बैलिस्टिक मिसाइल (बीएम) (Ballistic Missiles) किसी लक्ष्य पर हथियार पहुंचाने के लिए प्रोजेक्टाइल मोशन का उपयोग करती है. ये हथियार अपेक्षाकृत छोटे अवधि (brief periods) के दौरान ही संचालित होते हैं. यह मध्यम दूरी की मिसाइल है. बैलिस्टिक मिसाइलें क्रूज मिसाइलों से अलग होती हैं. एक बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्टाइल मोशन के साथ अपने दिशा के उड़ान को एक बड़े आर्क के रूप में ऊपर और नीचे की कर सकता है. वहीं क्रूज मिसाइलें हवा में स्व-चालित होती हैं, रॉकेट प्रोपेलेंट की बदौलत एक सीधी रेखा में और कम ऊंचाई पर उड़ती हैं.
कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (एसआरबीएम) आमतौर पर पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर रहती हैं, जबकि अधिकांश बड़ी मिसाइलें वायुमंडल के बाहर उड़ान भर सकती हैं.
एक बैलिस्टिक मिसाइल तीन भाग होते हैं:- संचालित उड़ान भाग(powered flight portion), मुक्त-उड़ान भाग (free-flight portion), और पुनः प्रवेश चरण (re-entry phase), जहां मिसाइल पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश करती है. कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों वायुमंडल के अंदर ही रहती हैं, इसलिए इनके उड़ान फेज आईसीबीएम के पहले दो चरण ही होते हैं.
बैलिस्टिक मिसाइलों को खास साइटों या मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है, जिसमें वाहन (जैसे, ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर), विमान, जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं.
क्या ईरान के बाद अब अमेरिका पाकिस्तान को टारगेट करेगा? क्योंकि अमेरिका उसके मिसाइल और परमाणु हथियारों के प्रोग्राम को लेकर टेंशन में है. कहीं ऐसा न हो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अमेरिका कोई सख्त कदम उठाए. पाकिस्तान के पास फिलहाल 170 परमाणु बम हैं. मिसाइल प्रोग्राम तेजी से आगे बढ़ रहा है.
अमेरिका की इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है, जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं. पाकिस्तान के पास सबसे लंबी दूरी की शाहीन-III मिसाइल है. लेकिन नए मिसाइल प्रोग्राम के जरिए पाकिस्तान मिसाइल की रेंज 12000 किलोमीटर तक कर सकता है. इसलिए अमेरिका सतर्क हो गया है.
अमेरिकी रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान, चीन-रूस के साथ मिलकर लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है. भारत-पाक तनाव और परमाणु संघर्ष का खतरा अभी भी बरकरार है.
अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर (DNI) तुलसी गबार्ड ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान लंबी दूरी की ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है, जो सीधे अमेरिकी धरती को निशाना बना सकती हैं.
CENTCOM ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान की हार्डेंड एंटी-शिप मिसाइल साइट्स पर हमला किया. इसमें 5000 पाउंड वजन का बंकर बस्टर बम GBU-72 इस्तेमाल करने की खबर आ रही है. इस स्टोरी में एक वीडियो है जो इसके छोटे वर्जन के टेस्ट का है. उसे देखकर आपको इस बम की ताकत का अंदाजा लग जाएगा.
मोजतबा खामेनेई मौत से बाल-बाल बचे हैं. इजरायली मिसाइलें जब उनके कंपाउंड पर गिरी तो उसके कुछ ही सेकेंड पहले वे बगीचे में निकल गए थे. हमले में उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी और रिश्तेदार मारे गए. लीक ऑडियो में ईरानी अधिकारी ने बताया कि मोजतबा को सिर्फ पैर में हल्की चोट आई. तब से वे सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे.
अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान की missile और drone attack capacity में बड़ी कमी देखने को मिली है. शुरुआती दिनों के मुकाबले अब हमलों की संख्या काफी घट गई है, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान अब भी सीमित स्तर पर हमला करने में सक्षम है. जानिए जंग के पहले दिन और अब के आंकड़ों में कितना अंतर आया है.
कतर एनर्जी ने ईरान के ड्रोन-मिसाइल हमलों के बाद रास लैफन फैसिलिटी बंद कर दी है. इससे दुनिया भर में हीलियम सप्लाई का 33% हिस्सा रुक गया है. इससे MRI मशीनें, सेमीकंडक्टर चिप प्रोडक्शन और रॉकेट फ्यूल पर असर पड़ रहा है. अगर यह बंदी 60-90 दिन चली तो सेमीकंडक्टर और मेडिकल क्षेत्र में बड़ा संकट आ सकता है.
ईरान की 'डांसिंग मिसाइल' सेज्जिल-2 अमेरिका-इजरायल को असहाय बना रही है. यह हवा में नाचती हुई दिशा बदलती है, जिससे आयरन डोम, पैट्रियट या थाड जैसे सिस्टम भी इसे रोक नहीं पाते. 2000 किमी रेंज, सॉलिड फ्यूल और मैन्यूवरेबल वॉरहेड वाली इस मिसाइल का युद्ध में कई बार इस्तेमाल हो चुका है. इससे इजरायली ठिकाने तबाह हुए. ईरान का यह ब्रह्मास्त्र युद्ध का पूरा समीकरण बदल रहा है.
ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4 के 49वें दौर में UAE, बहरीन और कुवैत के अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए. अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर 90 सैन्य लक्ष्य तबाह किए. इजरायल ने तेहरान में दो वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों को मारा. 200 ठिकानों पर हमले किए. सऊदी अरब ने रियाद में 10 ड्रोन नष्ट किए. UAE भी हमलों से जूझ रहा है.
नॉर्थ कोरियाई नेता किम जोंग उन ने 12 अल्ट्रा-प्रिसिजन रॉकेट लॉन्चरों का लाइव-फायर टेस्ट किया. इस दौरान उनके साथ उनकी बेटी किम जू ऐ भी मौजूद रहीं. इस अभ्यास का मकसद दुश्मनों को दहलाना और सामरिक परमाणु हथियारों की ताकत दिखाना है.
ईरान ने अमेरिका से जुड़ी तेल सुविधाओं को 'राख का ढेर' बनाने की धमकी दी है, जबकि ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकी गई तो खार्ग द्वीप के तेल ढांचे को पूरी तरह तबाह कर देंगे. युद्ध के 14 दिनों में 1200+ मौतें हुई हैं. 32 लाख विस्थापित हुए हैं. तेल कीमतें 40% बढ़ीं हैं.
नॉर्थ कोरिया ने शनिवार को अपने पूर्वी तट से बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं हैं, जिसकी पुष्टि साउथ कोरिया और जापान ने की है. मिसाइल पहले ही समुद्र में गिर चुकी हैं. इसे नॉर्थ कोरिया की सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश माना जा रहा है.
ईरान-इजरायल जंग के बीच उत्तर कोरिया ने दागीं 10 बैलिस्टिक मिसाइलें! अलर्ट हुए पड़ोसी देश. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच उत्तर कोरिया की गतिविधियों ने भी क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है. शनिवार यानि 14 मार्च को उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी तट से समुद्र की ओर कई मिसाइलें दागीं. दक्षिण कोरियाई सेना और जापान सरकार के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च की हैं.
ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों में 5 किलो के क्लस्टर बॉमलेट्स लगाए हैं, जो ऊंचाई से छूटकर 11-13 किमी तक फैलकर बेतरतीब हमला करते हैं. ये इजरायल की एयर डिफेंस को बायपास करते हैं, क्योंकि मिसाइल रोकने के बाद भी बॉमलेट्स गिरते रहते हैं. इससे आम लोगों में डर फैल रहा है. यह युद्ध में नई रणनीति है, जो डिफेंस को कमजोर करने की कोशिश है.
मिडिल ईस्ट जंग के 14वें दिन ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका-इज़रायल को चेतावनी दी. खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल-ड्रोन हमले जारी हैं, जबकि तेल कीमतें और विस्थापन बढ़ते जा रहे हैं.
ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमलों में क्लस्टर बम को आम हथियार बना लिया है. जून 2025 में सिर्फ कुछ मिसाइलों में था, लेकिन मार्च 2026 में 300 बैलिस्टिक मिसाइलों में आधी क्लस्टर वॉरहेड से भरी थीं. IDF ने पुष्टि की कि रोजाना नागरिक इलाकों में छोटे बम बिखर रहे हैं. खोर्रमशहर-4 मिसाइल में 50-80 सबमुनिशन्स 10 किमी तक फैलते हैं.
ईरान युद्ध में अमेरिका-इजरायल ने स्टेल्थ बॉम्बर (बी2 स्पिरिट), AI बेस्ड टारगेट सेलेक्शन सिस्टम, कम लागत वाले सुसाइड ड्रोन और सफेद फॉस्फोरस बम का इस्तेमाल किया. ईरान ने क्लस्टर वॉरहेड वाले बैलिस्टिक मिसाइल दागे. ये नए हथियार युद्ध को तेज, सटीक और घातक बना रहे हैं, लेकिन नागरिकों पर खतरा बहुत बढ़ गया है.
अमेरिका-इजरायल हमलों से ईरान के तेल स्टोरेज और रिफाइनरी स्थलों पर आग लगने से तेहरान के ऊपर घना जहरीला काला धुआं फैल गया. नासा के उपग्रह चित्रों में 9 मार्च को 67 किलोमीटर लंबा धुआं दिखा. इस्फहान और बंदर अब्बास में नाइट्रोजन तथा सल्फर डाइऑक्साइड स्तर बहुत बढ़ गया. लोगों की आंखें जल रही हैं और गला खराब हो रहा है.
तेरह देशों ने ईरान युद्ध में भारी जानमाल का नुकसान झेला है. कुल 1690 से अधिक मौतें तथा हजारों लोग घायल हुए हैं. ईरान में 1255 लोग मारे गए. 12 हजार घायल हुए हैं. ईरान ने लंबी दूरी के मिसाइल तथा ड्रोन दागे जबकि अमेरिका और इजरायल ने सटीक हवाई हमले किए. युद्ध अब दसवें दिन पहुंच चुका है.
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि ईरान-रूस का रक्षा सहयोग पुराना है और जारी रहेगा. उन्होंने अमेरिका पर हमलावर होते हुए कहा कि ईरान सिर्फ अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है.