बैलिस्टिक मिसाइल (बीएम) (Ballistic Missiles) किसी लक्ष्य पर हथियार पहुंचाने के लिए प्रोजेक्टाइल मोशन का उपयोग करती है. ये हथियार अपेक्षाकृत छोटे अवधि (brief periods) के दौरान ही संचालित होते हैं. यह मध्यम दूरी की मिसाइल है. बैलिस्टिक मिसाइलें क्रूज मिसाइलों से अलग होती हैं. एक बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्टाइल मोशन के साथ अपने दिशा के उड़ान को एक बड़े आर्क के रूप में ऊपर और नीचे की कर सकता है. वहीं क्रूज मिसाइलें हवा में स्व-चालित होती हैं, रॉकेट प्रोपेलेंट की बदौलत एक सीधी रेखा में और कम ऊंचाई पर उड़ती हैं.
कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (एसआरबीएम) आमतौर पर पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर रहती हैं, जबकि अधिकांश बड़ी मिसाइलें वायुमंडल के बाहर उड़ान भर सकती हैं.
एक बैलिस्टिक मिसाइल तीन भाग होते हैं:- संचालित उड़ान भाग(powered flight portion), मुक्त-उड़ान भाग (free-flight portion), और पुनः प्रवेश चरण (re-entry phase), जहां मिसाइल पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश करती है. कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों वायुमंडल के अंदर ही रहती हैं, इसलिए इनके उड़ान फेज आईसीबीएम के पहले दो चरण ही होते हैं.
बैलिस्टिक मिसाइलों को खास साइटों या मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है, जिसमें वाहन (जैसे, ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर), विमान, जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं.
ईरान के पास कई अंडरग्राउंड ड्रोन और मिसाइल बेस हैं. जिनमें मिसाइलों और ड्रोन को बनाया जाता है. रखा जाता है. ताकि इसपर हमला ने किया जा सके. मिसाइल सिटी की वजह से खाड़ी देशों में खलबली मच गई है. सुरंगों के अंदर मिसाइलों से लैस सैकड़ों ड्रोन्स दिख रहे हैं.
ईरान और अमेरिका की ओमान में शांति वार्ता होनी है. परमाणु समझौते की बहाली पर चर्चा भी होगी. लेकिन एकदूसरे पर भरोसा इतना कम है कि ईरान ने खोर्रमशहर-4 जैसी एडवांस मिसाइलें तैनात कर दी हैं. अमेरिका ने मध्य पूर्व में डिफेंस सिस्टम मजबूत किए हैं. दोनों ओर मिसाइलें तनी हुईं.
ईरान की IRGC ने नई बैलिस्टिक मिसाइल खोर्रमशहर-4 को दुनिया के सामने पेश किया. रेंज 2000 किमी है. वॉरहेड 1500 किग्रा है. हाइपरसोनिक स्पीड और मैन्यूवर क्षमता से डिफेंस सिस्टम को चकमा देगी. भूमिगत मिसाइल सिटी में तैनाती की गई है. ईरान की नीति अब डिफेंसिव से ऑफेंसिव की ओर बढ़ रही है. इजरायल-अमेरिका के लिए खतरा बढ़ गया है.
ईरान ने अपनी सभी घरेलू बैलिस्टिक मिसाइलों को पूरी तरह अपग्रेड कर लिया है. सेना प्रमुख मेजर जनरल अब्दोलरहीम मूसावी ने आईआरजीसी की अंडरग्राउंड सिटी में बताया कि जून के इजरायल युद्ध से सीख लेकर सटीकता, रेंज और सॉलिड फ्यूल तकनीक में सुधार किया गया है. अब आक्रामक नीति अपनाई जाएगी. शस्त्रागार में 2 से 3 हजार मिसाइलें हैं. जिनकी रेंज 2000 किमी है.
तनाव के बीच Iran ने बैलिस्टिक मिसाइलों पर किया बड़ा ऐलान... अमेरिका के लिए चुनौती
ईरान के 5 बड़े हथियार अमेरिकी नौसेना को मिडिल ईस्ट में चुनौती दे सकते हैं. फतह हाइपरसोनिक मिसाइलें, खलीज-ए-फार्स एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें, सेज्जिल/खोर्रमशहर बैलिस्टिक मिसाइलें, कादर/गादर क्रूज मिसाइलें और शाहेद स्वार्म ड्रोन्स. ये स्वार्म अटैक, सैचुरेशन और A2/AD रणनीति से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यूएस कैरियर ग्रुप को महंगा/जोखिम भरा बना सकते हैं.
चीन के टॉप मिलिट्री जनरल जनरल झांग यूक्सी पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्रवाई ने तहलका मचा दिया है. ये कदम, भ्रष्टाचार, जासूसी और PLA की ऑपरेशनल तैयारी से जुड़ा हो सकता है. ये बेहद अचरज की बात है कि चीनी मिसाइलों में फ्यूल की जगह पानी भरा हुआ पाया गया था. यही वजह रही कि जिनपिंग ने 2023 और 2024 में PLA रॉकेट फोर्स के लीडरशिप को हटा दिया था. माना तो यह भी जाता है कि झांग ने चीन के न्यूक्लियर सीक्रेट्स अमेरिका को दिए थे.
ईरान में जंग की आशंका बढ़ी है. पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया है. रूस, चीन और ईरान मध्य फरवरी में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने वाले हैं. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइलों और फास्ट बोट्स की तैनाती की है. विशेषज्ञ कहते हैं कि युद्ध संभव है पर अभी बातचीत का मौका बाकी है.
