scorecardresearch
 

2500 किमी का रेंज, समंदर खाली करने का NOTAM... भारत कौन सी मिसाइल करने जा रहा परीक्षण?

भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में 6-7 अगस्त 2026 को लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण का नोटैम जारी किया है. रेंज करीब 2530 किलोमीटर है. पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हुई हैं.

Advertisement
X
ये है भारत की के-4 मिसाइल का पुराना फोटो. (File Photo: India Today Archive)
ये है भारत की के-4 मिसाइल का पुराना फोटो. (File Photo: India Today Archive)

भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण के लिए सूचना जारी की है. यह नोटिस एयरमैन (NOTAM) के रूप में आया है, जिसमें रेंज लगभग 2530 किलोमीटर बताई गई है. परीक्षण का समय 6 से 7 अगस्त 2026 के आसपास है. 

इसने रक्षा विश्लेषकों, क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है. भारत नियमित रूप से अपनी मिसाइल क्षमताओं का परीक्षण करता है, लेकिन इतनी लंबी दूरी वाला कॉरिडोर हमेशा खास महत्व रखता है क्योंकि यह बैलिस्टिक या सबमरीन लॉन्च सिस्टम की ओर इशारा करता है. 

नोटैम यानी Notice to Airmen एक आधिकारिक सूचना है जो पायलटों और समुद्री यातायात को बताती है कि किसी खास क्षेत्र में उड़ान या नौवहन प्रतिबंधित रहेगा. मिसाइल परीक्षण के दौरान मलबा गिरने या उड़ान पथ के खतरे से बचाने के लिए यह जरूरी होता है. इस बार का नोटैम हिंद महासागर क्षेत्र को कवर करता है. सतह से लेकर असीमित ऊंचाई तक लागू हो सकता है. 

यह भी पढ़ें: J-K: सेना ने मार गिराया पाकिस्तान का चाइनीज ड्रोन, भारतीय सैन्य ठिकानों की कर रहा था Video रिकॉर्डिंग!

Advertisement

ऐसी अधिसूचनाएं आमतौर पर ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप या आसपास के लॉन्च साइटों से जुड़ी होती हैं, जहां डीआरडीओ और स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड नियमित परीक्षण करते हैं. 2530 किलोमीटर का क्षेत्र पिछले कई परीक्षणों के पैटर्न से मेल खाता है. 

संभावित मिसाइल सिस्टम और तकनीकी पहलू

इस रेंज के आधार पर यह परीक्षण अग्नि श्रृंखला के किसी एडवांस वर्जन, K-4 जैसी पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल या अन्य लंबी दूरी की मिसाइल हो सकती है. भारत के पास अग्नि-5 जैसी मिसाइलें हैं जिनकी रेंज 5000 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है, जबकि के-4 की अनुमानित रेंज करीब 3500 किलोमीटर है. यह समुद्र आधारित न्यूक्लियर डेटरेंस कैपेबिलिटी का हिस्सा है.  

परीक्षण का उद्देश्य सटीकता, मार्गदर्शन प्रणाली, कई वॉरहेड या एडवांस टेक्नोलॉजी को टेस्ट करना हो सकता है. भारत ने हाल के वर्षों में MIRV तकनीक यानी एक मिसाइल से कई टारगेट भेदने की क्षमता भी प्रदर्शित की है. ये परीक्षण स्वदेशी विकास को मजबूत करते हैं.

यह भी पढ़ें: भारत के राफेल-सुखोई कर सकते हैं चीन के जे-20 माइटी ड्रैगन स्टेल्थ जेट का गेम फिनिश

हिंद महासागर भारत की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यहां से चीन, पाकिस्तान और अन्य संभावित खतरों के खिलाफ निरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है. लंबी दूरी की मिसाइलें भारत को अपने क्षेत्र से दूर लक्ष्य भेदने की क्षमता देती हैं, जिससे न्यूक्लियर ट्रायड (जमीन, हवा और समुद्र आधारित) मजबूत होता है. 

Advertisement

यह परीक्षण क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है क्योंकि पड़ोसी देश अपनी निगरानी बढ़ा सकते हैं. इससे पहले चीनी जासूसी जहाजों की मौजूदगी के कारण कुछ परीक्षणों के शेड्यूल बदले गए थे. भारत हमेशा इन परीक्षणों को शांतिपूर्ण और रक्षात्मक बताता है, जो उसके नो फर्स्ट यूज नीति के हिसाब से हैं.  

यह भी पढ़ें: ईरान ने किया अमेरिकी नेवी को 'अंधा', बहरीन में उड़ाया नेविगेशन सिस्टम

सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय नजर

परीक्षण के दौरान नौसेना और वायुसेना सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं. नागरिक उड़ानों और जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता है. दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ और ट्रैकर्स इस नोटैम को करीब से देख रहे हैं. सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर चर्चा चल रही है कि यह किस खास सिस्टम का परीक्षण होगा.

India missile test notam

भारत आमतौर पर सफल परीक्षण के बाद आधिकारिक बयान जारी करता है, जिसमें डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और उद्योग की भूमिका का उल्लेख होता है. भारत पिछले कुछ वर्षों में कई सफल परीक्षण कर चुका है, जिनमें लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें, हाइपरसोनिक मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल शामिल हैं.

ये प्रयास विदेशी निर्भरता कम करने और स्वदेशी उद्योग को बढ़ावा देने के हैं. 2530 किलोमीटर का कॉरिडोर दिखाता है कि भारत अपनी क्षमताओं को लगातार आधुनिक बना रहा है. परीक्षण सफल रहा तो यह न सिर्फ तकनीकी उपलब्धि होगी बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भारत की भूमिका को भी मजबूत करेगी.  

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement