफ संभावित तैयारियों और क्षेत्रीय प्रभावों पर चर्चा हो रही है.
साउथ कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि नॉर्थ कोरिया रूस में और सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है, लेकिन तत्काल तैनाती के कोई संकेत नहीं हैं. हथियारों की आपूर्ति जारी है.
अमेरिकी नौसेना ने AIM-424 मैलिस नामक नई लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल का खुलासा किया. यह F-35C के इंटरनल वेपन बे में फिट होती है. स्टेल्थ प्रोफाइल बनाए रखती है. 463 किलोमीटर से अधिक रेंज देती है.