ईरान पर हमला कभी भी हो सकता है... क्योंकि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिया है. यह बैलिस्टिक मिसाइलों को 150-200 किमी दूर से और 150 किमी ऊंचाई पर हिट-टू-किल टेक्निक से नष्ट करता है. ईरान की मिसाइलों से अमेरिकी बेस और इजरायल की रक्षा के लिए THAAD + पैट्रियट का लेयर्ड डिफेंस बनाया जा रहा है.
THAAD Missile Defense System: ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने Middle East में THAAD तैनात किया. जानिए कैसे काम करता है यह एडवांस मिसाइल डिफेंस सिस्टम और क्यों है इतना अहम.
भारत का अग्नि मिसाइल सिस्टम स्वदेशी परमाणु डिटरेंस की मजबूत ढाल है. अग्नि-5 की MIRV तकनीक से एक मिसाइल कई लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकती है. रेंज 5000+ किमी और स्पीड 29635 km/hr है. पूरी तरह मोबाइल है. अगर पाकिस्तान या चीन युद्ध शुरू करें, तो यह सेकंड स्ट्राइक से दुश्मन के प्रमुख ठिकानों को तबाह कर सकता है.
USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है. इसमें एक सुपरकैरियर, 3-6 डिस्ट्रॉयर्स/क्रूजर, 1-2 पनडुब्बियां, 7000-8000 सैनिक और 65-70 विमान (F-35, F/A-18 आदि) शामिल हैं. सैकड़ों टोमाहॉक मिसाइलों से ईरान के एयरबेस, नेवी, ऑयल फैसिलिटी और न्यूक्लियर साइट्स पर भारी हमला कर सकता है.
पाकिस्तान और चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. पाक की ARFC में फतह सीरीज (750-1000 किमी) तेजी से बढ़ रही है, जबकि चीन की PLARF दुनिया की सबसे बड़ी है- 1250+ मिसाइलें, 600+ परमाणु वॉरहेड और हाइपरसोनिक तकनीक है. भारत की मिसाइलें (अग्नि-5, ब्रह्मोस) मजबूत हैं, लेकिन संख्या और टेक्नोलॉजी में पीछे हैं. दो-मोर्चे पर जंग का खतरा गंभीर परिणाम ला सकता है.
ईरान की सैन्य ताकत मध्य पूर्व में मजबूत है. 2025 ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में 16वें स्थान पर है. इसके पास हजारों मिसाइलें और ड्रोन हैं. ईरान से अमेरिका की दूरी बहुत ज्यादा है इसलिए ईरान वहां तक नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा. लेकिन अरब देशों में अमेरिकी बेस पर हमला करेगा. अमेरिका के लिए दूरी समस्या नहीं है.
ट्रंप ने फिर ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा जताई है. वो भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर. ग्रीनलैंड दुर्लभ खनिज, पानी और आर्कटिक रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है. चीन की दिलचस्पी अमेरिका को चिंतित करती रहती है. 2019 में खरीद प्रस्ताव ठुकराया गया था. थुले बेस पहले से अमेरिकी नियंत्रण में है. संसाधन और भू-रणनीति इसका मुख्य कारण है.
DRDO को नई शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल BM-04 के विकास के लिए परमिशन मिल गया है. यह 400-1500 किमी रेंज वाली मिसाइल पिनाका और अग्नि के बीच के गैप को भरकर कन्वेंशनल डिटरेंस मजबूत करेगी. रोड-मोबाइल, कनिस्टर लॉन्च, 500 किग्रा वारहेड वाली यह मिसाइल सटीक हमले करेगी. जल्द परीक्षण शुरू होंगे.
रूस अपनी नई न्यूक्लियर हाइपरसोनिक मिसाइल ओरेश्निक को बेलारूस के क्रिचेव एयरबेस पर तैनात कर रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों से तेज निर्माण और लॉन्चर सुविधाएं दिख रही हैं. यह मिसाइल 12000 km/hr की स्पीड से उड़ती है. इसकी रेंज 5500 km तक है. यह कदम NATO को चेतावनी और यूरोप में रूस की ताकत बढ़ाने का राजनीतिक संदेश है.
चीन ने एक साधारण कार्गो जहाज को मिसाइलों से लैस कर दिया है. इसके डेक पर 60 वर्टिकल लॉन्च सेल, बड़ा रडार और CIWS सिस्टम लगे हैं. यह अमेरिकी डेस्ट्रॉयर की तुलना में दो-तिहाई मिसाइल क्षमता रखता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन की कॉमर्शियल जहाजों को युद्धपोत बनाने की रणनीति का हिस्सा है, जो नौसेना ताकत बढ़ाएगी.
भारत ने 23 दिसंबर 2025 को बंगाल की खाड़ी में गोपनीय रूप से पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया. अनुमान है कि यह 3500 किमी रेंज वाली परमाणु K-4 मिसाइल थी, जो अरिहंत-क्लास पनडुब्बी से लॉन्च हुई. यह भारत की समुद्री परमाणु ट्रायड को मजबूत करता है.
पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने मंगोलिया के पास तीन नए साइलो फील्ड्स में 100 से ज्यादा DF-31 ICBM तैनात की हैं. इनकी रेंज 11,000 किमी तक है. चीन का न्यूक्लियर आर्सेनल 600 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है. 2030 तक 1000 पार कर सकता है.
भारत ने 17-20 दिसंबर 2025 को बंगाल की खाड़ी में मिसाइल परीक्षण के लिए 3550 किमी का डेंजर जोन घोषित किया है. NOTAM जारी कर हवाई-सागरीय यातायात रोका जाएगा. संभावित K-4 SLBM या लंबी रेंज वाली मिसाइल का टेस्ट होने वाला है. चीन की जासूसी जहाजों पर नजर है. यह भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस को मजबूत करेगा.