मानव रहित हवाई वाहन (UAV) या मानव रहित विमान प्रणाली (UAS), जिसे आमतौर पर ड्रोन (Drone) के रूप में जाना जाता है, एक ऐसा विमान है जिसमें कोई मानव पायलट, चालक दल या यात्री नहीं होता है, बल्कि इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है या यह स्वायत्त होता है.
ड्रोन तकनीक की शुरुआत मुख्यतः सैन्य उद्देश्यों के लिए हुई थी. पहले विश्व युद्ध में कुछ देशों ने दुश्मन की टोह लेने के लिए ऐसे उपकरणों का प्रयोग किया था. समय के साथ, तकनीक में सुधार होता गया और अब ड्रोन का उपयोग केवल सेना तक सीमित नहीं रह गया है.
ड्रोन का सबसे पहला और बड़ा उपयोग रक्षा क्षेत्र में होता रहा है. सीमा पर निगरानी, खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और दुश्मन पर सटीक हमला करने के लिए ड्रोन बेहद कारगर साबित हुए हैं.
आधुनिक किसान ड्रोन का उपयोग फसल की स्थिति देखने, कीटनाशकों के छिड़काव और खेतों की निगरानी के लिए कर रहे हैं. इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है.
बाढ़, भूकंप या अग्निकांड जैसी आपदाओं के समय ड्रोन की मदद से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया जा सकता है. इससे राहत कार्यों की योजना बेहतर ढंग से बनाई जा सकती है.
हवाई दृश्य लेने के लिए ड्रोन आजकल फिल्मों, वेब सीरीज, शादियों और आयोजनों में खूब उपयोग किए जा रहे हैं.
अमेजन और जोमैटो जैसी कंपनियां ड्रोन के माध्यम से पैकेज और खाद्य सामग्री की डिलीवरी की दिशा में काम कर रही हैं. इससे भविष्य में समय और ट्रैफिक दोनों से राहत मिल सकती है.
ईरान युद्ध दोबारा छिड़ने पर अमेरिकी इंटरसेप्टर स्टॉक की कमी बड़ी चुनौती बनेगी. पैट्रियट और THAAD की संख्या घटी है. चीन जैसे बड़े युद्ध की तैयारी पर भी असर पड़ेगा.
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने इस हफ्ते 16 यूक्रेनी क्षेत्रों पर करीब 1900 ड्रोन, 1600 बम और 144 मिसाइलें दागीं. हजारों जगहें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिसमें आवासीय इमारतें भी हैं.
मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच ब्लैक सी के बंदरगाह क्यों बने रूस की रणनीति का हिस्सा? क्योंकि इनसे जुड़ा है यूक्रेन का एक्सपोर्ट, इकोनॉमी और दुनिया का अनाज बाजार.
न युद्ध खत्म हो रहा है, न तनाव कम हो रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव में तेहरान की रणनीति ने दुनिया का ध्यान खींचा है. आखिर क्यों ईरान शांति से ज्यादा दबाव वाली स्थिति चाहता है?
जम्मू के खौर सेक्टर में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी निगरानी ड्रोन को मार गिराया. चीनी मूल का यह ड्रोन महत्वपूर्ण रक्षा ठिकानों के पास मंडरा रहा था. 64 जीबी मेमोरी कार्ड बरामद हुआ है. जांच जारी है.
ड्रोन टेक्नोलॉजी इन दिनों तेजी से आगे बढ़ रही है. ड्रोन की वजह से एरियल व्हीकल में भी इनोवेशन हो रहे हैं. चीनी शख्स ने तलवार जैसा एरियल व्हीकल बनाया है. वायरल वीडियो देखने में AI लग सकता है, लेकिन ये असल वीडियो है जहां क्रिएटर तलवार पर खड़े हो कर उड़ते हुए दिख रहा है.
ईरान ने दावा किया कि उसके अरश ड्रोन ने बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर अमेरिकी नेविगेशन सिस्टम को निशाना बनाया. दोनों पक्षों के हमलों से क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ रहा है.
यूक्रेन ने रूस के अंदर डीप स्ट्राइक किए. कीरोव हथियार प्लांट, त्युमेन रिफाइनरी, येकातेरिनबर्ग लॉजिस्टिक्स हब, रोस्तोव फ्यूल डिपो और कैस्पियन सागर में ईरानी कार्गो वाले जहाजों को निशाना बनाया. जेलेंस्की ने इसे 'लॉन्ग-रेंज सैंक्शंस' बताया.
बहरीन और कुवैत ने ईरान के अंदर सैन्य ठिकानों पर सीक्रेट हवाई हमले किए. UAE ने खुफिया जानकारी और एयर कवर दिया. यह खाड़ी देशों की पहली सामने से जवाबी कार्रवाई है.
ट्रंप ने कहा कि पिकएक्स माउंटेन अगला निशाना है. यह ईरान का सबसे गहरा और मजबूत परमाणु केंद्र है, जो नतांज के पास 80-100 मीटर गहराई में चट्टान के नीचे है. इसे नष्ट करना बेहद मुश्किल है.
ईरान की जंग में कुवैत-इराक बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया है. अल-अब्दाली क्रॉसिंग पर ड्रोन हमला हुआ, पहले हवाई हमले हुए और अब जमीनी संघर्ष का खतरा मंडरा रहा है.
DRDO ने ओडिशा तट से लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली स्वदेशी मिसाइल कुशा का सफल उड़ान परीक्षण किया. भारत अब लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल विकसित करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल है.
ईरान के ड्रोन हमलों ने खाड़ी में सीआईए फैसिलिटी को निशाना बनाया है. अमेरिका जांच कर रहा है कि क्या रूस ने टारगेटिंग जानकारी या एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी दी.
मंगलवार सुबह यूक्रेन की सीमा से जुड़े क्रिमिया के चोनहार चेकपॉइंट पर ड्रोन हमले में रूसी ट्रक काफिले पर हमला हुआ. ईंधन टैंकरों सहित कई ट्रक क्षतिग्रस्त हुए. इसका वीडियो वायरल हो रहा है.
ईरान अब अमेरिकी विमानों को सीधे मारने की बजाय उनके रनवे छीन रहा है. इसे डिबेसिफिकेशन कहते हैं. क्षेत्रीय एयरबेस कम होने से अमेरिका के ऑपरेशन मुश्किल हो गए हैं.
नौ रातों के लड़ाई में अमेरिका-ईरान टकराव तेज हो गया है. जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों को नुकसान, ईरान में बुनियादी ढांचे की भारी तबाही हुई है. मिडिल ईस्ट के कई देश प्रभावित हुए हैं.
मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमलों से इलेक्ट्रोस्टाल गोदाम और नोगिंस्क तेल डिपो में आग लगी. काला धुआं छाया हुआ है. यूक्रेन ने 370 से ज्यादा ड्रोन लॉन्च कर रूसी हमले का जवाब दिया.
अमेरिका-ईरान युद्ध में तनाव चरम पर है। ईरान ने अमेरिकी MQ-9 ड्रोन गिराने, होर्मुज स्ट्रेट में दो ऑयल टैंकरों में विस्फोट और कुवैत-जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले का दावा किया है। हालात बेहद गंभीर हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है।
ईरान ने बुशेहर में $3.4 करोड़ मूल्य का अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया है. वहीं, होर्मुज में ईरानी नौसेना की चेतावनी की अनदेखी करने वाले दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों की चपेट में आकर धू-धू कर जल उठे हैं.
ईरान के IRGC ने दावा किया है कि उसने सीरिया के अल-तनफ और कतर के अल उदैद अमेरिकी बेस पर हमला किया. इसमें कई अमेरिकी सैनिक मारे गए और रडार व एयरक्राफ्ट नष्ट हुए.
अमेरिका के हमलों के बावजूद ईरान मिसाइल-ड्रोन हमले जारी रखे हुए है. ट्रंप के 90% सुविधाएं नष्ट होने के दावे के उलट ईरान लगातार हमले कर रहा है. यानी मिसाइल-ड्रोन उत्पादन जारी है. युद्ध लंबा खिंच सकता है.