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भारतीय नौसेना को मिलेगा नया अदृश्य हथियार, दुश्मन हो जाएगा बेकार

भारतीय नौसेना ने ADITI 3.0 के तहत टॉन्बो इमेजिंग को स्वदेशी हाई-पावर माइक्रोवेव हथियार डेवलप करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है. इससे भारत चुनिंदा देशों के एलीट क्लब में शामिल हो जाएगा.

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ये है वो हथियार जिस ट्रक और जहाज पर तैनात किया जा सकता है. (Photo: tonboimaging.com)
ये है वो हथियार जिस ट्रक और जहाज पर तैनात किया जा सकता है. (Photo: tonboimaging.com)

भारत अब दुनिया के चुनिंदा देशों की उस एलीट क्लब में शामिल होने जा रहा है, जिनके पास हाई-पावर माइक्रोवेव (HPM) तकनीक है. भारतीय नौसेना ने टॉन्बो इमेजिंग कंपनी को ADITI 3.0 प्रोजेक्ट के तहत स्वदेशी HPM सिस्टम विकसित करने, एकीकृत करने और नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स पर लगाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है.  

HPM एक डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (Directed Energy Weapon) है. यह पारंपरिक गोला-बारूद या मिसाइलों की जगह बेहद शक्तिशाली माइक्रोवेव किरणों का इस्तेमाल करता है. ये किरणें दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, राडार, सेंसर, कम्युनिकेशन उपकरण और ड्रोन को नष्ट या बेकार कर सकती हैं. 

खास बात यह है कि यह बिना किसी विस्फोट के काम करता है. दुश्मन के जहाज, विमान या ड्रोन को बिना फिजिकली हिट किए निष्क्रिय कर सकता है.

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स्वार्म ड्रोन के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार

आजकल समुद्री क्षेत्र में सस्ते स्वार्म ड्रोन (झुंड में हमला करने वाले ड्रोन) बड़े खतरे बन गए हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालिया घटनाएं इसका उदाहरण हैं. HPM सिस्टम ऐसे हमलों का मुकाबला करने में बेहद कारगर साबित हो रहा है क्योंकि एक साथ कई लक्ष्यों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से बेकार किया जा सकता है. भारत अब इस उभरती तकनीक को नौसेना के जहाजों पर लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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ADITI 3.0 प्रोजेक्ट के तहत हुआ कॉन्ट्रैक्ट

यह प्रोजेक्ट रक्षा मंत्रालय के तहत iDEX और डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन द्वारा समर्थित ADITI 3.0 फ्रेमवर्क के अंतर्गत चलाया जा रहा है. टॉन्बो इमेजिंग कंपनी इस प्रणाली को विकसित करेगी और सफल परीक्षणों के बाद नौसेना के कई प्लेटफॉर्म्स पर इसे लगाया जाएगा. 

प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें HPM सिस्टम के जरूरी कंपोनेंट्स - खासकर वैक्यूम ट्यूब आधारित माइक्रोवेव सोर्स को स्वदेशी रूप से विकसित किया जा रहा है.  

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2047 तक 100% स्वदेशी लक्ष्य

भारतीय नौसेना का लक्ष्य है कि 2047 तक न सिर्फ युद्धपोत और पनडुब्बियां, बल्कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम डोमिनेंस, नॉन-काइनेटिक वारफेयर और भविष्य की डिटरेंस टेक्नोलॉजी भी पूरी तरह स्वदेशी हो जाए. HPM प्रणाली इस दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे नौसेना को बिना गोली दागे दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक क्षमता को बेअसर करने की शक्ति मिलेगी.

वर्तमान में अमेरिका, चीन, रूस और कुछ यूरोपीय देश ही HPM तकनीक में उन्नत माने जाते हैं. भारतीय नौसेना द्वारा HPM सिस्टम का विकास एक गेम चेंजर साबित हो सकता है. यह तकनीक पारंपरिक हथियारों की तुलना में सस्ती, सटीक और प्रभावी है, खासकर स्वार्म ड्रोन और असममित खतरे के खिलाफ. DITI 3.0 के तहत टॉन्बो इमेजिंग के साथ यह साझेदारी भारत को उन्नत डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स वाले देशों की सूची में शामिल करेगी. 

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